वैज्ञानिक से वकील और तथाकथित कार्यकर्ता से राजनेता बने मुकुल सिन्हा और उनकी पत्नी ने अपना पूरा राजनीतिक करियर गुजरात दंगों में मारे गए लोगों की लाशों पर बनाया है।
परेश रावल ने गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान बांगलादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं पर निशाना साधते हुए उन्हें बंगाली कहा था। इसी के बाद उनके खिलाफ एफआईआर हुई।