ये कट्टरपंथी जमात मजहब देखकर सबाब का काम करती है और ये भूल जाती है कि जिस सेना को ये लोग 'शराबी-बलात्कारी' बताते हैं वही सेना हर मुश्किल घड़ी पर सबसे आगे मदद के लिए रहती है।
आरफा को भारत के 'हिंदू राष्ट्र' कहलाए जाने से दिक्कत है, क्योंकि आरफा के दिमाग में गलतफहमी है कि भारत में संस्कृति और सभ्यता का विकास मुगलों के आने के बाद हुआ।