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गरीब-पिछड़े छात्रों का ‘अभ्युदय’: CM योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट से PCS-NEET-JEE की राह आसान, जानिए कैसे फ्री कोचिंग से UP सरकार प्रतिभाओं को रही तराश

योजना के अंतर्गत छात्रों को पढ़ाई की कई सुविधाएँ मुफ्त में दी जाती हैं। छात्रों के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह की कक्षाएँ चलाई जाती हैं ताकि वे अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ सकें।

शिक्षा हमेशा से केवल ज्ञान का माध्यम नहीं रही बल्कि सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा हथियार भी रही है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और सामाजिक रूप से विविध राज्य में यह बात और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना और उसके बाद समाज में बदलाव लाना कई छात्रों का सपना रहता है लेकिन हकीकत यह है कि लाखों गरीब और गाँव के छात्र, चाहे उनमें कितनी भी प्रतिभा क्यों न हो सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे महँगी कोचिंग नहीं ले पाते।

दिल्ली, कोटा जैसे शहरों में UPSC, PCS, NEET या JEE की तैयारी के लिए लाखों रुपए खर्च करने पड़ते हैं जो एक सामान्य किसान, मजदूर या निम्न मध्यम वर्गीय परिवार के लिए लगभग असंभव होता है। इसी सामाजिक असमानता को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया और मुफ्त कोचिंग के लिए ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना‘ की शुरुआत की। यह योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की नई शुरुआत बन गई जिनके पास सपने तो थे लेकिन साधन नहीं थे।

क्या है यह योजना?

‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना’ की शुरुआत 16 फरवरी 2021 को बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से की गई थी। इसका मकसद ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों को मुफ्त कोचिंग देना है, जो आर्थिक कमजोरी या संसाधनों की कमी के कारण निजी कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। सरकार प्रदेश में युवाओं के लिए 8 नि:शुल्क आवासीय और 150 मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग चला रही है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कोचिंग बनने से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया था।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। इसमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाओं के साथ साक्षात्कार की तैयारी शामिल है। इसके अलावा JEE और NEET जैसी इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए भी प्रशिक्षण दिया जाता है। वहीं, NDA और CDS जैसी रक्षा सेवाओं से जुड़ी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा भी इस योजना में उपलब्ध है।

योजना के अंतर्गत छात्रों को पढ़ाई की कई सुविधाएँ मुफ्त में दी जाती हैं। छात्रों के लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह की कक्षाएँ चलाई जाती हैं ताकि वे अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ सकें। इसके साथ ही ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म की सुविधा दी गई है। सरकारी अधिकारी और विषय विशेषज्ञ छात्रों को मार्गदर्शन देते हैं और उनकी शंकाओं का समाधान करते हैं। छात्रों को करियर काउंसलिंग, पुस्तकालय की सुविधा और इंस्पिरेशनल क्लासेज भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

इस योजना के तहत देश के अनुभवी अधिकारी और विशेषज्ञ छात्रों की मदद करते हैं। इसमें 500 से अधिक IAS अधिकारी, 450 से ज्यादा PCS अधिकारी, 300 से अधिक IFS अधिकारी और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ इस टीम में शामिल हैं। ये सभी अधिकारी और विशेषज्ञ छात्रों के लिए पढ़ाई की सामग्री तैयार करते हैं और ऑफलाइन कक्षाओं के साथ-साथ ऑनलाइन सेशन के जरिए मार्गदर्शन देते हैं ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सही दिशा और बेहतर शिक्षा मिल सके।

इतना ही नहीं, छात्रों को इंटरव्यू की तैयारी के लिए ‘मॉक इंटरव्यू’ की सुविधा भी दी जाती है, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में शामिल हो सकें। सरकार का कहना है कि इस योजना के जरिए कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहे हैं और उन्हें प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल करने में भी यह योजना मदद कर रही है।

कैसे कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन?

‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना’ के तहत अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में मुफ्त कोचिंग की सुविधा उपलब्ध है। इस योजना के जरिए गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाशाली छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। योजना में प्रवेश के इच्छुक छात्र ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पंजीकरण कर सकते हैं। छात्र abhyuday.up.gov.in, abhyudayup.in और yuvasathi.in वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। वहीं, ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए आम तौर पर जिले के विकास भवन स्थित समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में पंजीकरण की सुविधा दी जाती है। पंजीकरण के बाद छात्रों का एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया जाता है, जिसके माध्यम से आगे की सभी जानकारियाँ साझा की जाती हैं।

‘मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना’ में रजिस्ट्रेशन के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। इसमें आधार कार्ड, उत्तर प्रदेश का निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल), आय प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र जैसे 10वीं, 12वीं या ग्रेजुएशन की मार्कशीट और पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं। इन दस्तावेजों के माध्यम से छात्रों की पहचान, निवास और आर्थिक स्थिति का सत्यापन किया जाता है।

