वीडियो में एक बुजुर्ग लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों से आतिफ मीर को रिहा करने की अपील कर रहा है। वो आतंकियों से कहता है कि वो जो कुछ भी कर रहा है, वो ‘जिहाद’ नहीं, ‘जहालत’ है।
न्यूज़ एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (PTI) ने 7 मार्च 2019 को अपनी एक ख़बर में लिखा था कि संयुक्त राष्ट्र ने मुंबई हमलों के सरगना हाफ़िज़ सईद का नाम प्रतिबंधित आतंकियों की सूची से हटाने की याचिका ख़ारिज कर दी।
गालिब ने कहा कि वह भारतीय होने में गर्व कैसे कर सकता है? भारत की सरकार ने न केवल उसके पिता की हत्या की बल्कि कश्मीर के साथ भी अन्याय भी किया। गालिब ने स्पष्ट किया कि उसने पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए प्रोपेगेंडा के तहत टाइम्स ऑफ इंडिया को बाइट दिया।
हाल ही में आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान सरकार की तरफ से हाफिज सईद के संगठनों पर बैन नहीं लगाया गया है, बल्कि सिर्फ निगरानी रखने की बात कही गई है।
साल 2014-17 के बीच पकड़े गए जैश-ए-मुहम्मद के आतंकियों में से 4 आतंकियों को प्रशिक्षण बालाकोट के उसी कैंप में मिला है जहाँ पर वायु सेना द्वारा हाल ही में हमला किया गया।
पत्रकार रहीमुल्ला ने ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, यह कुछ हद तक समझा जा सकता है लेकिन आप दिल्ली में बैठ कर इसे काट-छांट सकते थे। लेकिन नहीं। 'बहनोई' की इज्जत में लिखे गए शब्दों पर संपादकीय कैंची कैसे?