CAA ख़िलाफ़ हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाज़ी और बवाल काटने के मामले में 5000 से ज्यादा पर मुक़दमा दर्ज किया गया है। पूर्व विधायक ज़ाकिर अली, सभासद सलाउद्दीन, सपा नेता रिज़वान सैफी, आरिफ़ के नाम भी शामिल हैं।
दंगाईयों द्वारा सरकारी संपत्ति को नुकसान, पुलिस पर हुए जानलेवा हमलों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में अब अधिक सतर्कता बरती जा रही है। राज्य के 42 जिलों में सुरक्षा लिहाज से इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गईं हैं और पूरे प्रदेश में 31 जनवरी तक धारा 144 लागू हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ख़ुद स्थिति पर पैनी नज़र रख रहे हैं। उन्होंने पुलिस से कहा है कि उपद्रवियों को चिह्नित कर उनपर कड़ी कार्रवाई करें। सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार उपद्रवियों की संपत्ति नीलाम कर वसूली करेगी। अफवाह फैलाने वालों पर भी निगरानी रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
"आज देश में बहू-बेटियों को जलाया जा रहा है। मुझे पता चला कि इधर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी गेरुआ पहन कर चक्कर लगा रहे हैं। बीजेपी के ये वे लोग हैं जो शादी कम करते हैं। लेकिन गेरुआ पहन बहू-बेटियों की इज्जत लूटने का काम करते हैं।"
कॉन्ग्रेस, RJD, झामुमो और CPI-ML के गठबंधन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और माओवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए, योगी ने कहा, "कॉन्ग्रेस, RJD, झामुमो और CPI-ML की नीतियों ने चरमपंथ को बढ़ावा दिया है और उन्हें व्यापक नुकसान पहुँचाने में सक्षम बनाया है।"
"उत्तर प्रदेश में 42389 पोस्को और 25749 बलात्कार के मामले अभी लंबित पड़े हुए हैं। इसके कारण राज्य सरकार ने ये बड़ा निर्णय लिया है। नए फ़ास्ट ट्रैक अदालतों के लिए जजों की भर्ती जल्द ही शुरू की जाएगी। हर कोर्ट का खर्च 75 लाख रुपए आएगा।"
इससे पहले फेसबुक और ट्विटर पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने 8 जून 2019 को स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत जगदीश कनौजिया को उसके आवास से गिरफ्तार किया था।
सीएम योगी ने धार्मिक स्थलों, वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठानों, एटीएम और बैंकों समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है।
"कतिपय संगठन हिन्दुओं, विशेषकर अनुसूचित जनजाति के लोगों को प्रलोभन देकर अपने निहित स्वार्थ के लिए धर्मान्तरण कराते हैं। वो भारत की सदियों पुरानी सभ्यता धारा को भुलाने की सीख देते हैं। ये संगठन लोगों को धार्मिक परम्पराओं व पूजा पद्धतियों का अपमान करने की सीख दे रहे हैं।"
- जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल
महाराजा अग्रसेन की जीवनी पर शोध करने वाले ओमप्रकाश मित्तल के अनुसार भी महाभारत काल में आगरा का नाम अग्रवन था। राजा बल्लभ ने अपने परिवार में अग्रसेन के जन्म की खुशी में इसी अग्रवन के एक हिस्से में अग्रपुर की स्थापना की थी।