वीडियो में जावेद कुरैशी कपड़े फाड़ते हुए महबूबा मुफ़्ती से कहते हैं, "ये कपड़े फाड़ के देख, हिंदुस्तान कहाँ पर बसता है, दिल में। तिरंगे की इज्जत इस दिल में है।"
11 नवंबर, 1947 को देश में दिवाली मनाई जा रही थी, उस समय राजौरी कबाइलियों के आतंक में जुल्म में जल रहा था। तीस हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत सिर्फ़ जम्मू कश्मीर की जमीन चाहता है उसके लोगों को नहीं। इसलिए वह अनुच्छेद 370 के दोबारा बहाल होने तक कोई झंडा नहीं उठाएँगी।
अक्सर शिकायत मिलती थी कि कश्मीरी बहनों के कई दोस्त वहाँ आते हैं और उनके हाथ में बंदूकें तक होती हैं। वह गोलीबारी भी करते थे। ऑपइंडिया द्वारा खंगाली गई पासपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के अनुसार महिला का असल नाम फिज़ा मंज़ूर भट्ट है।