उत्तर प्रदेश के बहराइच में दुर्गा विसर्जन जुलूस में हुई हिंसा पर एक बार फिर बातें होनी शुरू हो गई हैं। यह वही घटना है, जिसमें राम गोपाल मिश्रा को भगवा झंडा फहराने पर गोली मार दी गई थी। गोली मारने वाले सरफराज उर्फ रिंकू को कोर्ट ने एक साल बाद फाँसी की सजा सुनाई है। कोर्ट का फैसला उन लोगों के लिए शायद पढ़ना मुश्किल हो जो राम गोपाल की हत्या के बाद भी उसे मारने वालों को ‘मासूम’ दिखाने की कोशिश कर रहे थे।
गुरुवार (11 दिसंबर 2025) को स्थानीय सत्र न्यायालय (Session Court) ने बहराइच में हिंदू-विरोधी हिंसा पर फैसला सुनाया। पुलिस ने नामजद किए 13 आरोपितों में 10 को कोर्ट ने दोषी करार दिया। हिंसा में मुख्य आरोपित सरफराज उर्फ रिंकू को रामगोपाल मिश्रा की हत्या का दोषी मानते हुए फाँसी की सजा सुनाई गई।
वहीं अन्य आरोपित सरफराज के अब्बा अब्दुल हमीद और उसके दो भाई फहीम और तालिब उर्फ सबलू समेत सैफ, जावेद, जीशान, ननकाउ, शोएब और मरुफ को कोर्ट ने हिंसा का दोषी माना और सभी दोषियों को आजीवन कारवास की सजा सुनाई। अब इन दोषियों को सजा उनके किए की सजा मिल चुकी है, तो आइए पन्ने पलटते हैं और बताते हैं बहराइच हिंसा का पूरा घटनाक्रम।
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस पर क्या हुआ था?
मामला 13 अक्टूबर 2025 को बहराइच के थानाक्षेत्र हरदी महाराजगंज की है। जब हिंदू श्रद्धालू धूमधाम से गाने बजाते हुए दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जा रहे थे। विसर्जन जुलूस मुस्लिम मोहल्ले में पहुँचा तो इस्लामी कट्टरपंथियों ने गाने बजाने पर आपत्ति जताई और जुलूस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।
पत्थरबाजी में विसर्जन के लिए ले जाई जा रहीं दुर्गा प्रतिमा भी क्षतिग्रस्त हो गई। पत्थरबाजी पर गुस्साए हिंदुओं ने जवाबी कार्रवाई में आसपास के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की। इसी बीच रामगोपाल मिश्रा ने एक घर की छत पर चढ़कर हरा झंडा हटाकर भगवा ध्वज फहराया।
कितनी बेरहमी से रामगोपाल मिश्रा की हत्या हुई?
भगवा ध्वज फहराने से इस्लामी कट्टरपंथियों ने राम गोपाल मिश्रा की बेरहमी से हत्या कर दी। सलमान नाम के व्यक्ति के घर पर अब्दुल हमीद और उसके बेटे सरफराज ने रामगोपाल को गोली मार दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, राम गोपाल को टॉर्चर किया गया था। गोली मारने के बाद भी रामगोपाल को करंट लगाकर प्रताड़ित किया गया। उनके पैर के नाखून उखाड़े गए और धारदार हथियारों से हमला किया गया। आँखों के पास नुकीली चीज मारी गई थी।
करंट लगाने के कारण रामगोपाल मिश्रा को ब्रेन हैमरेज हो गया था। बर्बरता की वजह से उनका खून भी बहा था और ज्यादा इन्हीं दोनों कारणों से रामगोपाल मिश्रा की मौत हुई। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया कि अब्दुल हमीद के घर की छत पर खून के धब्बे और काँच की बोतलों के टुकड़े भी मिले। संभवतः रामगोपाल मिश्रा पर काँच की बोतलों से वार किया गया था। इस प्रताड़ना की बात रामगोपाल मिश्रा की पत्नी ने भी बताई थी।
चश्मदीदों ने क्या कहा?
दुर्गा जुलूस में पथराव के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा पर चश्मदीद स्थानीय लोगों ने कहा कि यह हिंसा एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दी गई, जिसमें मस्जिद में ऐलान कर भीड़ को उकसाया गया था। हिंसा का शिकार हुए विनोद कुमार मिश्रा ने बताया विवाद की शुरुआत अब्दुल हमीद के बेटे सरफराज ने छत से पत्थर फेंककर की।
विनोद कुमार मिश्रा के मुताबिक, इस्लामी कट्टरपंथियों ने दुर्गा प्रतिमा पर ईंटे फेंकी गई। डीजे वाले को भी खींचकर मारा गया। अब्दुल हमीद ने अपने बेटे सरफराज का बचाव करते हुए पाकिस्तान का गाना बजाया। पुलिस इस वक्त तक मूकर्दशक बनकर खड़ी रही। लेकिन जैसे ही हिंदुओं ने जवाब देने की कोशिश की तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
एक और चश्मदीदी चंद्रपाल मिश्रा ने बताया कि बहराइच हिंसा राम मंदिर बनने के बाद से मुस्लिमों का गुस्सा था। उन्होंने कहा कि हिंदू कई बार मुस्लिमों के ताजिया में भी शामिल हुए, लेकिन कोरोनाकाल में मुमकिन नहीं हो सका। इसी बात की नाराजगी से मुस्लिमों ने हिंसा की।
हिंदुओं की जवाबी कार्रवाई और पुलिस ने क्या लिया एक्शन?
