सैयद अहमद शाह ने राजा रणजीत सिंह द्वारा अज़ान और गौतस्करी पर प्रतिबंध लगाने की बात सुनकर जिहाद की घोषणा कर दी थी। जिस समय पर बरेलवी बालाकोट पहुँचा उस समय उसके साथ 600 जिहादी थे और पेशावर के हज़ारों पठानों द्वारा भी उसे समर्थन दिया जा रहा था।
संख्या में मात्र 21 लेकिन अनंत साहस एवं पराक्रम से भरे सिख जवानों ने 10,000 इस्लामी आक्रांताओं के पसीने छुड़ा दिए। हम भले ही उनके बलिदान को भूल गए लेकिन ब्रिटेन और फ्रांस में वे आज भी याद किए जाते हैं- सम्मान के साथ।