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मीडिया गिरोह

2005 अयोध्या हमले में इस्लामी आतंकियों की जगह इंडिया टुडे ने दिखाई बाबरी विध्वंस की तस्वीर

यह जानना आवश्यक है कि जिस पर आज फैसला सुनाया गया, वह अयोध्या में 2005 में हुआ आतंकी हमला था, जबकि बाबरी विध्वंस एक जगह पर विवाद के फलस्वरूप जन्मी घटना थी।

गाँधी-नेहरू के बजाए The Hindu के मुहम्मद इक़बाल ने तलाश ली नए लोकसभा अध्यक्ष की जाति

...लेकिन 2019 के चुनावों के बाद से इन नमक-हराम मीडिया गिरोहों ने नेहरू को ऐसे निकाल फेंका है जैसे लोग चाय में से मक्खी को निकाल फेंकते हैं। मीडिया अब समझ गया है कि वो नेहरू को गन्ने की तरह गन्ने की मशीन में ठूँसकर जितना निचोड़ सकते थे, निचोड़ चुके हैं।

आपको कोई पढ़ता नहीं, विश्वास आपने खो दिया… तो हम क्या करें: स्वाति चतुर्वेदी की कानूनी नोटिस का जवाब

"अगर आज़ादी का कोई भी अर्थ है, तो वह लोगों को वह सुनाने का अधिकार है जो वह नहीं सुनना चाहते।" हम निश्चित तौर पर आपकी मुवक्किल स्वाति चतुर्वेदी और कई अन्य पत्रकारों को वह सुनाने के दोषी हैं जो वह नहीं सुनना चाहते। जैसा कि आपकी मुवक्किल के द्वारा प्रदर्शित किया गया, यह मानहानि नहीं आज़ादी है।

‘Self-Styled Godman’ या ‘धर्मगुरु’ जैसे शब्दों से मजहब नहीं मीडिया की बदनीयत पता चलती है

कुल मिलाकर 'Self-Styled godman' शब्द हमेशा हिन्दू धर्मगुरुओं के लिए इस्तेमाल होता है, यह मीडिया का आम सत्य है। लेकिन इंडिया टुडे समेत पत्रकारिता का समुदाय विशेष इस शब्द का इस्तेमाल उस हेडलाइन में करता है, जिसमें खबर आज़म नामक मौलवी द्वारा हैदराबाद में एक किशोरी के साथ बलात्कार की है।

बाथरूम से जिम तक: ‘कूल पत्रकारिता’ के चक्कर में सर्कस दिखा कर नई क्रान्ति करते पत्रकार

मीडिया संस्थानों को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके नए नियम के मुताबिक़ अगर कोई पत्रकार सड़क किनारे मजदूरी कर रहे किसी मजदूर से इंटरव्यू लेने जाता है तो वह क्या करेगा और क्या नहीं - हथौड़ा उठाएगा या फावड़ा? सीमा पर गोलीबारी कवर करने जाने वाले पत्रकार भी लगे हाथ दो-चार गोलियाँ दागेंगे क्या?

बेबस महिलाओं को नग्न करके नचाया मजहब विशेष वालों ने, The Hindu-Wire की पत्रकार ने लिखा, ‘हिंदुत्व कल्चर’

नीना व्यास जी के विचार में अगर कुछ गौरक्षक अगर कानून अपने हाथ में लेते हैं तो उससे किसी दुकानदार की लस्सी के पैसे माँगने पर "योगी-मोदी से हम नहीं डरते" दहाड़ कर हत्या कर देना, किसी मासूम बच्ची को मार डालना या ऐसी ही किसी भी घटना को अंजाम देने का औचित्य बन सकता है?

गायब AN-32 विमान पर धूर्तता दिखाने वाली BBC को हार्दिक पटेल की बेहूदगी ने दी कड़ी टक्कर

BBC की 'चुप्पी' का मतलब तो यही निकलता है कि मलबा मिलते ही वायुसेना के अधिकारियों को तुरंत अपने घर से निकलकर मोटरसाइकिल में किक मार के हादसे वाली जगह तक दौड़ जाना चाहिए था।

यूट्यूब अदालत में बैठे स्वघोषित जज अभिसार शर्मा का नया प्रपंच, नहीं पच रहा कठुआ का फैसला

मीडिया के कुछ खास वर्गों में अपने पहले से चलाए गए नैरेटिव के अनुसार विशाल जंगोत्रा को अपराधी घोषित करने की कुछ ज़्यादा ही जल्दबाजी थी। द प्रिंट ने तो कोर्ट से पहले ही सभी को अपराधी घोषित करते हुए यह भी बता दिया कि उन्हें इतनी सजा मिली। यहाँ तक कि स्वघोषित फैक्ट चेकर AltNews ने भी उससे असहमत दूसरों पर अटैक करते हुए विशाल जंगोत्रा को अपराधी घोषित कर अपना फैसला सुना दिया।

जानिए कैसे एक महिला डॉक्टर की लाश पर गिरोह विशेष ने खेला अपना गन्दा खेल, छुपाई असलियत

ज़मीन के विवाद में हुई मौत के बाद 'कुत्ते के काटने से कैसे बचें' पर चर्चा करना सही है क्या? इसी तरह जहाँ रैगिंग की समस्या पर चर्चा होनी चाहिए, गिरोह विशेष ने जाति घुसाकर एक मनगढ़ंत मोड़ दे दिया। 'पीकू' फ़िल्म का एक डायलॉग है- 'आप हर बात को पेट से कैसे जोड़ देते हैं?'

सोशल मीडिया पोस्ट के लिए पत्रकारों (या आम नागरिकों) की गिरफ़्तारी पर कहाँ खड़े हैं आप?

क्या हमारे पास इतना समय है कि ऐसे सड़कछाप पत्रकारों के ट्वीट पर उसके घर दो पुलिस वाले को भेज कर उठवा लिया जाए जबकि हर मिनट बलात्कार हो रहे हैं? क्या सरकारों की पुलिस या कोर्ट जैसी संस्थाओं को पास ऐसी बातों को लिए समय है जबकि करोड़ से अधिक गंभीर केस लंबित पड़े हैं?

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