रामगोपाल मिश्रा की हत्या मामले में उनके भाई हरिमिलन मिश्रा ने हिंसा के दिन 13 अक्टूबर 2025 पुलिस में तहरीर दी। तहरीर में 6 मुस्लिमों को नामजद किया गया। इसी तहरीर पर पुलिस ने बहराइच हिंसा की 13 में से पहली FIR दर्ज की। बाद में पुलिस ने हत्या और दंगा मामले में 7 और लोगों को नामजद किया।
हिंदू युवक रामगोपाल मिश्रा की हत्या के अगले दिन उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए भारी संख्या में जुटे लोग बेकाबू हो गए और उन्होंने कई वाहनों और एक ऑटोमोबाइल शोरूम में आग लगा दी और एक अस्पताल में तोड़फोड़ की। इस तनाव के बाद जिले में इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्थिति नियंत्रण करने के लिए ADG (कानून एवं व्यवस्था) अमिताभ यश और गृह सचिव संजीव गुप्ता को घटनास्थल पर भेजा।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने घटना पर सख्त एक्शन लिया। हरदी थाना इंचार्ज और महाराजगंज चौकी के सब इंस्पेक्टर शिव कुमार को सस्पेंड कर दिया गया। इसके अलावा भी बड़े आला अफसर को निलंबित करने की सूचना सामने आई थीं।
पुलिस ने आरोपितों पर BNS की धारा 103(2) (मॉब लिंचिंग में हत्या), धारा 191(2), 191(3), 190, 109(2), 249, 61(2) और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत ट्रायल शुरू किया। इन सभी धाराओं में 2 साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
पुलिस की चार्जशीट में क्या कहा गया?
पुलिस ने जाँच के बाद 11 जनवरी 2025 को सेशन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इस चार्जशीट में पुलिस ने स्पष्ट तौर पर कहा कि ये कोई आम विवाद नहीं था, बल्कि ‘ठंडे दिमाग से की गई क्रूर और समाज को भयभीत करने वाली घटना’ थी, जिसमें रामगोपाल मिश्रा को 9 गोलियाँ मारी गई।
पुलिस ने सबूत के तौर पर ‘फोरेंसिक और बॉलिस्टिक परीक्षण’ को अदालत में पेश किया, जिससे यह साबित किया गया कि हथियार उन्हीं लोगों द्वारा इस्तेमाल किया गया था, जिनके नाम FIR में हैं। साथ ही पुलिस ने बताया कि रामगोपाल को टॉर्चर किया गया था। उसके शरीर पर कई घाव और चोटें भी मिली, जो न केवल हत्या बल्कि डर फैलाने के उद्देश्य को दर्शाती हैं।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया कि हिंसा के बाद इलाके में हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। दुकानें, वाहन और अस्पतालों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे इलाके में डिफैक्टो कर्फ्यू जैसा माहौल बन गया और इंटरनेट सेवा बंद करनी पड़ी। पुलिस ने उन्हीं 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की, जिनमें गोली चलाने वालों के अलावा में भीड़ में हिंसा पथराव और आगजनी में शामिल लोगों के नाम शामिल थे।
अभियोजन पक्ष ने भी कोर्ट में कहा कि यह हिंसा पूरी तरीके से धार्मिक शांति भंग करने और धार्मिक वर्चस्व का संदेश देने के इरादे से की गई और इसीलिए इसे ‘सबसे दुर्लभ मामलों’ के रूप में देखा जाना चाहिए और कहा था कि आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
बहराइच की सेशन कोर्ट में गुरुवार (12 दिसंबर 2025) को बहराइच हिंसा पर 142 पन्नों का आदेश जारी किया। इस आदेश में 13 में से 10 आरोपितों को दोषी माना गया। हिंसा के मुख्य आरोपित सरफराज उर्फ रिंकू को फाँसी की सजा और अन्य 9 आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
फैसले में कोर्ट ने मनुस्मृति के एक श्लोक का भी उल्लेख करते हुए अपराध पर कठोर सजा की आवश्यकता बताई। कोर्ट ने फैसले में मनुस्मृति के दोहे- ‘दंड शास्ति प्रजा: सर्वा दंड एवाभिरक्षति। दंड सप्तेषु जागर्ति, दंड धर्म विदुवर्धा’ का जिक्र किया।
इसका अर्थ है- ‘राजधर्म के पालन के लिए दंड विधान आवश्यक है। दंड के भय से ही समाज में अनुशासन बना रहता है। जन-धन की सुरक्षा के लिए अपराधियों को दंडित करना शासक का परम धर्म है।’ कोर्ट ने माना कि राम गोपाल मिश्रा की निर्ममत हत्या समाज के लिए भयावह अपराध है।
फैसले पर उदारवादी क्यों किलसे?
बहारइच हिंसा में कोर्ट का फैसला उन लोगों के लिए शायद पढ़ना मुश्किल होगा जो आरोपितों को मासूम दिखाने की कोशिश कर रहे थे। राम गोपाल मिश्रा की निर्मम हत्या को आरोपित सरफराज का गुस्सा बताने की कोशिश की गई। यहाँ हिंदुओं की जवाबी कार्रवाई इन लोगों को गलत लगी, लेकिन यह अनदेखा कर गए कि शुरुआत मुस्लिमों ने की थी। हिंसा पर सोशल मीडिया पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी खूब जश्न मनाया था।
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस पर पत्थरबाजी करना उनके लिए आम बात है और ऐसी घटनाएँ आए दिन सामने आती हैं। लेकिन हिंदुओं की जवाबी कार्रवाई इनसे बर्दाश्त नहीं होती। राम गोपाल मिश्रा के भगवा ध्वज फहराने से आपत्ति हो गई कि उसे मौत के घाट सुला दिया। इतनी निर्मम हत्या को ये उदारवादी लोग मामूली साबित करने में लगे रहे और आरोपितों को मासूम। अब कोर्ट का फैसला इन उदारवादी लोगों के मुँह पर तमाचा है।


