Homeवीडियोक्या है #UPSCjihad? क्या खास समुदाय को बढ़ावा देती है UPSC: अजीत भारती का...

क्या है #UPSCjihad? क्या खास समुदाय को बढ़ावा देती है UPSC: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Suresh Chavhanke, Sudarshan TV, UPSC

सुदर्शन टीवी के 'UPSC जिहाद' नामक शो पर पिछले दिनों काफी बवाल हुआ। चैनल के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने दावा किया कि इस शो के लिए बाकायदा रिसर्च की गई और तब जाकर वह इस नतीजे पर पहुँचे कि यूपीएससी में खास मजहब को कहीं न कहीं साजिशन ढकेला जा रहा है।

सुदर्शन टीवी के ‘UPSC जिहाद’ नामक शो पर पिछले दिनों काफी बवाल हुआ। चैनल के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने दावा किया कि इस शो के लिए बाकायदा रिसर्च की गई और तब जाकर वह इस नतीजे पर पहुँचे कि यूपीएससी में खास मजहब को कहीं न कहीं साजिशन ढकेला जा रहा है। उन्होंने अंदेशा जताया कि हो सकता है इसके लिए सरकारी योजनाओं का इस्तेमाल हो रहा हो या फिर कोई ऐसा ‘नेक्सस’ हो, जो साक्षात्कार के समय उनका समर्थन करता हो।

इस पूरे विषय पर अभी तक सुदर्शन चैनल ने 4 शो दिखाए हैं। शो में अपने दावों को साबित करने के लिए चैनल ने उड़ान योजना का हवाला दिया है, जिसमें समुदाय विशेष को छात्रवृत्ति के रूप में 25000 से 1 लाख रुपए तक की मदद दी जाती है। अब सवाल तो उठना लाजिमी है कि जैसे वर्ग विशेष को आगे बढ़ने के लिए मदद मिल रही है, क्या वैसी ही मदद अन्य समुदायों को मिल रही है? और अगर हाँ, तो इसका प्रतिशत क्या है?

पूरी वीडियो का लिंक यहाँ क्लिक करके देखें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -