अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर... एक ही झूठ बार-बार। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर J&K हाई कोर्ट के जजों ने जॉंच कर खोल दी पोल। अब सिद्धार्थ वरदराजन को बताना चाहिए जेलों में बंद करीब 150 नाबालिग कहाँ गए? या फिर पाकिस्तान से हुई किस 'डील' के तहत यह झूठ फैलाया गया।
'The Wire' के झूठ की पोल खोलते हुए दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने कश्मीर में छप रहे अख़बारों के न केवल नाम गिनाए, बल्कि उनकी तस्वीरें भी दिखाईं।
आज के प्राइम टाइम में सुप्रीम कोर्ट को भी गोदी बता दिया जाना चाहिए। आज ऑड दिवस है, आज सुप्रीम कोर्ट का निर्णय घोघो रानी के मनमुताबिक़ नहीं है। ऐसा लगता है मानो खेल दिवस पर घोघो रानी खेल कर गई।
यह मामला रोहिणी सिंह द्वारा 'द वायर' में लिखे गए एक लेख से सम्बंधित है, जिसमें जय शाह के व्यापार को लेकर उन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। जय शाह ने 'The Wire' के ख़िलाफ़ 100 करोड़ रुपए का मानहानि का मुक़दमा दायर किया था।
द वायर' का पत्रकार यह जानना चाहता था कि क्या पीड़ित ने बजरंग दल के कहने पर पुलिस में मामला दर्ज कराया है? हालाँकि, पीड़ित ने पत्रकार द्वारा बार-बार बात घुमाने के बाद भी अपने बयान पर कायम रहते हुए बताया कि पुलिस को उसने जो बयान दिया है, वह उसका ख़ुद का है।
मज़े की बात यह कि 2001 में संघ के मुख्यालय पर तिरंगा फ़हराए जाने पर तालियाँ पीटने वाला वायर कश्मीर में तिरंगे की सम्प्रभुता पर उसी साँस में सवाल खड़े कर रहा है! दोगलेपन की ऐसी सानी मिलना मुश्किल है।
बबीता फोगाट ने कहा, “हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है जिसमें हमारी बहन-बेटियों के बारे में गलत बोला गया हो मेरी मीडिया से प्रार्थना है कि उनके बयान को गलत तरीके से जनता के सामने पेश ना करें।”
जब भारत सरकार का रुख साफ़ है कि पूरा का पूरा जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और यह हमारा आंतरिक मुद्दा है, ऐसे में इन प्रोपेगेंडा पोर्टल्स द्वारा पाकिस्तानी अजेंडे को आगे बढ़ाना कहाँ तक उचित है?
अभिषेक मनु सिंघवी ने आरफा पर आक्षेप करते हुए जवाब दिया है। सिंघवी ने जोर देकर कहा कि उनके जैसे प्रभावशाली लोगों के प्रत्यावर्ती और पुरातन (पुराने)आदर्शों का समर्थन करने की वजह से ही देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति पिछड़ी बनी रहेगी।
कत्थक का जन्म सुल्तानों के दौरान हुआ। अरबों ने सोमनाथ मंदिर की रक्षा की। अकबर लिबरल था। खिलजी ने भारत की रक्षा की। 'द वायर' के छद्म बुद्धिजीवी ने ग़लत ऐतिहासिक तथ्य पेश कर के इस्लामिक आक्रांताओं की पूजा करने की सलाह दी है।