यूपोरियन थिंक टैंक ने कहा कि पाकिस्तान के पिछले रवैये की तरह ही पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के सच्चे दोस्त नहीं हैं। वे बस उनके लिए धोखा करते हुए विरोध और गुस्से का दिखावा कर रहे हैं।
कट्टरपंथी जमीयत नेता फजलुर रहमान ने सरकार के खिलाफ 27 अक्टूबर को मार्च का किया ऐलान। कहा, "यह जंग तब तक जारी रहेगी जब तक इमरान ख़ान की सरकार चली नहीं जाती। पूरे देश से लोगों का जनसैलाब मार्च में भाग लेने आ रहा है और फ़र्ज़ी शासक इसमें एक तिनके की तरह डूब जाएँगे।"
पाकिस्तानी सेना का असली प्लान उकसाए गए और ब्रेनवॉश हुए आम लोगों को भारतीय सेना की गोलियों और तोपों के आगे धकेल देने का है। पाकिस्तानी नेतृत्व आम लोगों को इसका हिस्सा बनने के लिए बरगलाने में लगा है। इस बीच सीमा रेखा इस तरफ़ सुरक्षा बलों ने हर परिस्थिति का सामना करने की तैयारी कर रखी है।
संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अली मोहम्मद ने विपक्षी सांसद के इस प्रस्तावित बिल का विरोध किया। मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान एक इस्लामिक रिपब्लिक है जहाँ सिर्फ मुस्लिम ही राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बन सकता है।
विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि खान आर्थिक संकट से गुजर रहे देश को समस्याओं से बाहर निकाल पाने में असफल हैं। पार्टी ने इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए आजादी मार्च निकालने की घोषणा की है।
आदित्य राज कौल इस ट्वीट पर दो टूक कहते हैं कि पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की इंसानियत और आतंकवाद की लड़ाई को लेकर बिलकुल चिंतित नहीं हैं, अब इस्लामिक प्रोपेगेंडा और नफरत फैलाने के लिए हमारे पास एक और मुखपत्र आ गया है। आदित्य ने अपने ट्वीट में पूछा है कि क्या इस मुस्लिम चैनल के संपादक जाकिर नाइक होने वाले हैं?
इमरान खान के बयान से साफ झलक रहा है कि वो केवल अमेरिका से अपने भीख के कटोरे में धन प्राप्त करने के लिए ऐसा बोल रहे हैं। हर कोई पाकिस्तान, उसकी सैन्य नेतृत्व और इसकी कठपुतली सरकार की वास्तविकता को जानता है।
इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में कश्मीर मुद्दा उठाया था और माँग की थी कि भारत कश्मीर से "अमानवीय कर्फ्यू" हटाए तथा सभी "राजनीतिक कैदियों" को रिहा करे। हालाँकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इमरान खान के कश्मीर मुद्दे पर की गई बात को गंभीरता से नहीं लिया।