चिनसुरा नगरपालिका के अध्यक्ष के अध्यक्ष गौरीकान्त मुखर्जी उक्त स्कूल की मैनेजिंग कमिटी के भी अध्यक्ष हैं। स्कूल में मिड डे मील के लिए रखा 257 किलो चावल गायब हो गया है। 5000 अंडे ख़रीदे गए लेकिन छात्रों को एक भी अंडा नहीं मिला।
पारा शिक्षक अपनी नौकरी स्थायी करने और वेतन में इजाफे की माँग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। शिक्षकों की माँग प्रशासन को इतना नागवार गुज़री कि कल्याणी रेलवे स्टेशन के पास भूख हड़ताल कर रहे शिक्षकों पर रात में लाठियाँ बरसाई गई।
तृणमूल सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि वह दुर्गा पूजा समितियों जैसे स्थानीय संगठनों को भाजपा के लिए काम करने पर मजबूर करना चाहती है, इसीलिए उन्हें दबाने की कोशिश हो रही है।
“हाल ही में कुछ मुस्लिम रेस्तरां भी जोड़े गए हैं, लेकिन हमारे यहाँ ऑर्डर डिलीवरी करने वाले कुछ लड़के हिन्दू भी हैं, इन्होंने बीफ फूड की डिलीवरी करने से इनकार कर दिया। कुछ दिनों में हमें पोर्क की भी डिलीवरी देनी पड़ेगी, लेकिन हम इसकी डिलीवरी नहीं करेंगे।”
मध्य हावड़ा स्थित श्रीरामकृष्ण शिक्षालय से भी एक गंभीर मामला सामने आया था। यहाँ कक्षा एक में पढ़ने वाले एक छोटे बच्चे की सिर्फ़ इसीलिए पिटाई की गई थी क्योंकि उसने 'जय श्री राम' कहा था।
अनुच्छेद 370 में किए गए बदलाव पर जहाँ पूरा देश जश्न मना रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल में लोगोंं को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने सिलीगुड़ी में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष कंचन देबनाथ और महामंत्री समेत 5 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।
"तृणमूल कॉन्ग्रेस की गुंडा वाहिनी ने अचानक से बाजार में आकर BJP पार्टी ऑफिस तोड़ दिया। पुलिस को खबर देने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इलाके को अशांत कर रखा है। अगर पुलिस की तरफ से जल्द ही इन पर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो हमें मजबूरन बड़े आंदोलन पर उतरना होगा।"
"मोहम्मद सुंदरलाल ने ताश खेलने का विरोध करने पर सबसे पहले मेरी बेटी नूर बानो को तीन तलाक दिया और बाद में फाँसी लगाकर उसे मार डाला। इस पूरी घटना को अंजाम देने में मेरी बेटी के सास-ससुर ने भी उसके पति का पूरा सहयोग किया।"
राज्यसभा ने मंगलवार को तीन तलाक को गैर कानूनी करार देने वाले विधेयक को मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार रात इस पर दस्तख्त कर दिए। इसके साथ ही यह कानून देश में लागू हो गया है।
माना जाता है कि भुवनेश्वर के पास "पहला" नाम के गाँव में दूध की बर्बादी होते देखकर मंदिर के पुजारियों ने ही उन्हें रसगुल्ला बनाने और दूध को बचा लेने की विधि सिखाई। इस तरह ओडिशा में "पहला रसगुल्ला" के नाम से ये प्रसिद्ध हुआ।