बीते कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी कई जघन्य आपराधिक घटनाएँ सामने आई हैं, जिन्होंने ये साबित कर दिया कि मजहबी कट्टरपंथियों को हितैषी समझना खतरनाक कैसे है। ये घटनाएँ हत्या तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि इनमें विश्वासघात, क्रूरता, बदले की भावना, आर्थिक विवाद, मानसिक असंतुलन और कट्टर सोच जैसे कई खतरनाक पहलू उजागर हुए हैं।
इन सभी मामलों को एक साथ देखने पर यह स्पष्ट होता है कि समाज को इस्लामी कट्टरपंथियों से पहले से कहीं अधिक सतर्कता, सावधानी की आवश्यकता है। नीचे वो सभी मामले बताए गए हैं, जिसे पढ़कर आप स्वयं समझ पाएँ कि इनसे दूरी ही भली है, क्योंकि ये असल में हिंदुओं की दोस्ती के काबिल ही नहीं है। नीचे की घटनाएँ आपको स्वयं इसका प्रमाण देंगी।
दिल्ली के अमन विहार में कर्ज न चुकाना पड़े, इसलिए हिंदू दोस्त की हत्या
दिल्ली के रोहिणी स्थित अमन विहार इलाके में पुलिस ने एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया, जिसमें महज 4 लाख रुपए का कर्ज न चुका पाने के कारण दो सगे भाइयों सोनू और महबूब अली ने 50 वर्षीय अजय कुमार की बेरहमी से हत्या कर दी।
पुलिस के अनुसार, अजय कुमार सेक्टर-20 रोहिणी के निवासी थे और 19 फरवरी 2026 से लापता चल रहे थे। आखिरी बार उन्हें प्रेम नगर इलाके में एक घर से अपनी मोटरसाइकिल पर निकलते हुए देखा गया था। 20 फरवरी को अमन विहार थाने में उनके भाई द्वारा गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
कई दिनों तक खोजबीन के बावजूद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो 23-24 फरवरी की रात मामला अपहरण और हत्या की आशंका में दर्ज कर जाँच को तेज किया गया।
CCTV और टेक्निकल सर्विलांस से खुली साजिश
जाँच के दौरान पुलिस ने इलाके के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी निगरानी शुरू की। एक फुटेज में एक संदिग्ध युवक अजय कुमार की मोटरसाइकिल को सुनसान जगह पर खड़ा करता हुआ दिखाई दिया। इसी अहम सुराग के आधार पर पुलिस प्रेम नगर निवासी दो सगे भाइयों सोनू और महबूब अली तक पहुँची और उन्हें हिरासत में लिया।
कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों ने हत्या की बात कबूल कर ली। आरोपितों ने बताया कि उन्होंने अजय कुमार से 10 प्रतिशत मासिक ब्याज पर 4 लाख रुपए का कर्ज लिया था, जिसे वे लंबे समय से चुका नहीं पा रहे थे। 19 फरवरी 2026 को जब अजय किश्त के पैसे माँगने उनके घर पहुँचे, तो दोनों पक्षों में तीखी बहस हो गई।
विवाद इतना बढ़ गया कि महबूब ने मीट काटने वाले चाकू और आरी से अजय पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद दोनों भाइयों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए नजफगढ़ ड्रेन के पास चंदन विहार इलाके में फेंक दिया।
पुलिस ने आरोपितों की निशानदेही पर शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा है। इस मामले में हत्या, साजिश और सबूत मिटाने की गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं।
चित्रकूट में हिंदू व्यापारी के बेटे की अपहरण के बाद हत्या, मुठभेड़ में इरफान ढेर
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के बरगढ़ कस्बे में एक व्यापारी के 13 वर्षीय बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस जघन्य वारदात से पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
पुलिस जाँच में सामने आया कि आरोपित इरफान पहले मृतक बच्चे के पिता अशोक केसरवानी के घर किराए पर रहता था। 10 दिसंबर 2025 को किसी विवाद के बाद उसने कमरा खाली कर दिया था। इसके बाद बदले की भावना से उसने अपने साथी कल्लू के साथ मिलकर इस अपराध की साजिश रची।
बाइक सिखाने के बहाने बुलाया, बंद बक्से से बरामद हुआ मासूम का शव
22 जनवरी 2026 की शाम आरोपित ने बच्चे को बाइक चलाना सिखाने के बहाने घर से बुलाया और उसका अपहरण कर लिया। CCTV फुटेज और मुखबिरों की मदद से पुलिस ने तेजी से घेराबंदी की। इसके बाद हुई मुठभेड़ में मुख्य आरोपित कल्लू मारा गया, जबकि उसका साथी इरफान गोली लगने से घायल हो गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस को बच्चे का शव एक बंद बक्से से बरामद हुआ। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया और व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिले के आला अधिकारी मौके पर डटे रहे और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई।
