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पत्रकारिता के (अ)नैतिक प्रतिमान सिद्धार्थ वरदराजन से और उम्मीद भी क्या है

हर खबर में इन्हें ‘एंगल’ ही यह दिखता है कि कैसे मोदी को गरियाने मिल जाए। यही इनका पत्रकारिता का (अ)धर्म है, यही इनकी (अ)नैतिक जिम्मेदारी है।

NDTV वालों के लिए लिए स्त्री का अपमान सिर्फ ‘तंज’ है, सेक्सिज़्म तो चलता है

दिक्कत है मामले की गंभीरता और शब्दों के चुनाव से छिछोरेपन को, सेक्सिस्ट बयान को, नारीविरोधी शब्दों को 'तंज' और 'ज़ुबानी जंग' के नाम पर ऐसे प्रस्तुत करना जैसे इतना तो चलता है।

FT संपादक ने किया आजम खान के बेहूदा बयान का समर्थन, दक्षिणपंथी पत्रकार ने लताड़ा

लायोनेल बार्बर अपने समाचारपत्र फाइनेंशियल टाइम्स की ओर से भारत के आम चुनावों को कवर कर रहे हैं। इसी दौरान अपने एक दौरे पर, लिखते हुए उन्होंने जयाप्रदा पर आजम की टिप्पणी का उल्लेख किया और लिखा, "कोई बुरा कथन नहीं है, हालाँकि इसके लिए खान पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया गया।”

रवीश जी, साध्वी प्रज्ञा पर प्राइम टाइम में आपकी नग्नता चमकती हुई बाहर आ गई (भाग 4)

रवीश एक घोर साम्प्रदायिक और घृणा में डूबे व्यक्ति हैं जो आज भी स्टूडियो में बैठकर मजहबी उन्माद बेचते रहते हैं। साम्प्रदायिक हैं इसलिए उन्हें मजहबी व्यक्ति की रिहाई पर रुलाई आती है, और हिन्दू साध्वी के चुनाव लड़ने पर यह याद आता है कि भाजपा नफ़रत का संदेश बाँट रही है।

AAP-कॉन्ग्रेस एक-दूसरे पर थूक कर चाटने की रेस में, बीच में कूदे 4 महान दरबारी पक्षकार

लड़ाई मजेदार है। इस चुनाव में AAP-कॉन्ग्रेस से लेकर उन तमाम न्यूट्रल पक्षकारों की भी अस्मिता दाँव पर लगी है जो अभी तक विभिन्न संस्थाओं पर कब्ज़ा जमाकर सत्ता की मलाई खा रहे थे।

‘बहन जी’ कहने पर अंजना ने कहा कॉन्ग्रेस नेता को ‘आंटी जी’, TV पर ही हो गया राड़ा, देखें वीडियो

बहस के दौरान कॉन्ग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आज तक चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप को ‘बहनजी’ कह दिया। इस 'बहन जी' शब्द से अंजना इतनी आहत हुई कि उन्होंने तुरंत कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को बदले में 'आंटी जी' कह दिया।

60 साल तक ‘न्याय’ न देने वालों के मुँह से ‘NYAY’ की बात अच्छी नहीं लगती

60 सालों तक राज करने वाली पार्टी की मजबूरी है कि वो सत्ता से दूर है, और यह दूरी रात-दिन बढ़ती जा रही है। सत्ता पाने की यही लालसा उससे नए-नए हथकंडे आजमाने का दुष्चक्र चलवाती है। लेकिन जब बड़े और नामी चेहरे भी इस धूर्तता का हिस्सा बनने लगते हैं तो अफ़सोस होता है।

सेक्स ही सेक्स… भाई साहब आप देखते किधर हैं, दि प्रिंट का सेक्सी आर्टिकल इधर है

बढ़ते कम्पटीशन के दौर में सर्वाइवल और नाम का भार ढोते इन पोर्टलों के पास नग्नता और वैचारिक नकारात्मकता के अलावा फर्जीवाड़ा और सेक्स ही बचता है जिसे हर तरह की जनता पढ़ती है। लल्लनपॉट यूनिवर्सिटी से समाज शास्त्र में पीएचडी करने वाले ही ऐसा लिख सकते हैं।

बेटे के IAS का रिजल्ट आया तब पिता पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भर रहे थे, बेच दिया था घर

इस परीक्षा में मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले प्रदीप सिंह को ऑल इंडिया में 93वीं रैंक मिली है। बेहद साधारण परिवार से आने वाले प्रदीप के पिता पेट्रोल पंप पर काम करते हैं।

फेसबुक का न्यूज़ टैब: क्वालिटी कंटेंट या न्यूज़ के नाम पर वामपंथी ज़हर को फीड में घुसाने की कोशिश?

हाल ही में भारत में फ़ेसबुक ने अकारण ही भाजपा समर्थक एक बड़े पेज The Third Eye और कॉन्ग्रेस समर्थक 600+ छोटे-मोटे पेजों को बैन कर दिया था। क्या फ़ेसबुक इस टैब में भी वामपंथी और अपने bias पर आधारित ख़बरें ही चलाएगा?

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