वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर संसद के दोनों सदनों में विशेष चर्चा का आयोजन किया गया है। लोकसभा में जहाँ सरकार की और से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद चर्चा की शुरुआत की तो वहीं राज्यसभा में सत्ता पक्ष की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह ने बागडोर सँभाली।
राज्यसभा में शाह के भाषण के दौरान राष्ट्रगीत के अनादर से जुड़ी कुछ घटनाओं को जिक्र किया गया जिस पर विपक्ष ने उनसे अपमान करने वालों का नाम बताने को कहा। जिस पर शाह ने राज्यसभा सचिवालय को एक दस्तावेज सौंपा जिसमें अलग-अलग नेताओं और राजनीतिक दलों द्वारा समय-समय पर ‘वंदे मातरम’ का ‘अपमान’ किए जाने की घटनाओं की विवरण है।
राज्यसभा में कैसे हुआ विवाद?
शाह ने कहा कि इस संसद में वंदे मातरम के गान को बंद करा दिया था। 1992 में भाजपा सासंद राम नाईक ने वंदे मातरम को संसद में फिर से गाने की शुरुआत करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा, “उस समय लालकृष्ण आडवाणी जी ने लोकसभा के स्पीकर से कहा कि इस महान सदन के अंदर वंदे मातरम का गान होना चाहिए। क्योंकि संविधान सभा ने इसे स्वीकार किया है फिर लोकसभा ने सर्वसम्मति से 1992 में वंदे मातरम के गान की शुरुआत की।”
शाह ने कहा, “INDI गठबंधन के ढेर सारे लोगों ने कहा था कि हम वंदे मातरम नहीं गाएँगे। मैंने खुद देखा है कि कई सदस्य वंदे मातरम गान से पहले संसद से बाहर चले जाते हैं। भाजपा का एक भी सदस्य वंदे मातरम के गान के वक्त सम्मान के साथ खड़ा ना हो, ऐसा हो ही नहीं सकता है।”
इस पर जयराम रमेश ने शाह से कहा कि कौन खड़ा नहीं हुआ इसका सबूत दीजिए। विपक्ष ने कहा कि शाह का यह गंभीर दावा है।
शाह ने कहा, “सम्मानीय सदस्य ने कहा है कि कौन-कौन कॉन्ग्रेस पार्टी के लोगों ने वंदे मातरम नहीं गाने के लिए स्टेटमेंट दिया है और गान के वक्त संसद से बाहर चले गए हैं। मैं इसकी सूची आज शाम होने के पहले सदन के पटल पर रख दूँगा।” इसके बाद शाह ने चर्चा के बाद सदन के पटल पर वह सूची रखी जिसमें 9 नेताओं का जिक्र था।
शाह की लिस्ट में कौन-कौन हैं शामिल?
शाह ने राज्यसभा के सभापति को सूची देते हुए उनसे अनुरोध किया, “मेरा विनम्र आग्रह है कि माननीय सभापति महोदय इन तथ्यों को राज्यसभा के आधिकारिक अभिलेख में सम्मिलित कराने की कृपा करें।”
इस सूची में 2018 से 2025 तक की नौ घटनाएँ शामिल हैं जिनमें कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सदस्यों या पार्टियों से जुड़ी घटनाएँ शामिल हैं।

- कॉन्ग्रेस सांसद इमरान मसूद – इस सूची में सबसे पहली एंट्री उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से कॉन्ग्रेस सांसद इमरान मसूद की है। लिस्ट में एक भाषण के लिंक के साथ लिखा गया है कि इमरान ने धार्मिक आस्था का हवाला देते हुए वंदे मातरम गाने से इनकार किया। 8 दिसंबर 2025 के इस वीडियो में इमरान मसूद ने कहा, “वंदे मातरम की जो शब्दावाली है उससे हमारी मजहबी (समस्या) है। मैं आपसे नहीं कह सकता है कि आप नमाज पढ़ो, तो ऐसे ही वंदे मातरम है। आप पढ़िए, हमारे यहाँ सजदा सिर्फ अल्लाह को है।”
Congress MP Imran Masood says no to chanting Vande Mataram, sparks fresh controversy.#Congress #ImranMasood #ITVideo | @AnjileeIstwal | @mausamii2u pic.twitter.com/JeY83BpdlZ
— IndiaToday (@IndiaToday) December 8, 2025
- नेशनल कॉन्फ्रेंस सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी – लिस्ट में दूसरा नाम जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी का है। मेहदी ने भी 8 दिसंबर 2025 को लोकसभा में चर्चा के दौरान वंदे मातरम गाने का विरोध किया था।
लोकसभा में चर्चा के दौरान मेहदी ने कहा, “वंदे मातरम का जब मसला पेश आता है, जब ये कहा जाता है कि आपको ये जबरदस्ती गाना पड़ेगा। हम तब यह कहते हैं कि आप गाए हम एहतराम देते हैं। नेशनल सॉन्ग है। हम उसका भी एहतराम करते हैं। उसमें दो राय नहीं है। आप गाएँ हम एहतराम के लिए खड़े हो जाएँगे। मगर आप ये चाहेंगे कि हम भी गाएँ, मुमकिन ही नहीं है। हो ही नहीं सकता है।”
