उत्तर प्रदेश को पुराना गौरव वापस दिलाने के लिए हमारी सरकार कृति संकल्पित है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से शेष दो वर्ष में उत्तर प्रदेश प्रगति के नए आयाम लिखेगा।
"कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव के चलते दिहाड़ी मजदूर भाई-बहनों को परिवार के भरण-पोषण में समस्या न हो, इस हेतु एक तय धनराशि मजदूर भाई-बहनों के बैंक खाते में प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में वित्तमंत्री की अध्यक्षता में गठित समिति 3 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।"
आज अगर हम 2016 से 2019 तक के ये घटते आँकड़े देखें। तो मालूम पड़ेगा कि योगी सरकार से पहले तक बच्चों का इस बीमारी से ग्रस्त होना एक रूटीन प्रक्रिया हो गई थी। लेकिन प्रशासन ने अपने प्रयासों से इस पर काबू पाया और लगातार बीमार होने वाले बच्चों की संख्या में गिरावट आई।
“तुम कागज नहीं दिखाओगे, और दंगा भी फैलाओगे, तो हम लाठी भी चलवाएँगे, घरबार भी बिकवाएँगे… और हाँ पोस्टर भी लगवाएँगे।” इसी ट्वीट को रिट्वीट करते हुए वकील अब्दुल हन्नान ने सीएम योगी को ‘आतंकवादी’ बता दिया।
बुलेट प्रूफ फाइबर से बना यह मंदिर अनेक सुख-सुविधाओं से लैस है। इसमें रामलला को गर्मी से बचाने के लिए दो एसी भी लगे हैं। 25 मार्च को रामलला अपने भाइयों संग टेंट से निकलकर इस मंदिर में विराजेंगे। तब योगी आदित्यनाथ रामलला की प्रथम आरती करेंगे।
इन पर पुलिस चौकी और वाहनों को फूॅंकने तथा सरकारी कार्यालयों में लूटपाट का आरोप है। साथ ही ‘हत्या के इरादे से’ पुलिस पर गोलीबारी के भी ये आरोपित हैं। इनमें से कई जेल में हैं। जो जमानत पर बाहर हैं उन्हें फिर से दबोचा जाएगा।
योगी आदित्यनाथ 24 मार्च को अयोध्या के दौरे पर रहेंगे। सीएम योगी राम जन्मभूमि परिसर में बन रहे रामलला के अस्थाई मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। इसके बाद अयोध्या में ही रात्रि प्रवास के बाद सीएम योगी 25 मार्च की सुबह नवरात्र के प्रथम दिन रामलला के नए अस्थाई मंदिर में ही रामलला का पूजन अर्चना करेंगे।
एसजी मेहता ने जस्टिस पुत्तुस्वामी द्वारा दिए गए निर्णय और ऑटो शंकर केस फ़ैसले को पढ़कर सुनाया, जिसमें ऐसे मामलों में 'प्राइवेसी के अधिकार' को महत्ता नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति सड़क पर पिस्तौल लहराते हुए घूम रहा है, तो उसे 'राइट टू प्राइवेसी' के तहत राहत नहीं दी जा सकती।
लखनऊ के इन दंगों में आरोपित 57 लोगों के नाम उनके पते साथ होर्डिंग्स बनवाकर शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर लगाए गए थे। यह सभी आरोपित लखनऊ के हसनगंज, हजरतगंज, कैसरबाग और ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के हैं। बता दें कि पहले ही प्रशासन ने 1.55 करोड़ रुपए की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए इनको वसूली के नोटिस जारी किए गए थे।