विहिप प्रवक्ता ने आगे कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने मन्दिर से पहले देशवासियों के कुशलक्षेम हेतु पीएम केयर्स फण्ड में दान देकर बहुत बड़ी कृपा की है। अब इस फण्ड में कभी कोई कमी नहीं आएगी।
तड़के 3 बजे रामलला की मूर्ति को गोद में लेकर सीएम योगी अस्थायी मंदिर की ओर चले। 9.5 किलो चाँदी के सिंहासन पर पूरी मंत्रोच्चार के साथ उन्हें विराजमान किया। अब भव्य राम मंदिर का निर्माण मूल 'गर्भगृह' में किया जाएगा।
बुलेट प्रूफ फाइबर से बना यह मंदिर अनेक सुख-सुविधाओं से लैस है। इसमें रामलला को गर्मी से बचाने के लिए दो एसी भी लगे हैं। 25 मार्च को रामलला अपने भाइयों संग टेंट से निकलकर इस मंदिर में विराजेंगे। तब योगी आदित्यनाथ रामलला की प्रथम आरती करेंगे।
योगी आदित्यनाथ 24 मार्च को अयोध्या के दौरे पर रहेंगे। सीएम योगी राम जन्मभूमि परिसर में बन रहे रामलला के अस्थाई मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। इसके बाद अयोध्या में ही रात्रि प्रवास के बाद सीएम योगी 25 मार्च की सुबह नवरात्र के प्रथम दिन रामलला के नए अस्थाई मंदिर में ही रामलला का पूजन अर्चना करेंगे।
अस्थायी मंदिर का ब्लू प्रिंट तैयार हो गया है। यह गर्भ गृह से 150 मीटर की दूरी पर होगा। नवरात्रि के पहले दिन से अस्थायी मंदिर में ही श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर सकेंगे।
मोहम्मद इस्लाम जल्द ही अयोध्या जाकर महंत नृत्यगोपाल दास को यह पौराणिक महत्व वाला सिक्का भेंट करने जा रहे हैं। साथ ही मोहम्मद इस्लाम चाहते हैं कि यह सिक्का बेचकर जो भी धन इकठ्ठा हो, उससे एक ही ईंट सही, लेकिन राम मंदिर में जरूर लगवाई जाए।
राम मंदिर निर्माण के लिए दान देना चाहते हैं? किसे देंगे? कहाँ देंगे? जिस एकमात्र ट्रस्ट को सरकार ने यह जिम्मेदारी दी है, अभी उसकी वेबसाइट नहीं बनी है। अयोध्या के DM के अनुसार, यह जल्द ही बन जाएगी। यही कारण है कि 2 करोड़ रुपए की चेक को लौटाना पड़ गया।
"राम मंदिर निर्माण में अगर और भी जमीन की जरूरत होगी तो जमीन ली जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार को लिखा जाएगा। जो पत्थर राम मंदिर के लिए रखे गए हैं, उन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल निर्माण के लिए किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो और भी पत्थर मँगाए जा सकते हैं।"
जिन्होंने राम मंदिर बनवाने के लिए अपनी जाने गवाईं, उनके नाम पर शहीद स्मारक बननी चाहिए। इन 'शहीदों' के लिए श्रद्धांजलि के रूप में सरयू तट पर एक स्मारक बनवाया जाना चाहिए। अमर जवान की तरह इन शहीदों के नाम भी अमर जवान ज्योति के समान लिखा जाना चाहिए।
हम्पी में उसी जगह पर हनुमान जी की विश्व की सबसे विशालकाय प्रतिमा का निर्माण करने का फैसला लिया गया है, जहाँ पहली बार भगवान राम की उनसे मुलाकात हुई थी। इसकी ऊँचाई 215 फीट होगी। मतलब अयोध्या के श्रीराम से 10 फीट कम!