पात्रता और चयन प्रक्रिया

योजना में प्रवेश के लिए पात्रता भी परीक्षा के अनुसार तय की गई है। JEE और NEET की तैयारी के लिए विज्ञान वर्ग के वे छात्र पात्र हैं, जो कक्षा 11 या 12 में पढ़ रहे हैं या परीक्षा पास कर चुके हैं। IAS और PCS जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं के प्रशिक्षण के लिए स्नातक अंतिम वर्ष के छात्र या स्नातक पास कर चुके छात्र आवेदन कर सकते हैं। वहीं, NDA और CDS जैसी रक्षा सेवाओं की परीक्षाओं के लिए पात्रता संबंधित परीक्षा के नियमों के अनुसार होती है।

छात्रों के चयन की प्रक्रिया भी तय की गई है। आम तौर पर कोचिंग का सत्र 1 जुलाई से 30 अप्रैल तक चलता है। हर वर्ष निर्धारित तिथियों के अनुसार संबंधित कोर्स के लिए चयन प्रक्रिया तय की जाती है। छात्रों का चयन प्रवेश परीक्षा, मेरिट सूची या साक्षात्कार के आधार पर किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया जिला स्तरीय समिति द्वारा निर्धारित की जाती है ताकि योग्य छात्रों को योजना का लाभ मिल सके।

गाजियाबाद जिले में इस योजना के कोर्स-को-ऑर्डिनेटर रहे अविनाश ने ‘ऑपइंडिया’ से बातचीत में इस योजना को आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उनके अनुसार, यह योजना उन प्रतिभाशाली छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है जो संसाधनों की कमी के कारण महँगी कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई नहीं कर पाते थे। उन्होंने कहा कि ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से कक्षाएँ संचालित होने के कारण दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी इस योजना से जुड़ पा रहे हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि हर जिले में डिजिटल संसाधनों को और मजबूत किया जाए तो ज्यादा छात्रों को लाभ मिल सकता है।

सैकड़ों छात्रों ने लिखी सफलता की कहानी

यह योजना छात्रों के लिए एक प्रभावी मंच साबित हो रही है। इस योजना के तहत मिलने वाली मुफ्त कोचिंग और मार्गदर्शन से छात्रों ने बड़ी-बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की PCS मुख्य परीक्षा 2024 में अभ्युदय योजना से जुड़े कुल 75 छात्र सफल हुए हैं। इनमें सबसे अधिक 40 छात्र भागीदारी भवन, लखनऊ से चयनित हुए हैं। इसके अलावा लखनऊ के आदर्श पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र से 18 छात्र और हापुड़ के IAS/PCS कोचिंग सेंटर से 17 छात्रों ने मुख्य परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।

इससे पहले भी अभ्युदय योजना के छात्र विभिन्न परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं। UPSC 2023 में इस योजना से जुड़े 23 छात्रों का चयन हुआ था। वहीं, UPPCS 2023 में 30 छात्रों ने सफलता हासिल की थी। इसी तरह JEE मेन्स 2024 में 35 छात्र सफल हुए हैं जो इस बात का प्रमाण है कि योजना न केवल सिविल सेवा बल्कि इंजीनियरिंग जैसी कठिन परीक्षाओं में भी छात्रों को आगे बढ़ने का मौका दे रही है।

सरकार के अनुसार, आगामी सत्र के लिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु लगभग 27,000 छात्रों ने पंजीकरण कराया है। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का जुड़ना इस बात का संकेत है कि अभ्युदय योजना पर छात्रों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। खास बात यह है कि इस योजना से सबसे ज्यादा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को मिल रहा है, जिन्हें पहले अच्छे मार्गदर्शन और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता था।

योगी सरकार का समाज बदलने वाला साहसिक कदम

पहले सिविल सेवा या डॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना केवल बड़े शहरों और संपन्न वर्ग के बच्चों तक सीमित था। अब गाँवों और गरीब परिवारों के बच्चे भी इस क्षेत्रों में पहुँच रहे हैं। जब किसी छोटे गाँव का छात्र IAS या PCS बनता है, तो वह केवल अपनी किस्मत नहीं बदलता, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।

योगी सरकार की इस योजना की तारीफ इसलिए जरूरी है क्योंकि इसने शिक्षा को केवल निजी संस्थानों के भरोसे छोड़ने के बजाय सरकारी जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार किया। आज देश में कोचिंग उद्योग अरबों रुपए का कारोबार बन चुका है, जहाँ गरीब छात्रों के लिए जगह बहुत सीमित है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था करना एक साहसिक फैसला है।

हालाँकि, किसी भी बड़ी योजना की तरह अभ्युदय कोचिंग के सामने भी चुनौतियाँ रही हैं। कुछ जगहों पर संसाधनों की कमी, शिक्षकों की गुणवत्ता या अन्य समस्याओं की शिकायतें आई हैं। इसके बावजूद यह तथ्य नहीं बदला जा सकता कि अभ्युदय योजना ने हजारों छात्रों को वह अवसर दिया जो पहले उनके लिए उपलब्ध नहीं था। योगी सरकार इस योजना को केवल एक सरकारी घोषणा नहीं बल्कि लंबे वक्त के लिए शैक्षिक सुधार के तौर में देख रही है।

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शिव
शिव
7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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