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प्रिय बीबीसी, वेश्यावृति या BC में से एक चुन लो, पत्रकारिता तो तुमसे हो नहीं रही

बीबीसी हिन्दी वालो, विकल्प है तुम्हारे पास: वेश्यावृति की ईमानदारी या पत्रकारिता के नाम पर वैचारिक दोगलापन, चुन लो। कारण जो भी हो, लेकिन जब आप वेश्यालय की ओर रुख़ करते हैं तो आपको पता होता है कि आपको वहाँ क्या मिलेगा। बीबीसी के साथ ऐसा नहीं है।

जब राजीव गाँधी ने INS विराट की स्टोरी दबाने के लिए मीडिया का गला घोंटने की ठानी थी

निरूपमा सुब्रह्मण्यन द्वारा इंडियन एक्सप्रेस में लिखे गए लेख की हेडलाइन ही स्पष्ट करती है कि प्रधानमंत्री मोदी आईएनएस विराट पर बात करके हमारे समक्ष सवाल छोड़े हैं ताकि हम पूछें कि वास्तव में अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किसने किया है?

पूर्व महिला न्यूज एंकर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या, मिल रहीं थीं धमकियाँ

अरियाना न्यूज़ द्वारा घटनास्थल की जारी तस्वीरों में मंगल की लाश खून से लथपथ दिखाई पड़ रही है। उनका तलाक अभी मई में ही हुआ है।

‘द हिन्दू’ की ‘फ्रंटलाइन’ और TV9 ने 20 लाख EVM गायब होने की फेक न्यूज़ लगाने की बात स्वीकारी

फ्रंटलाइन के संपादक ने स्वीकार किया है कि उनकी रिपोर्ट झूठी है और इस सम्बन्ध में एक अन्य रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, TV9 Bharatvarsh ने अपनी वेबसाइट और Youtube से अपनी रिपोर्ट हटा दी है।

तो क्या अब यह पूछूँ कि राजीव गाँधी माँ की मौत के वक्त कैमरामैन लिए घूम रहे थे?

साल के दो दिनों को छोड़ दिया जाए, वो भी कॉन्ग्रेस के कार्यकाल के, तो राजीव गाँधी सिख हत्याकांड से लेकर, क्वात्रोची, एंडरसन, शाहबानो, रामजन्मभूमि, बोफ़ोर्स, भोपाल गैस कांड आदि के लिए हमेशा चर्चा में बने रहते हैं।

मनोज तिवारी पर हमले का मज़ाक उड़ाने वाले अभिसार शर्मा केजरी को थप्पड़ पड़ने से नाराज़

अमानतुल्लाह ख़ान ने मंच पर दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी को धक्का दिया था। अरविन्द केजरीवाल को झापड़ पड़ने की निंदा करने वाले अभिसार शर्मा ने मनोज तिवारी को धक्का दिए जाने की भी निंदा की होगी, है या नहीं? अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो आप ग़लत हैं।

गौतम गंभीर को दिल्ली इलेक्शन में नीचा दिखाने के लिए स्पाइन वाली मीडिया पाकिस्तान पहुँच गई

गौतम गंभीर का रिकॉर्ड अफरीदी, आतिशी मर्लेना, अरविन्द केजरीवाल और प्रिंट सब को पता है। उन्हें ये भी पता है कि गंभीर बोलते कम और प्रहार ज्यादा करते हैं।

रवीश कुमार इतना ज्ञान क्यों बाँच रहे हैं? एंकर तो आप भी बना दिए गए हैं, मैनेज तो आप भी हो रहे हैं

शब्दों का इस्तेमाल गलत कार्य के लिए मत कीजिए। किसी दिन उँगली जवाब दे देगी और गला सूख जाएगा। कई बार ऐसा होता है कि ज्ञान का इस्तेमाल गलत कार्य के लिए हो तो वह ज्ञान गायब हो जाता है।

‘द वायर’ के हिसाब से भारतीय हिन्दू ही आतंकी हैं जिन्होंने समुदाय विशेष पर हिंसा की है! हाउ क्यूट!

मतलब, संकट मोचन मंदिर से लेकर लोकतंत्र के मंदिर संसद तक हमले में मरने वाले अधिकतर लोग हिन्दू ही होते हैं (क्योंकि जनसंख्या ज्यादा है और टार्गेट पर भी वही होते हैं) और मारने वाले हर बार कट्टरपंथी होते हैं, फिर भी असली हिंसा तो गौरक्षकों द्वारा गौतस्करों को सरेराह पीट देना है।

प्राइम टाइम एनालिसिस: रवीश कुमार कल को सड़क पर आपको दाँत काट लें, तो आश्चर्य मत कीजिएगा

रवीश मुहल्ले की गली का वो लौंडा है जो किसी लड़की के नाम से हाथ काट लेता है, और लड़की को पता भी नहीं होता कि उसका नाम क्या है। रवीश के ऐसे प्रोग्रामों को देख कर मैं बस इसी इंतज़ार में हूँ कि वो किस दिन कलाई का नस काट कर कहेंगे कि उन्हें कुछ होगा तो ज़िम्मेदार मोदी ही होगा।

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