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भारत की इकोनॉमी की दहाड़, FY26 Q2 में 8.2% GDP ग्रोथ से दुनिया को पीछे छोड़ा: टैरिफ से लेकर ग्लोबल मंदी तक हिंदुस्तान ने सभी चुनौतियों को कैसे दिया मोदी रिफॉर्म्स से जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक दृष्टि ने भारत को वैश्विक मंदी से अलग कर दिया। जीएसटी रेशनलाइजेशन, सतर्क राजकोषीय अनुशासन और समन्वित मौद्रिक नीति ने निवेश-उपभोग का सकारात्मक चक्र चला दिया।

वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक मंदी की चुनौतियों को करारा जवाब देते हुए 8.2% की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी एवँ कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने शुक्रवार (28 नवंबर 2025) को जारी प्रेस नोट में बताया कि यह ग्रोथ पिछले वर्ष की समान अवधि के 5.6% से काफी बेहतर है। स्थिर मूल्यों (2011-12 आधार) पर जीडीपी 48.63 लाख करोड़ रुपए रही, जो एक साल पहले ₹44.94 लाख करोड़ थी।

NSO द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, नॉमिनल जीडीपी में 8.7% की बढ़ोतरी हुई, जो 85.25 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गई। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “यह आँकड़े मोदी सरकार की सुधार-केंद्रित नीतियों की जीत हैं, जो निवेश और उपभोग को गति दे रही हैं। भारत अब वैश्विक विकास का इंजन बन चुका है।”

इस तिमाही में द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों ने मुख्य भूमिका निभाई। द्वितीयक क्षेत्र में 8.1% की वृद्धि दर्ज हुई, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग 9.1% और कंस्ट्रक्शन 7.2% आगे बढ़ा। तृतीयक क्षेत्र ने 9.2% की उछाल दिखाई, खासकर फाइनेंस, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज में 10.2% की मजबूत ग्रोथ।

फोटो साभार: PIB

प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PFCE) में 7.9% की वृद्धि हुई, जो पिछले साल के 6.4% से बेहतर है। यह असमान मानसून के बावजूद घरेलू माँग की मजबूती को दर्शाता है। अर्थशास्त्री अरुण कुमार ने कहा, “PFCE की यह रफ्तार उपभोक्ता विश्वास का प्रमाण है, जो अर्थव्यवस्था को स्थिरता दे रही है।”

हालाँकि, प्राथमिक क्षेत्र कुछ कमजोर रहा। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में केवल 3.5% की वृद्धि हुई, जबकि बिजली, गैस, जल आपूर्ति एवं अन्य उपयोगिता सेवाओं में 4.4% दर्ज किया गया। ये आँकड़े मौसमी चुनौतियों का नतीजा हैं।

सेक्टर के हिसाब से आँकड़े, पोटो साभार: PIB

अप्रैल-सितंबर (H1) की आधी अवधि में रियल जीडीपी 8.0% बढ़ी, जो पिछले वर्ष के 6.1% से ऊंची है। H1 में रियल जीडीपी 96.52 लाख करोड़ रुपये रही। रियल GVA में 7.9% की ग्रोथ हुई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “इन्फ्लेशन ऐतिहासिक निचले स्तर पर स्थिर है, और मजबूत बाहरी बफर्स ग्लोबल वोलेटिलिटी से रक्षा कर रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक दृष्टि ने भारत को वैश्विक मंदी से अलग कर दिया। जीएसटी रेशनलाइजेशन, सतर्क राजकोषीय अनुशासन और समन्वित मौद्रिक नीति ने निवेश-उपभोग का सकारात्मक चक्र चला दिया। पीएम मोदी ने कहा, “भारत की विकास गाथा न सिर्फ स्थिर है, बल्कि त्वरित हो रही है। हम आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर हैं।”

NSO ने बताया कि ये अनुमान बेंचमार्क-इंडिकेटर विधि से तैयार किए गए, जिसमें पिछले वर्ष के आंकड़ों को प्रासंगिक संकेतकों से एक्सट्रापोलेट किया गया। डेटा स्रोतों में कृषि उत्पादन लक्ष्य, लिस्टेड कंपनियों के वित्तीय परिणाम, IIP, रेलवे ट्रैफिक, GSTN डेटा और सरकारी खाते शामिल हैं।

टैक्स राजस्व में जीएसटी और गैर-जीएसटी दोनों शामिल हैं। उत्पाद सब्सिडी के अनुमान खाद्य, यूरिया और पेट्रोलियम सब्सिडी पर आधारित हैं। व्यय घटकों के लिए वाणिज्य मंत्रालय और RBI के आयात-निर्यात डेटा का उपयोग हुआ। असंगति (डिस्क्रेपेंसी) उत्पादन और व्यय दृष्टिकोण के बीच अंतर को दर्शाती है।

NSO ने स्पष्ट किया कि डेटा कवरेज सुधार और इनपुट संशोधनों से आगे के अनुमान बदल सकते हैं। राष्ट्रीय लेखा का बेस ईयर 2011-12 से 2022-23 में संशोधित हो रहा है, जिससे Q4 अनुमान 27 फरवरी 2026 को नए सीरीज में जारी होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि FY26 में समग्र ग्रोथ 7.5-8% रहेगी। यह आँकड़े भारत को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाते हैं। अमेरिका और यूरोप की सुस्ती के बीच भारत का डिकपलिंग मॉडल प्रेरणा स्रोत है।

सरकार का फोकस लंबी अवधि की रिफॉर्म्स पर है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। यह विकास न केवल आर्थिक, बल्कि सामाजिक उत्थान का माध्यम बनेगा।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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