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किताबों की चोरी, भूमाफिया घोषित होने के बाद अब कत्थे के पेड़ कटवाने में फँसे आज़म खान

कोसी नदी के पास की 12 एकड़ के करीब भूमि आज़म खान की जौहर यूनिवर्सिटी को सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान दी गई थी। बाद में पता चला कि लीज़ के प्रस्ताव में इस बात का ज़िक्र ही नहीं है कि प्रस्तावित भूमि नदी किनारे है।

यूनिवर्सिटी से किताबें चुराने, सिंचाई विभाग की ज़मीन हड़पने, शत्रु सम्पत्ति को फर्जीवाड़ा कर फ़र्ज़ी वक़्फ़ बोर्ड की सम्पत्ति घोषित किए जाने के बाद सपा नेता आज़म खान अब कत्थे के पेड़ कटवाने के मामले में फँसते नज़र आ रहे हैं। बिना अनुमति कोसी नदी के तट से 300 कत्थे (खैर) के पेड़ कटवाने के मामले में प्रशासन ने अपनी जाँच रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) को भेजे जाने की पुष्टि की है। इसके अलावा यही भूमि आज़म खान के जौहर विश्वविद्यालय को आवंटित हो कैसे गई, इसकी भी जाँच अलग से चल रही है।

‘नदी की ज़मीन कैसे गई लीज़ पर?’

कोसी नदी के पास की 12 एकड़ के करीब भूमि आज़म खान की जौहर यूनिवर्सिटी को सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान दी गई थी। बाद में पता चला कि लीज़ के प्रस्ताव में इस बात का ज़िक्र ही नहीं है कि प्रस्तावित भूमि नदी किनारे है। शासन ने भी भूमि पर ज़रूरी पड़ताल की अनदेखी की।

इसके बाद बात यह भी खुली कि गाटा संख्या 1252 और 1418 नंबर की जमीन पर फरवरी 2007 में खैर के पेड़ थे, जोकि अब गायब हैं। एसडीएम सदर ने जो जाँच रिपोर्ट प्रशासन को 4 जून को भेजी, उसमें पेड़ों के गायब होने और इस चीज़ के शासन के नियमों का उल्लंघन होने की बात कही गई है। एनजीटी को जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मामले की जाँच के बाद तैयार किया था। इस टीम को जाँच के निर्देश कमिश्नर यशवंत राव ने दिए थे, जिन्होंने जाँच रिपोर्ट एनजीटी को भेज दिए जाने की भी पुष्टि की है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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