2019 में 26 साल बाद सरकार ने इन नियमों की समीक्षा के लिए कुछ विशेषज्ञों की समिति का गठन किया है। इस समिति का नेतृत्व भारत सरकार के पूर्व सचिव बीपी शर्मा द्वारा किया जाएगा।
चुनाव पूर्व घोषणापत्र में कॉन्ग्रेस ने प्रत्येक परिवार के एक बेरोज़गार युवा सदस्य को 3 वर्ष के लिए ₹10,000 मासिक बेरोज़गारी भत्ते के रूप में देने का वादा किया था। लेकिन, अब घोषणा के उलट 3 वर्ष की जगह 3 महीने के लिए और ₹10,000 की जगह ₹4,000 ही मिलेंगे।
मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर लगातार कह रहे हैं कि ज़रूरत पड़ी तो सरकार अध्यादेश लाकर 13 पॉइंट रोस्टर सिस्टम को रद्द कर देगी। 7 मार्च को मोदी सरकार की आखिरी कैबिनेट बैठक में इस पर अध्यादेश लाने पर मुहर लग सकती है।
जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004 में संशोधन के माध्यम से राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण वाले प्रावधान के भीतर नियंत्रण रेखा के पास रहने वाले लोगों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों को भी लाया गया है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिछले माह ही प्रदेश में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10% आरक्षण लागू करने के संदर्भ में निर्देश जारी कर दिए थे।
दरअसल केंद्र सरकार द्वारा सांसद में पारित बिल के अनुसार समान्य वर्ग के आर्थिक रुप से कमज़ोर उन लोगों को आरक्षण का लाभ मिलेगा जिनकी वार्षिक आय ₹8 लाख से कम है।
सामान्य वर्ग (आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों) के लिए 10% रिजर्वेशन के बाद केंद्र सरकार अब इसे धरातल पर उतारने की तैयारी में। दो चरणों (2019-20 और 2020-21) में तीन लाख तक सीटें बढ़ाने का निर्णय।
माना जा रहा है कि आने वाले बजट सत्र में मोदी सरकार इस सन्दर्भ में OBC जातियों में, कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर, उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को नज़र में रखते हुए उनकी समुचित हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व तय करेगी।