- शफीकुर्रहमान बर्क – सूची में तीसरा नाम सपा के दिवंगत सांसद शफीकुर्रहमान बर्क का है। शाह ने अपनी सूची में बर्क को जो वीडियो शेयर किया है वो जून 2019 में उनके लोकसभा में सांसद के तौर पर शपथ लेते समय का है। बर्क ने तब लोकसभा में शपथ लेने के ठीक बाद कहा था, “जहाँ तक वंदे मातरम का ताल्लुक है, यह इस्लाम के खिलाफ है। हम इसका पालन नहीं कर सकते हैं।”
- सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क – अमित शाह ने अपनी लिस्ट में उत्तर प्रदेश के संभल से सपा के सांसद जियाउर्रहमान बर्क का नाम भी है। शाह ने लिखा, “जियाउर्रहमान ने वंदे मातरम ना गाने के अपने दादा के रुख का समर्थन किया है।” नवंबर 2025 में जियाउर्रहमान बर्क ने कहा था, “मेरे दादा ने हमेशा इसका विरोध किया है और कभी उसे नहीं गाया है। ना ही मैं गाता हूँ। इससे कोई मेरी देशभक्ति पर सवाल नहीं उठा सकता है। ना ही मैं किसी को सफाई देने बैठा हूँ कि मैं कितना देशभक्त हूँ।”
- कॉन्ग्रेस की रैली में वंदे मातरम का अपमान – शाह ने 2018 की एक घटना का जिक्र कर बताया है कि कॉन्ग्रेस की रैली में वंदे मातरम का अपमान किया गया था। शाह ने एक वीडियो का लिंक शेयर करते हुए लिखा, “एक रैली में वंदे मातरम् का केवल एक छंद गाया गया। बताया गया कि राहुल गाँधी जी के आने का इंतजार था। जिस पर के.सी. वेणुगोपाल जी ने एक ही लाइन में समाप्त करने को कहा।”
शाह ने जिस वीडियो का लिंक शेयर किया है वो ‘TV9 Kannada’ का है। इसका शीर्षक ‘राहुल गाँधी ने कहा कि वंदे मातरम के लिए समय नहीं है – राष्ट्रीय गीत का किया अपमान’ है।
- कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद – मध्य प्रदेश के कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद का नाम भी वंदे मातरम का विरोध करने वालों की सूची में शामिल है। शाह ने आरिफ मसूद का फरवरी 2019 के बयान से जुड़ी एक खबर का लिंक भी शेयर किया है। ‘आज तक’ की इस खबर के मुताबिक, विधायक आरिफ मसूद ने सार्वजनिक मंच से कहा है कि वो वंदे मातरम नहीं बोलेंगे।
उन्होंने कहा था, “ये हमारी बुनियादी लड़ाई है। मैं शरीयत के साथ समझौता नहीं कर सकता और इसलिए वंदे मातरम नहीं बोलूंगा। हमारे पूर्वजों ने देश के लिए जान दी। हम भी देंगे और हमारी आने वाली नस्लें भी देंगी लेकिन मैं वंदे मातरम नहीं कहूँगा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम गाने से देशभक्ति का कोई लेना-देना नहीं है।”
- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया – शाह ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया का 2022 का एक वीडियो शेयर किया है। शाह ने लिखा, “संविधान दिवस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं से वंदे मातरम ना गाने को कहा इसका वीडियो भी उपलब्ध है।” शाह ने इसके साथ ‘इंडिया टुडे’ का एक वीडियो भी शेयर किया है। इस वीडियो में सिद्धारमैया कह रहे हैं, “वंदे मातरम मत गाओ, वंदे मातरम गाना है तो आगे जाओ।”
- समाजवादी पार्टी – शाह ने समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य करने के आदेश को रद्द करने की माँग का भी अपनी सूची में जिक्र किया है। शाह ने एक खबर का लिंक भी शेयर किया है। अक्टूबर 2025 की इस खबर के मुताबिक, समाजवादी पार्टी (सपा) नेता अबू आजमी ने महाराष्ट्र के सभी स्कूलों में वंदे मातरम अनिवार्य करने वाले आदेश को रद्द करने की माँग की थी।
अबू आजमी ने कहा कि वंदे मातरम गाना अनिवार्य करना सही नहीं है क्योंकि हर किसी की धार्मिक मान्यताएँ अलग-अलग होती हैं। उन्होंने कहा कि इस्लाम अपनी माँ के सम्मान को बहुत महत्व देता है लेकिन उसके आगे सजदा करने की इजाजत नहीं देता।
- RJD विधायक सऊद आलम – शाह की इस लिस्ट में 9वाँ और आखिरी नाम सऊद आलम RJD के नेता है। शाह ने कहा है कि सऊद आलम ने विधानसभा में वंदे मातरम के दौरान खड़े होने से इनकार किया है। इसके साथ ही शाह ने इसका एक वीडियो भी शेयर किया है जिसमें वह वंदे मातरम के दौरान बैठे दिख रहे हैं। साथ ही, सऊद आलम ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वह हिंदू गाने का सम्मान नहीं करेंगे क्योंकि यह हिंदू राष्ट्र नहीं है।


