केंद्र सरकार ने MSME सेक्टर को और मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार (21 जनवरी 2026) को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक यानी SIDBI को 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी सहायता देने को मंजूरी दे दी। इस कदम का मकसद SIDBI की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना और इसके जरिए देशभर के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तक आसान और सस्ता कर्ज पहुँचाना है, ताकि रोजगार के नए मौके पैदा हो सकें।
इस फैसले की जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की। पीएम मोदी ने लिखा कि SIDBI को इक्विटी सपोर्ट देने का कैबिनेट का यह फैसला अनगिनत MSME को फायदा पहुँचाएगा और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
Today’s Cabinet decision relating to providing equity support to Small Industries Development Bank of India (SIDBI) will benefit countless MSMEs thus contributing to a Viksit Bharat. https://t.co/FASjgbT1sB
— Narendra Modi (@narendramodi) January 21, 2026
सरकार की ओर से मंजूर की गई यह 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी पूंजी वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के जरिए SIDBI में लगाई जाएगी। यह निवेश एक साथ नहीं, बल्कि तीन चरणों में किया जाएगा। वित्त वर्ष 2025–26 में पहले चरण में 3,000 करोड़ रुपए, जबकि 2026–27 और 2027–28 में अगले दो चरणों में 1,000–1,000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। यह पूंजी SIDBI की बुक वैल्यू के आधार पर डाली जाएगी, जिससे बैंक की इक्विटी मजबूत होगी और भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।
MSME सेक्टर को सीधा फायदा, दायरा होगा बड़ा
इस इक्विटी सपोर्ट का सबसे बड़ा फायदा MSME सेक्टर को मिलने वाला है। आने वाले वर्षों में SIDBI से वित्तीय सहायता पाने वाले MSME की संख्या में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। अभी जहाँ यह संख्या करीब साढ़े सात करोड़ के आसपास है, वहीं 2027–28 तक इसमें करीब 25 लाख से ज्यादा नए MSME जुड़ सकते हैं। इससे छोटे उद्यमियों तक औपचारिक बैंकिंग और फाइनेंस की पहुँच और मजबूत होगी।
रोजगार सृजन को मिलेगी रफ्तार
MSME सेक्टर पहले ही देश में रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। आँकड़ों के मुताबिक, एक MSME औसतन चार से पाँच लोगों को रोजगार देता है। इसी आधार पर अनुमान है कि जब करीब 25.74 लाख नए MSME लाभार्थी जुड़ेंगे, तो इससे लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार पैदा हो सकते हैं। यानी यह फैसला लाखों युवाओं के लिए नौकरी के नए दरवाजे खोल सकता है।
SIDBI की बैलेंस शीट और CRAR होगी मजबूत
आने वाले समय में SIDBI का कर्ज पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ने वाला है, खासकर निर्देशित ऋण, डिजिटल लोन और स्टार्टअप्स को दिए जाने वाले उद्यम ऋण के चलते। इससे जोखिम-भारित परिसंपत्तियों में भी इजाफा होगा। ऐसे में पूंजी-जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात यानी CRAR को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। अतिरिक्त इक्विटी पूंजी SIDBI को इस चुनौती से निपटने में मदद करेगी।
बेहतर क्रेडिट रेटिंग, MSME को सस्ता कर्ज
इस फैसले से SIDBI की क्रेडिट रेटिंग मजबूत होगी, जिससे उसे बाजार से कम ब्याज दर पर फंड जुटाने में आसानी होगी। इसका सीधा फायदा MSME को मिलेगा, क्योंकि उन्हें भी कम ब्याज पर कर्ज मिल सकेगा। सरकार का मानना है कि चरणबद्ध इक्विटी निवेश से SIDBI अगले तीन वर्षों तक दबाव वाले हालात में भी अपने पूंजी अनुपात को सुरक्षित स्तर से ऊपर बनाए रख सकेगा।
कुल मिलाकर, SIDBI को दी गई यह 5,000 करोड़ रुपए की इक्विटी मदद सरकार की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत MSME सेक्टर को देश की आर्थिक ग्रोथ की मजबूत रीढ़ बनाया जा रहा है। यह फैसला न सिर्फ उद्योगों को ताकत देगा, बल्कि रोजगार सृजन के जरिए ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को भी नई गति देगा।


