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फिर विवादों में IIT गाँधीनगर: आतंकी याकूब मेमन के समर्थन में दया याचिका लिखने वाले एम के रैना को बनाया फैकल्टी, प्रोफेसर ने ‘वंदे मातरम’ का किया विरोध

आईआईटी गाँधीनगर फिर विवादों में है। एम के रैना की नियुक्ति और प्रोफेसर द्वारा ‘वंदे मातरम’ का विरोध सामने आने से संस्थान पर वामपंथी एजेंडे को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं।

हमेशा किसी न किसी विवाद में फँसा रहने वाला गुजरात का भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गाँधीनगर (IIT गाँधीनगर) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला संस्थान में हुई नियुक्ति को लेकर है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि IIT गाँधीनगर ने गुप्त रूप से कुछ फैकल्टी की नियुक्ति की है, जिनमें अभिनेता एम के रैना का नाम भी शामिल है।

एम के रैना वही व्यक्ति हैं जिन्होंने आतंकी याकूब मेमन के लिए दया याचिका पर हस्ताक्षर किए थे। अब उनकी नियुक्ति सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग IIT गाँधीनगर पर फिर से सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा, संस्थान के ही एक प्रोफेसर द्वारा ‘वंदे मातरम’ पर आपत्ति जताने की बात भी सामने आई है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।

दरअसल, IIT गाँधीनगर का मानविकी विभाग पिछले कई सालों से विवादों में घिरा रहा है। आरोप लगते रहे हैं कि यह विभाग इस्लामी एजेंडा चलाने, देशविरोधी तत्वों और आतंक समर्थकों की नियुक्ति करने और वामपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने में लगा हुआ है। इन तमाम कारणों से IIT गाँधीनगर बार-बार विवादों के केंद्र में रहा है।

याकूब मेमन की दया याचिका पर हस्ताक्षर

साल 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को हिला दिया था। इन धमाकों में सैकड़ों लोगों की जान गई और देशभर में दहशत फैल गई थी। इस मामले में आतंकवादी याकूब मेमन को गिरफ्तार कर अदालत ने दोषी ठहराया और फाँसी की सजा सुनाई थी।

लेकिन जुलाई 2015 में, याकूब मेमन को बचाने के लिए राष्ट्रपति के नाम एक दया याचिका दायर की गई थी। इस याचिका पर अभिनेता एम के रैना सहित करीब 300 लोगों ने हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने तर्क दिया था कि आतंकवादी को फांसी देना ‘अनुचित और कठोर’ है।

अब सोशल मीडिया पर एम के रैना के हस्ताक्षर वाली उस याचिका की तस्वीरें फिर से वायरल हो रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो व्यक्ति पहले आतंकवादी के लिए दया की माँग कर चुका है, वही अब IIT गाँधीनगर में नियुक्त किया जा रहा है, क्या यह देश के शैक्षणिक संस्थानों में वामपंथी एजेंडे की घुसपैठ नहीं है?

मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार

एम के रैना का विवाद सिर्फ उनकी पुरानी गतिविधियों तक सीमित नहीं है बल्कि उनके राजनीतिक बयानों ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। साल 2016 में दिए गए एक इंटरव्यू में रैना ने मोदी सरकार पर तीखा हमला किया था। उन्होंने कहा था, “यह सरकार हमारा ब्रेन-डेड करना चाहती है।” इसके साथ ही उन्होंने परोक्ष रूप से सरकार को तानाशाह कहने की कोशिश की और आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है तथा संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।

अब सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि ऐसे राजनीतिक झुकाव रखने वाले व्यक्ति को IIT गाँधीनगर में नियुक्त करना क्या उचित है? कई यूजर्स ने इस विवाद को संस्थान की पिछली नियुक्तियों से जोड़ते हुए भी देखा है, जैसे कि फिल्ममेकर डॉन चाको पालथरा की नियुक्ति और आरोप लगाया है कि संस्थान में लगातार वामपंथी सोच वाले लोगों को जगह दी जा रही है।

इस विवाद के बाद IIT गाँधी नगर के भर्ती नियमों पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि एक कलाकार पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति तकनीकी संस्थान में फैकल्टी पद पर कैसे नियुक्त हुआ? अगर रैना को ‘आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंस’ बनाया गया है, तो यह जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और आखिर इन पदों के लिए पात्रता और चयन के मानदंड क्या हैं? इन सवालों के जवाब न मिलने से IIT गाँधीनगर की पारदर्शिता और नीयत दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

एक अन्य प्रोफेसर को ‘वंदे मातरम’ से आपत्ति थी

IIT गाँधी नगर में एक और विवाद ने तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि संस्थान के प्रोफेसर अरूप चक्रवर्ती ने ‘वंदे मातरम’ का विरोध किया है। एक वायरल पोस्ट में प्रोफेसर के ईमेल का स्क्रीनशॉट साझा किया गया है, जिसमें उन्होंने कथित रूप से कहा है कि ‘वंदे मातरम’ गीत की पंक्ति ‘त्वं हि दुर्गा दशप्रहरंधारिणीम्’ में भारत माता के उल्लेख पर उन्हें आपत्ति है।

आरोप है कि उन्होंने यह भी कहा कि यह गीत धार्मिक भावना से जुड़ा है, इसलिए आम लोगों को इसे नहीं गाना चाहिए। इस मेल में कथित तौर पर अन्य विवादित बातें भी लिखी गई हैं, जिससे सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़क गया है।

अब नेटिजन्स का कहना है कि IIT गाँधी नगर में यह कोई पहली बार नहीं हुआ है, संस्थान पहले भी विवादित नियुक्तियों और वामपंथी एजेंडे को लेकर चर्चा में रहा है। कई यूजर्स ने सरकार से IIT गाँधी नगर के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जाँच की माँग की है, ताकि यह पता चल सके कि देश के प्रतिष्ठित संस्थान में आखिर यह कैसी विचारधारा पनप रही है।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से गुजराती में लिखी गई है जिसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे)


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ऑपइंडिया स्टाफ़
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