Saturday, February 14, 2026
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयपहले चलाया बांग्लादेश में 'मंदिरों की रक्षा कर रहे मुस्लिम' नैरेटिव, अब कह रहा...

पहले चलाया बांग्लादेश में ‘मंदिरों की रक्षा कर रहे मुस्लिम’ नैरेटिव, अब कह रहा हिंदुओं पर हमलों को करें नजरअंदाज: इस्लामी कट्टरपंथियों की ढाल बना ‘The Caravan’ का पत्रकार

सलिल के ट्वीट का मकसद यह दिखाना था कि मुस्लिम हिंदू मंदिरों की रक्षा कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह थी कि हिंदुओं और उनके मंदिरों पर हमले हो रहे थे। इस तरह उन्होंने मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की

वामपंथी प्रोपेगेंडा मैगजीन ‘द कारवाँ’ ही नहीं, बल्कि उसमें काम कर रहे लोग भी हिंदुओं के खिलाफ घृणा और हिंदुओं के दमन की खबरों को दबाने में लगे हैं। हाल ही में ‘द कारवाँ’ के कॉन्ट्रिब्यूटिंग एडिटर सलिल त्रिपाठी ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर बात करने वालों को चुप कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस मामले पर सिर्फ बांग्लादेशियों को ध्यान देना चाहिए और बाकी लोगों को इससे कोई मतलब नहीं रखना चाहिए।

ट्रंप प्रशासन और बांग्लादेश की स्थिति पर चर्चा में कूदे

हाल ही में जब जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट जेफ एम. स्मिथ ने सुझाव दिया कि ट्रंप प्रशासन को बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर भारत की चिंताओं को समझना चाहिए, तो सलिल ने रविवार (1 दिसंबर 2024) को एक्स पर कहा, “बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, वो बांग्लादेशियों का मामला है। दूसरों को इसमें दखल नहीं देना चाहिए, जब तक उनका कोई एजेंडा न हो।”

सलिल ने सोशल मीडिया पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर आवाज उठाने वालों के इरादों पर सवाल खड़े किए। इससे ऐसा लगा कि वो लोगों को इस मुद्दे पर बोलने से हतोत्साहित करना चाहते थे।

यह कोई नई बात नहीं है। वामपंथी और उदारवादी तबके अक्सर इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। उनकी कोशिश होती है कि जो लोग उनके नैरेटिव के खिलाफ बोलें, उन्हें चुप कराया जाए। सलिल त्रिपाठी ने भी इसी रणनीति के तहत, बांग्लादेश में कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हिंसा के मुद्दे से चर्चा को भटकाने का प्रयास किया।

इसी तरह से सलिल ने इसी साल 6 अगस्त को ट्वीट किया था कि “युवा मुसलमान बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों की रक्षा कर रहे हैं।” यह ट्वीट उस समय आया जब शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से हटाया गया था।

सलिल के ट्वीट का मकसद यह दिखाना था कि मुस्लिम हिंदू मंदिरों की रक्षा कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह थी कि हिंदुओं और उनके मंदिरों पर हमले हो रहे थे। इस तरह उन्होंने मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की। ऐसे में साफ है कि उनके ध्यान भटकाने वाले ट्वीट का उद्देश्य मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदुओं और उनके मंदिरों पर किए गए अत्याचारों से ध्यान हटाकर हिंदू पूजा स्थलों की ‘रक्षा’ करने के फोटो-ऑप्स की ओर ध्यान केंद्रित करना था।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे हमले

बता दें कि बांग्लादेश में इस साल 5 अगस्त को आवामी लीग प्रमुख शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से ही कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक व्यापारिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा रहा है। बांग्लादेश में इस समय मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार शासन देख रही है। उस पर चरमपंथियों को पराश्रय देने का आरोप है। शेख हसीना सरकार के पतन के कुछ दिनों के भीतर हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले  हुए हैं।

इसी कड़ी में बांग्लादेश में इस्कॉन के संत को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला चलाया जा रहा है। यहाँ तक कि हिंदू संतों को देश से बाहर भी नहीं जाने दिया जा रहा है, तो हिंदुओं की पहचान कर उन्हें निशाना बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई।

चटगाँव में एक हिंदू युवक को ईशनिंदा के आरोप में उसकी मॉब लिंचिंग के लिए इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पूरे थाने को ही घेरा लिया और आर्मी की गाड़ियों तक में आग लगा दी थी।

ओपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे खुलना के सोनाडांगा इलाके में एक मुस्लिम भीड़ ने हिंदू लड़के उत्सव मंडल को ‘ईशनिंदा’ के आरोप में लगभग मार डाला था।

यह भी खुलासा हुआ था कि मुस्लिम छात्रों ने 60 से अधिक हिंदू शिक्षकों, प्रोफेसरों और सरकारी अधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया है।

हाल ही में, मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर असद नूर ने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय को ‘जमात-ए-इस्लामी’ में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

6 सितंबर को चटगाँव के कादम मुबारक इलाके में गणेश उत्सव के दौरान हिंदू भक्तों की एक शोभायात्रा पर भी हमला हुआ था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Dibakar Dutta
Dibakar Duttahttps://dibakardutta.in/
Centre-Right. Political analyst. Assistant Editor @Opindia. Reach me at [email protected]

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जन्म से तय जाति बदलती नहीं, चाहे धर्म बदल जाए: इलाहाबाद HC, समझें- कैसे इस फैसले का हो सकता है गलत इस्तेमाल

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवाह या धर्म परिवर्तन से जाति नहीं बदलती, इससे एससी/एसटी आरक्षण पर व्यापक असर पड़ सकता है।

ब्राह्मण विरोधी नफरत, कश्मीरी पंडितों का मजाक और विक्टिम कार्ड: अंबेडकरवादी लक्ष्य लेकी ने की साइबर बुलिंग, वकील ट्यूलिप शर्मा ने दर्ज कराई शिकायत

लक्ष्य लेकी ने 1990 के दशक में इस्लामी आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों के सामूहिक नरसंहार और पलायन का भी मजाक उड़ाया।
- विज्ञापन -