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बाहुबल ऐसा कि कहलाते हैं ‘छोटे सरकार’, फिर कौन है सोनू-मोनू जिसने कर दी फायरिंग: पंचायती करने गए अनंत सिंह पर हमले की पूरी डिटेल, AK-47 का भी इस्तेमाल

अनंत सिंह ने कहा कि वह गाँव के गरीब लोगों की समस्याओं का समाधान करने पहुँचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनू-मोनू गैंग ने पहले गोली चलाई, जिसके बाद उनके समर्थकों ने जवाबी कार्रवाई की।

बिहार के मोकामा में बुधवार (22 जनवरी 2025) को ताबड़तोड़ फायरिंग की बड़ी घटना हुई, जिसमें मोकामा के बाहुबली नेता और पूर्व विधायक अनंत सिंह और कुख्यात सोनू-मोनू गैंग के बीच गोलीबारी हुई। बताया जा रहा है कि इस घटना में करीब 60-70 राउंड गोलियाँ चलीं। घटना मोकामा प्रखंड के नौरंगा-जलालपुर गाँव में हुई। फायरिंग के दौरान अनंत सिंह बाल-बाल बच गए। वहीं, उनके एक समर्थक उदय यादव को गोली लगने की खबर है, जिन्हें इलाज के लिए पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना तब शुरू हुई जब सोनू-मोनू गैंग ने गाँव के एक परिवार को धमकाकर उनके घर से बाहर निकाल दिया और उनके घर पर ताला लगा दिया। इसकी सूचना मिलने पर अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ गाँव पहुँचे। अनँत सिंह के गाँव में पहुँचते ही सोनू-मोनू गैंग ने फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी के दौरान अनंत सिंह बाल-बाल बच गए। हालाँकि उनके एक समर्थक उदय यादव को गर्दन में गोली लगी और उन्हें गंभीर हालत में पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फायरिंग की इस घटना के बाद नौरंगा गाँव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं।

इस घटना के बाद तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। एक एफआईआर पुलिस ने अनंत सिंह और सोनू-मोनू गैंग के समर्थकों के खिलाफ दर्ज की है। दूसरी एफआईआर सोनू-मोनू के पिता ने अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर दर्ज कराई है। वहीं, तीसरी एफआईआर पीड़ित ग्रामीण ने सोनू-मोनू और उनके समर्थकों के खिलाफ कराई है।

बाढ़ डीएसपी राकेश कुमार ने कहा, “घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। घटनास्थल से तीन खोखे बरामद किए गए हैं। अब तक तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें एक पुलिस ने सोनू-मोनू और अनंत सिंह दोनों के खिलाफ की है। घटना में शामिल सभी आरोपितों की पहचान की जा रही है।” उन्होंने कहा कि घटना के बाद गाँव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बाढ़ अनुमंडल के कई थानों की पुलिस मौके पर कैंप कर रही है।

अनंत सिंह ने ‘किडनैपर’ और ‘चोर’ कहा

इस घटना को लेकर अनंत सिंह ने मीडिया से बात करते हुए सोनू-मोनू को ‘किडनैपर’ और ‘चोर’ बताया। उन्होंने कहा, “सोनू-मोनू जैसे अपराधी गाँव वालों का जीवन नरक बना रहे हैं। पुलिस अगर समय पर कार्रवाई करती, तो यह घटना नहीं होती। मुझे किसी केस की परवाह नहीं है। मैं लोगों के साथ खड़ा हूँ।” अनंत सिंह ने यह भी कहा कि वह गाँव के गरीब लोगों की समस्याओं का समाधान करने पहुँचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनू-मोनू गैंग ने पहले गोली चलाई, जिसके बाद उनके समर्थकों ने जवाबी कार्रवाई की।

सोनू-मोनू गैंग का रिएक्शन, 68 के होकर 34 वाले से भिड़ने चले आए

जानकारी के मुताबिक, सोनू और मोनू मोकामा के ही जलालपुर गाँव के निवासी हैं। दोनों भाइयों ने 2009 में अपराध की दुनिया में कदम रखा और पहले अनंत सिंह के लिए काम किया करते थे। अनंत सिंह के जेल जाने के बाद उन्होंने अपनी अलग गैंग बना ली। इनका नाम कई आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। दोनों पर जमीन कब्जाने, ट्रेनों में आपराधिक वारदातों को अंजाम देने, हत्या, वसूली और स्थानीय लोगों को धमकाने के आरोप हैं। बताया जाता है कि इनके संबंध उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी से भी रहे हैं।

दरअसल, अनंत सिंह के जेल से निकलने के बाद मोनू सिंह उनसे मिलने पहुँचा था। लोगों को लगा कि रिश्ते में सुधार होने लगा, लेकिन इसके बाद फिर से वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई। बताया ये भी जा रहा है कि सोनू-मोनू ने अनंत सिंह को मारने के लिए सुपारी भी ली थी, और कई बार हमले की कोशिश भी हो चुकी है। इसके लिए गैंग ने एके-47 भी खरीदी थी, जिसका इस्तेमाल इस गोलीबारी में भी होने का अनुमान है।

इस घटना के बाद सोनू-मोनू गैंग का भी रिएक्शन सामने आया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि अनंत सिंह की तरफ से पहले फायरिंग हुई।

गौरतलब है कि बिहार के मोकामा क्षेत्र में अनंत सिंह को ‘छोटे सरकार’ के नाम से जाना जाता है। उनकी राजनीतिक ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ कथित रूप से चुनावी सिंबल से ज्यादा उनका नाम काम करता है। उनकी पत्नी नीलम देवी फिलहाल राजद की विधायक हैं, हालाँकि वो जेडीयू के खेमे में मानी जाती हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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