जब भारत के कठमुल्ले तालिबान की वापसी पर भांगड़ा कर रहे हैं, देश के विपक्षी दल भी इस बात को पुख्ता करने में लगे हैं कि जनता के मनोरंजन में कोई कमी न रह जाए।
"हम सभी दिन रात कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए चैन की साँस नहीं ले रहे हैं। ऐसे में उम्मीद थी कि संकट के इस समय में कम से कम देश एक होगा और राजनीतिक दल इसे राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाएँगें।"
सवाल बस इतना था कि क्या गाँधी परिवार ने अस्थायी क्वारंटाइन सेंटर्स, अस्पताल, ऑक्सीजन प्लांट्स बनवाने या प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में कोई योगदान दिया है?