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जर्जर मकानों में छिपा रखे थे ₹329 करोड़… कॉन्ग्रेस MP धीरज साहू के ठिकानों से क्या-क्या मिला, सब कुछ IT ने बताया

आयकर विभाग ने बताया है कि छापेमारी के दौरान दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के रूप में बड़े पैमाने पर साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं। इनके शुरुआती विश्लेषण से देशी शराब की बेहिसाब बिक्री का पता चला है। सबूतों से पता चलता है कि कंपनी शराब कारोबार से हुई कमाई को बड़े स्तर पर पर छिपाने में लगी हुई थी।

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद धीरज साहू की कंपनी से जुड़े ठिकानों पर पिछले दिनों आयकर विभाग (IT Department) ने छापेमारी की थी। करीब 6 दिन तक चली इस कार्रवाई के दौरान ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 10 जिलों में 30 से अधिक जगहों पर दबिश दी गई थी। अब आयकर विभाग ने इस कार्रवाई का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया है।

इसके मुताबिक 351 रुपए से अधिक का अघोषित कैश और 2.80 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के जेवर जब्त किए गए। कुल अघोषित कैश में से 329 करोड़ रुपए ओडिशा के बोलांगीर जिले के सुदापाड़ा, टिटलागढ़ और संभलपुर जिले खेतराजपुर जैसे छोटे शहरों से बरामद किए गए। इन जगहों पर जर्जर इमारतों के भीतर बने तहखानों में पैसे रखे गए थे।

विभाग ने बताया है कि छापेमारी के दौरान दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के रूप में बड़े पैमाने पर साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं। इनके शुरुआती विश्लेषण से देशी शराब की बेहिसाब बिक्री का पता चला है। सबूतों से पता चलता है कि कंपनी शराब कारोबार से हुई कमाई को बड़े स्तर पर पर छिपाने में लगी हुई थी।

गौरतलब आयकर विभाग ने बलदेव साहू एंड ग्रुप ऑफ कंपनीज के ठिकानों पर कार्रवाई 6 दिसंबर 2023 को शुरू की थी। मूल रूप से देशी शराब बनाने के कारोबार से जुड़ी यह कंपनी विदेशी शराब की बॉटलिंग, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान भी चलाती है। कंपनी का नाम धीरज साहू के पिता बलदेव साहू के नाम पर है। कॉन्ग्रेस सांसद के अलावा उनके परिवार के अन्य सदस्य भी इस कंपनी में शामिल हैं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस छापेमारी में आयकर विभाग के 100 से अधिक अधिकारी शामिल हुए थे। बरामद हुई नकदी को गिनने के लिए 40 मशीनों को काम पर लगाना पड़ा था। इनमें से कई मशीनें तो नोटों को गिनते-गिनते खराब तक हो गईं थी।

आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद कॉन्ग्रेस सांसद धीरज साहू ने कहा था कि जो पैसे बरामद हुए हैं वो न तो उनका अपना है और न ही कॉन्ग्रेस का है। ये उनके फैमिली बिजनेस से आया पैसा है। इसके बारे में सिर्फ उनका परिवार ही बता सकता है। उन्होंने कहा था, “ये जो पैसा है ये मेरे परिवार द्वारा चलाई जा रही कंपनियों का है। इनकम टैक्स का जवाब आने दीजिए कि ये काला धन है या सफेद धन। मैं बिजनेस लाइन में नहीं हूँ। परिवार वाले इसका जवाब देंगे। मुझे नहीं पता कि लोग इसको कैसे देख रहे हैं लेकिन मैं बस इतना कह सकता हूँ कि इन सबका कॉन्ग्रेस या अन्य किसी पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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