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4 बंडल दस्तावेज, ₹1000 करोड़ का लेनदेन: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ED ने पेश की 7000 पन्नों की चार्जशीट, भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को बताया ‘सिंडिकेट का प्रमुख हैंडलर’

ED के अनुसार, शराब घोटाले का पैसा एक नेटवर्क के जरिए चैतन्य तक पहुँचा।चैतन्य ही इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड है। इस नेटवर्क में अनवर ढेबर, दीपेंद्र चावड़ा, केके श्रीवास्तव और कॉन्ग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल शामिल थे।

छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर की विशेष अदालत में ED ने 4 बंडलों में कुल 7000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी निवेश और राजनीतिक नेटवर्किंग से जुड़े आरोपों को शामिल किया गया है।

ED का दावा है कि चैतन्य को शराब घोटाले की ब्लैक मनी से ₹16.70 करोड़ मिले। इसे उसने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर वैध दिखाने की कोशिश की। इसके अलावा घोटाले के लिए सिंडिकेट बनाकर कुल ₹1000 करोड़ का लेनदेन किया।

ED ने 18 जुलाई 2025 को चैतन्य को उनके भिलाई स्थित घर से गिरफ्तार किया था। अभी वह जेल में हैं। यह शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच कॉन्ग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ED के ये सभी आरोप लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल के बयान पर आधारित हैं। बंसल ने ED को बताया कि उन्होंने चैतन्य के साथ मिलकर शराब घोटाले से ₹1,000 करोड़ बनाए और काले धन को सफेद करने की कोशिश की।

शराब घोटाले से राज्य को हुआ ₹2,161 करोड़ का नुकसान

ED का कहना है कि इस पूरे सिंडिकेट ने अपने हिसाब से आबकारी विभाग के समान ही ये तंत्र बनाया और शराब बेची। इससे राज्य को मिलने वाले राज्स्व के बजाय सिंजिकेट को फायदा हुआ और छत्तीसगढ़ राज्य को कुल ₹2,161 करोड़ का नुकसान हुआ।

इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) भी सक्रिय हैं। दोनों एजेंसियों ने चैतन्य की सात दिन की रिमांड माँगी है, जिससे उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है।

कोर्ट ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रखा है और अगली सुनवाई 19 सितंबर 2025 को निर्धारित की गई है। चैतन्य ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी, जिसे जस्टिस अरविंद वर्मा की एकल पीठ ने खारिज कर दिया।

सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल विवेक शर्मा ने याचिका का विरोध किया, जबकि बचाव पक्ष ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया।

ED के अनुसार, शराब घोटाले का पैसा एक नेटवर्क के जरिए चैतन्य तक पहुँचा। इस नेटवर्क में अनवर ढेबर, दीपेंद्र चावड़ा, केके श्रीवास्तव और कॉन्ग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल शामिल थे।

शराब घोटाले में सिंडिकेट का प्रमुख हैंडलर था चैतन्य बघेल

ED का आरोप है कि चैतन्य ही इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड है। उसी ने इस घोटाले से जुड़े ₹1000 करोड़ के लेन-देन को मैनेज किया, जिसमें कई फ्रंट कंपनियों और नकद लेन-देन शामिल थे।

ED ने अपने आरोपो में ये भी बताया कि ₹18.9 करोड़ की अवैध राशि को चैतन्य की रियल एस्टेट परियोजना में निवेश किया गया। चैतन्य बघेल ने अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विट्ठल ग्रीन में 18.90 करोड़ रुपए और अपनी रियल एस्टेट फर्म मेसर्स बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स में 3.10 करोड़ रुपए के काले धन का इस्तेमाल किया।

आरोपों की पुष्टि के लिए ED ने डिजिटल साक्ष्य, गवाहों के बयान और सौम्या चौरसिया (मुख्यमंत्री कार्यालय की पूर्व उप सचिव), ढेबर, चैतन्य और अन्य आरोपितों की व्हाट्सएप चैट को प्रस्तुत किया है।

ED के अनुसार, बंसल ने चैतन्य के कहने पर छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के कोषाध्यक्ष को बड़ी मात्रा में नकद पैसे पहुँचाए गए। मामले में एक अन्य आरोपी अग्रवाल फिलहाल फरार है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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