बदायूँ में दो मासूम बच्चों की निर्मम हत्या: रमजान से पहले से खरीद रखा था चाकू
उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में 19 मार्च 2024 को हुई घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। नाई की दुकान चलाने वाले साजिद ने दो मासूम बच्चों आयुष (13 वर्ष) और अहान (6 वर्ष) की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी। पुलिस जाँच में सामने आया कि साजिद ने हत्या से कुछ घंटे पहले एक नया चाकू खरीदा था।
जब उसके भाई जावेद ने पूछा तो उसने बहाना बनाया कि रमजान के दौरान गोश्त काटने के लिए चाकू चाहिए। दोनों भाई दुकान पर सामान्य रूप से काम कर रहे थे। इसके बाद साजिद ने तबीयत खराब होने का बहाना बनाया और दुकान बंद कर गाँव लौट गया। कुछ समय बाद दोनों वापस बदायूँ आए और फिर साजिद पीड़ित बच्चों के घर जाने की बात कहने लगा।
साजिद पिछले 4-5 वर्षों से पीड़ित परिवार के सामने दुकान करता था और परिवार से अच्छी पहचान थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर वह बच्चों के घर में दाखिल हुआ और अंदर जाकर दोनों बच्चों की गला रेतकर हत्या कर दी।
खून से सने कपड़ों में आया बाहर, पोस्टमार्टम में 23 वार
जावेद ने पुलिस को बताया कि साजिद खून से सने कपड़ों में बाहर आया और इसके बाद दोनों फरार हो गए। पुलिस मुठभेड़ में उसी दिन साजिद मारा गया, जबकि उसका भाई जावेद दो दिन बाद गिरफ्तार किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों बच्चों के शरीर पर कुल 23 धारदार हथियार से किए गए वार पाए गए, जो इस अपराध की क्रूरता को दर्शाते हैं।
पुलिस जाँच में सामने आया कि साजिद बचपन से बीमार रहता था, उसे कई बार दरगाहों पर ले जाया गया था, वह हिंसक प्रवृत्ति का था और उसे अचानक तेज गुस्सा आ जाता था। उसने पहले चूहे मारने की दवा भी खाई थी। पुलिस ने बताया कि वह हत्या करने का मन पहले से बनाकर गया था।
अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या: दोस्ती, कर्ज, भरोसा और फिर खौफनाक विश्वासघात
महाराष्ट्र के अमरावती में केमिस्ट उमेश कोल्हे की हत्या के मामले में उनके छोटे भाई महेश कोल्हे ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। मुख्य आरोपित यूसुफ उमेश का बेहद करीबी दोस्त था। दोनों का एक-दूसरे के घर आना-जाना था और वे लंबे समय तक साथ में समय बिताते थे।
यूसुफ वेटरनरी अस्पताल में काम करता था और उमेश वेटरनरी दवाओं का कारोबार करते थे, जिससे दोनों के व्यावसायिक संबंध भी थे।
आर्थिक तंगी देख उमेश ने कई बार की थी मदद
समय के साथ यह कर्ज एक लाख रुपये से अधिक हो गया। यूसुफ को अपनी बहन की शादी के लिए पैसों की जरूरत थी, जिसके लिए उसने उमेश से सहायता माँगी और रकम ली, लेकिन कभी लौटाई नहीं। यूसुफ ने अपने बच्चों को मुस्लिम स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए उमेश से संपर्कों का इस्तेमाल करने को कहा।
उमेश की सिफारिश पर स्कूल में बच्चों को एडमिशन मिला। दोनों एक व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन थे। उमेश से गलती से एक पोस्ट फॉरवर्ड हो गया, जिसके बाद कट्टर मानसिकता और उग्रता ने इस पूरे मामले को हत्या तक पहुँचा दिया। आरोपित यूसुफ उस व्हाट्सएप ग्रुप का एडमिन था, जिसमें उमेश ने में नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट को फॉरवर्ड कर दिया था।
असावधानी ले सकती है आपकी जान
यह सभी मामले अपने आप में एक चेतावनी हैं, जो कह रहे हैं कि इस्लामी कट्टरपंथियों पर भरोसा, उनसे दोस्ती न सिर्फ आपकी बल्कि आपके मासूम बच्चों की जिंदगी भी खतरे में डाल सकती है। इन सभी मामलों में किसी भी मृतक का कोई बहुत बड़ा दोष नहीं था, लेकिन अगर कट्टरपंथियों को दोस्त बनाना, उनके साथ तालमेल बढ़ाना आपकी हत्या भी करा सकता है, तो ये बड़ा दोष ही साबित होता है, ऐसे में जरूरी है कि सतर्क रहें और ये समझने की भूल ना करें कि हर मुस्लिम एक जैसा नहीं और इनसे आपको कोई खतरा नहीं।


