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पंजाब का कैंसर संकट: 5 वर्ष में 13299 और 2025 में 2700 महिलाओं की मौत, AAP सांसद ने प्रदूषित पानी और खेती में केमिकल्स पर उठाए सवाल

पंजाब में प्रति 1 लाख आबादी पर कम से कम 172 कैंसर मरीज दर्ज किए गए थे जबकि मालवा क्षेत्र में कैंसर के मामले और भी अधिक पाए गए। हाल के अनुमानों के मुताबिक मालवा में कैंसर की दर चिंताजनक स्तर तक पहुँच चुकी है।

पंजाब में कैंसर का संकट बेहद गंभीर होता जा रहा है। औसतन हर दिन आठ महिलाओं की कैंसर से मौत हो रही है। ताजा आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में करीब 2,700 महिलाओं की जान कैंसर के कारण जा चुकी है।

यह मामला 12 फरवरी को राज्यसभा में उठाया गया। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने सदन में इस गंभीर स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि यह पंजाब के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। उन्होंने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार से तत्काल कदम उठाने की माँग की।

सीचेवाल ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

सीचेवाल ने विशेष उल्लेख (Special Mention) के दौरान पंजाब में महिलाओं के बीच बढ़ते कैंसर मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कैंसर के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी बेहद चिंताजनक है और इस पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में पंजाब में लगभग 2,700 महिलाओं की कैंसर से मौत हुई जो औसतन प्रतिदिन 8 महिलाओं की मृत्यु के बराबर है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच कुल 13,299 महिलाओं की कैंसर से जान गई। इनमें सबसे अधिक 7,186 मौतें स्तन कैंसर से हुईं, इसके बाद गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervix Uteri) से 3,502 और अंडाशय कैंसर (Ovary cancer) से 2,611 महिलाओं की मृत्यु हुई।

उन्होंने आगे कहा, “चिंताजनक बात यह है कि 40 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में भी कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही बल्कि कम उम्र की महिलाओं के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। उन्होंने पर्यावरणीय कारणों, खासकर जल प्रदूषण और कृषि में रासायनिक उर्वरकों के व्यापक उपयोग को इसके प्रमुख कारणों में बताया। उनका कहना था कि ये रसायन मिट्टी में मिलकर अंततः खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मानव शरीर में पहुँच जाते हैं।

सीचेवाल ने कहा कि ये आँकड़े नीति बनाने वालों और समाज दोनों के लिए चेतावनी हैं और इस पर गंभीरता से ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

पंजाब में कैंसर के बढ़ते केस, इलाज में राहत की माँग

पर्यावरण प्रदूषण को कैंसर के बड़े कारणों में से एक माना गया है। प्रदूषित पीने का पानी, खेती में केमिकल खाद और कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल और उद्योगों का कचरा इसके संभावित कारण बताए गए हैं। सीचेवाल ने कहा कि जब माताओं के स्तन दूध में DDT जैसे खतरनाक रसायन पाए गए तब जाकर इन रसायनों पर रोक लगाई गई। इससे साफ होता है कि जहरीले तत्व कितनी गहराई तक इंसानी शरीर में पहुँच सकते हैं।

उन्होंने सरकार से माँग की कि महिलाओं के लिए कैंसर का इलाज पूरी तरह मुफ्त किया जाए। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सरकारी या निजी अस्पतालों में इलाज के लिए कम से कम 75 से 80 प्रतिशत तक की सहायता दी जाए। उन्होंने कहा कि महिलाएँ परिवार और समाज की रीढ़ होती हैं, इसलिए पंजाब के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उनके स्वास्थ्य की रक्षा जरूरी है।

पंजाब को क्यों कहा जाता है कैंसर कैपिटल?

पंजाब खासकर मालवा क्षेत्र को लंबे समय से भारत की ‘कैंसर कैपिटल’ कहा जाता है। कृषि उत्पादन के लिए मशहूर मालवा आज ‘कैंसर बेल्ट’ के नाम से भी जाना जाने लगा है।

Asian Pacific Journal of Cancer Prevention में प्रकाशित एक शोध पत्र में पंजाब के 500 कैंसर मरीजों का अध्ययन किया गया था। इस अध्ययन के अनुसार, 500 मरीजों में से 65% महिलाएँ और 35% पुरुष थे। महिलाओं में 50–54 और 60–64 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित पाया गया। वहीं, पुरुषों में 65–69 और 60–64 वर्ष आयु वर्ग में कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा देखा गया।

