लड़की की हालत देख उसके घरवालों ने उसे अस्पताल में भर्ती करवाया और आंशिक सुधार होने पर पुलिस को घटना की तहरीर दी। तीनों आरोपितों के ख़िलाफ़ आईपीसी धारा 363, 366, 376 व 3/4 पॉक्सों एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
एसपी साउथ रवीना त्यागी ने बताया कि शुरुआती जाँच में पता चला कि पीड़ित और आरोपित एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। उसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ और फिर मारपीट हुई। जय श्री राम के नारे लगवाने के विरोध में पीटने की बात गलत है।
राज्य में भाजपा की सरकार। केंद्र में भाजपा की सरकार। लेकिन मार दिए गए एक भाजपा विधायक को न्याय नहीं मिल पाया। 2005 में हुई हत्या के मामले में आज तक कोई अपराधी नहीं! किस पर दोष लगाया जाए? क्या सरकारें अपना काम करने में विफल रहीं? क्या न्यायपालिका को सच नहीं दिख पाया? या फिर मुख़्तार अंसारी और उसके परिवार का रसूख सब पर भारी पर गया?
5000 रुपए कमाने के लिए बिना लाइसेंस वाली रिवॉल्वर या पिस्तौल की सूचना देनी होगी। पुलिस जब रिवॉल्वर पकड़ लेगी तो 5000 रुपए का इनाम देगी। सुरक्षा के लिहाज से इस तरह की सूचना को पुलिस अधीक्षक को उनके आधिकारिक मोबाइल नंबर पर दी जा सकती है।
मौला बाबा मज़ार पर दुआ माँगने के बाद दोनों लड़कियाँ अचानक लापता हो गईं। मज़ार क्षेत्र में और उसके आसपास बड़े पैमाने पर उनकी तलाश के बावजूद माँ गुड्डी देवी उनका पता नहीं लगा सकीं। लापता होने के बाद इन लड़कियों के मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ़ हो गए।
गर्मी के चलते मुदस्सिर की दो बेटियाँ बाहर सो रही थीं। लड़कियों को सोता देख महताब और आफ़ताब ने उन पर फब्तियाँ कसनी शुरू कर दीं। विरोध करने पर मारपीट शुरू कर दी। चीख-पुकार सुनकर लड़कियों की माँ बिलिकिस बेगम बीच-बचाव करने आईं लेकिन उन्हें लाठियों से मार-ंमार कर...
बच्चों की लड़ाई का मामला शांत होने के बाद किस्मत अली दर्जन भर 'अपने लोगों' के साथ गाँव में पहुँचा। उन्होंने लाठी-डंडे से लैस होकर तिलकराम के घर धावा बोल दिया। जब तिलकराम के परिजनों ने इसका विरोध किया, तब किस्मत अली व उसके लोगों ने सब की पिटाई की।
"मेरे पास नौकरी नहीं है, शायद मिलेगी भी नहीं। कोई भी किसी लूजर को नौकरी नहीं देता। अपनी ग्रेड शीट देखकर हैरान हूँ। हर किसी की तरह मेरे भी सपने थे। लेकिन अब सब खत्म है। ये सारी पॉजिटिव बातें, हमेशा मुस्कुराना, लोगों से कहना कि मैं ठीक हूँ, जबकि मैं ठीक नहीं हूँ।"
इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बावजूद अभी 100 से भी अधिक ऐसे अधिकारी हैं, जिन पर सरकार की नज़र है। इन सुस्त अधिकारियों को सरकार ने अभी अपने रडार पर रखा है और इन पर कार्रवाई की गाज कभी भी गिर सकती है।
मुहम्मद फुरकान नाम के इस युवक की कब्र खोद ली गई थी और जब उसे दफनाया जाने वाला था, तभी परिवार के कुछ सदस्यों ने उसके शरीर में हरकत देखी। इसके बाद रोना-धोना बंद हो गया और हैरान परिजन मुहम्मद फुरकान को अस्पताल ले गए जहाँ उसे वेंटीलेटर पर रखा गया है।