रिंकी बेगम बताती हैं कि उनके घर के पीछे पाँच लोगों को दफनाया गया है, इनमें उनका दस महीने का बेटा भी है। इसी गाँव की गुड्डी कहती हैं, "हम गरीब लोग इज्जत की मौत भी नहीं मर सकते। हमें कब्रों के ऊपर ही बैठना और चलना पड़ता है। घर में जगह की कमी है।"
कोल्ड ड्रिंक न मिलने को विजय ने अपना अपमान मानते हुए विदाई से ही इंकार कर दिया जिसके कारण दोनो पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। दुल्हन भी दूल्हे की हरकत देखकर हैरान थी। सूचना पाकर पहुँची पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया।
लड़कियाँ तो दूर की बात, अब बेख़ौफ़ दुष्कर्मी लड़कों तक को नहीं छोड़ रहे हैं। अब शाहजहाँपुर से गैंगरेप की नई घटना सामने आई है। ताज़ा मामले के अनुसार, शहर के पुवाया थानाक्षेत्र में एक नाबालिग किशोर के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।
तरन्नुम का निकाह मदरसा के डायरेक्टर जीकरू रहमान से 5 साल पहले हुआ था। उसके तीन बच्चे हैं। शादी के बाद से ही रहमान उनके साथ बदसलूकी करता था। पिछले हफ्ते अपने ही मदरसे में पढ़ने वाली एक लड़की से निकाह करने के बाद रहमान ने तरन्नूम को तलाक दे दिया था और घर से निकाल दिया था।
राजनाथ सिंह सूर्य के देहांत पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह सूर्य ने हमेशा जन सरोकारों को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी कलम के ज़रिए जनहित और समाज हित से जुड़े मुद्दों को निर्भिकता और निष्पक्षता के साथ व्यक्त किया।
वीडियो में महिला कह रही हैं कि इलाके में समुदाय विशेष द्वारा उन पर पर रिश्वत लेकर मृतक बच्ची को खुद वहाँ फेंकने के आरोप तक लगाए जा रहे हैं। उन्हें धमकियाँ भी दी जा रही हैं। इसके साथ ही महिला को अपने परिवार की सुरक्षा का भी डर सता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर प्रशांत को किन धाराओं के तहत अरेस्ट किया गया। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रशांत कनौजिया ने जो शेयर किया और लिखा, इस पर यह कहा जा सकता है कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, उसे अरेस्ट किस आधार पर किया गया था?
मेरठ के एक मरदसे में पढ़ाने वाले मौलाना द्वारा 12 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। घटना के बाद शोर मचाने पर छात्रों ने उक्त मौलाना को दबोच भी लिया था लेकिन अँधेरे का फायदा उठा कर वह वहाँ से भागने में कामयाब रहा। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया।
प्रशांत कनौजिया का दलितों और हिंदू संतों पर अभद्र टिप्पणी करने का इतिहास रहा है। कनौजिया दलितों को 'बिना दिमाग वाला जानवर' भी कहा था और साथ ही हिंदू धर्म का भी मजाक उड़ाते हुए इसे "बेकार धर्म" कहा था।