महिलाओं में सबसे अधिक स्तन कैंसर के मामले सामने आए, इसके बाद गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) और अंडाशय (ओवरी) का कैंसर प्रमुख रहा। पुरुषों में सबसे ज्यादा कोलन (बड़ी आंत) का कैंसर पाया गया, इसके बाद भोजन नली (इसोफेगस) और जीभ का कैंसर प्रमुख रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब में प्रति 1 लाख आबादी पर कम से कम 172 कैंसर मरीज दर्ज किए गए थे जबकि मालवा क्षेत्र में कैंसर के मामले और भी अधिक पाए गए। हाल के अनुमानों के मुताबिक मालवा में कैंसर की दर चिंताजनक स्तर तक पहुँच चुकी है। कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए कृषि रसायनों और कीटनाशकों को व्यापक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत में लगभग 15 लाख कैंसर के मामले दर्ज किए गए जो 2022 में 14.6 लाख थे। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनशैली में बदलाव, पर्यावरण प्रदूषण, आनुवंशिक कारण और देर से जाँच (डायग्नोसिस) कैंसर के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। हालाँकि, पूरे देश में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं लेकिन पंजाब की स्थिति विशेष रूप से गंभीर मानी जा रही है क्योंकि यहाँ प्रदूषण और कृषि केमिकल्स से इसका संबंध है।

पंजाब की ‘कैंसर ट्रेन’

पंजाब की कैंसर स्थिति का सबसे मार्मिक प्रतीक है बठिंडा-बीकानेर ट्रेन जिसे लोग ‘कैंसर ट्रेन‘ कहते हैं। हर रात करीब 9:30 बजे 12 डिब्बों वाली यह ट्रेन बठिंडा से सैकड़ों यात्रियों, जिनमें कई कैंसर मरीज होते हैं, को लेकर रवाना होती है। लगभग 325 किलोमीटर का सफर तय कर यह सुबह राजस्थान के बीकानेर पहुँचती है।

अधिकांश मरीज आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल और रिसर्च सेंटर में इलाज कराने जाते हैं। बीकानेर में इलाज अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण बड़ी संख्या में मरीज दूसरे राज्य से रुख करते हैं। कैंसर मरीजों को ट्रेन में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है जबकि उनके साथ आने वाले को 75% किराया छूट दी जाती है।

मुख्यमंत्री पंजाब कैंसर राहत कोष योजना के तहत बीकानेर के कुछ अस्पतालों में मरीजों को 15 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता भी दी जाती है। रातभर सफर कर इलाज के लिए जाते मरीजों के हाथों में मेडिकल फाइलों से भरे प्लास्टिक कवर, इस गंभीर संकट की दर्दनाक तस्वीर बन चुके हैं।

कौन हैं बलबीर सिंह सीचेवाल?

संत बलबीर सिंह सीचेवाल को ‘ईको बाबा’ के नाम से जाना जाता है। वह पंजाब के एक सिख पर्यावरण कार्यकर्ता, आध्यात्मिक नेता और राज्यसभा सांसद हैं। उन्हें आम आदमी पार्टी (AAP) ने उनके पर्यावरण संरक्षण कार्यों के लिए नामित किया था।

उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान उस समय मिली जब उन्होंने काली बेईं नदी की सफाई का बड़ा अभियान चलाया। यह नदी लगभग 160 किलोमीटर बहने के बाद सतलुज और ब्यास नदियों में मिलती है। एक समय यह नदी औद्योगिक कचरे और दर्जनों गांवों के गंदे पानी के कारण पूरी तरह प्रदूषित होकर कूड़ाघर बन चुकी थी।

ऐसे हालात में संत सीचेवाल ने स्वयंसेवकों के सहयोग से एक विशाल जनआंदोलन खड़ा किया और नदी को पुनर्जीवित करने का काम किया। उनके इस प्रयास की विश्व स्तर पर सराहना हुई। वर्ष 2008 में उन्हें ‘टाइम’ पत्रिका द्वारा ‘पर्यावरण के नायक’ (Hero of the Environment) सम्मान दिया गया। उस समय यह सम्मान पाने वाले वे एकमात्र भारतीय और एशियाई थे।

उन्होंने ‘सीचेवाल मॉडल’ भी शुरू किया जो कम लागत वाली अंडरग्राउंड सीवेज व्यवस्था है। इस प्रणाली के माध्यम से गंदे पानी को शुद्ध कर खेतों में उपयोग किया जाता है। इस मॉडल को पंजाब सरकार का समर्थन भी मिला है। संत सीचेवाल स्वास्थ्य समस्याओं विशेषकर कैंसर को प्रदूषण से जोड़ते हैं। वे साफ जल और साफ हवा के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं और संसद में किसानों से लेकर पर्यावरण संकट तक के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में श्रृति सागर ने लिखी है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

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Shriti Sagar
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Journalist

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