अमेज़न के जंगलों पर चिंता व्यक्त करने वाले कम्युनिस्टों ने माधव गाडगिल समिति की रिपोर्ट के ख़िलाफ़ कई प्रदर्शन किए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि पश्चिमी घाट के जंगलों को नुक़सान पहुँचाने के कारण केरल में पर्यावरणीय आपदाएँ आ सकती हैं।
फुटबॉल खिलाड़ी रोनाल्डो, ऑस्कर विजेता लियोनार्डो और अंतरराष्ट्रीय गायिका मैडोना और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन सहित कई बड़ी हस्तियों ने अमेज़न के जंगल में लगी आग को लेकर पुरानी फोटो शेयर की। आँकड़े बताते हैं कि 2005 और 2010 में स्थिति कई गुना ज्यादा भयावह थी।
बधाई ट्वीट में अपने देश लिखना यूजर्स को रास नहीं आया। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस किस देश से है। यूजर्स का कहना था कि ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस भारत को अपना देश नहीं मानती। कुछ लोगों ने लिखा कि कॉन्ग्रेस पाकिस्तान या इटली को अपना राष्ट्र मानती है।
एक पाकिस्तानी ने ट्वीट किया, "पहले सुषमा स्वराज और अब अरुण जेटली। इंशाअल्लाह अगले नरेंद्र मोदी और अमित शाह होंगे, क्योंकि इनकी मौत के लिए कश्मीरी दुआ कर रहे हैं। कश्मीर में अत्याचार के लिए ये लोग गुनहगार हैं। ये सब नरक में सड़ेंगे।"
पत्र में जजों से इसे गंभीरता से लेने को कहा गया है। हालॉंकि किसी आवश्यक परिस्थिति में वे मुख्य न्यायाधीश को मैसेज भेज सकते हैं। रजिस्ट्रार जनरल ने जिला जजों से अपने अधीनस्था न्यायिक कर्मचारियों को भी इस संबंध में निर्देशित करने को कहा है।
स्व-घोषित 'उदारवादियों' और लिबरपंथियों का यह रेगुलर पैटर्न बन गया है। ये किसी भी भाजपा नेता की मृत्यु के बाद जश्न मनाते हैं। संवेदना, संस्कृति, जीवन-मरण जैसे शब्द इनकी डिक्शनरी में मानो है ही नहीं। अगर होता तो शायद ये वो नहीं होते, जो आज ये बन चुके हैं!
अर्शी ख़ान ने इस साल की शुरुआत में ही कॉन्ग्रेस का हाथ थामा था। पार्टी में उन्हें एक बड़ा पद भी दिया गया था। उन्होंने तब ये भी कहा था कि वो लोकसभा चुनाव में भाग लेंगी। पार्टी ने उन्हें मुंबई प्रदेश माइनॉरिटी वेलफेयर कमिटी का वाइस प्रेसिडेंट बनाया था, लेकिन...
"सर आप इस इमेज को ट्वीट करके चिदंबरम के ख़िलाफ़ पुलिस द्वारा किए जा रहे 'अत्याचार' को बंद करवा सकते हैं।" इस पर पाकिस्तानी सांसद ने तीव्र उत्सुकता में आकर लिख डाला - संयुक्त राष्ट्र के साथ इस इमेज को शेयर कर रहा हूँ।
"गणित की सवाल। अगर कुछ लोग (हिरासत में हैं)= शांति, अगर कुछ लोग (हिरासत में नहीं हैं)= पत्थरबाजी, अशांति और भी बहुत कुछ, ये आपको कुछ लोगों के बारे में क्या बताता है?"
थम्स का कहना है कि उन्होंने ‘बोलसोनारो विश्वास और सम्मान के लायक क्यों हैं’, इसका जवाब इसलिए नहीं दिया क्योंकि वो किसी चीज के लायक नहीं है। थम्स ने 188 पेज खाली छोड़ने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि लोग विवादित नेता के बारे में अपनी खुद की राय बताएँ।