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केजरीवाल ने गुजरात में AAP अध्यक्ष समेत कई नेताओं पर दर्ज FIR को बताया राजनीतिक लेकिन हकीकत छिपाई: मिस्टर अरविंद, ये मामले वसूली-मारपीट-किडनैपिंग के हैं

गुजरात में AAP नेताओं पर कई मामलों में कार्रवाई, केजरीवाल का राजनीतिक बदले का दावा, लेकिन घटनाओं में वसूली, मारपीट, धमकी और कानून में हस्तक्षेप के आरोप सामने आए।

द्वारका में अप्रैल महीने के पहले ही दिन आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं ने ऐसा हंगामा काटा कि वो जेल पहुँच गए। जानकारी के मुताबिक, जाम खंभालिया पुलिस स्टेशन में हंगामा करने के आरोप में आम आदमी पार्टी के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष येसुदान गढ़वी और उनके 17 समर्थकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

इस घटना के बाद आम आदमी पार्टी के गुजरात और केंद्रीय नेतृत्व ने इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू कर दी है। बिना पूरी सच्चाई सामने लाए सिर्फ आरोप लगाकर माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले पर बयान दिया और दावा किया कि गुजरात में भाजपा सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले तीन महीनों में आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ 145 FIR दर्ज की गई हैं और 160 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। केजरीवाल ने खास तौर पर येसुदान गढ़वी की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए इसे तानाशाही बताया, हालाँकि उनके ये दावे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते।

अरविंद केजरीवाल का यह दावा काफी बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया लगता है। उन्होंने यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया कि 145 FIR दर्ज हुई हैं और 160 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आम आदमी पार्टी की ओर से भी ऐसी कोई आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है, जिससे इन आंकड़ों की पुष्टि हो सके।

केजरीवाल यह भी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि गुजरात में आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ राजनीतिक वजहों से केस दर्ज किए जा रहे हैं। हालाँकि, हकीकत यह है कि गुजरात में समय-समय पर AAP नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज होते रहे हैं, लेकिन वे सीधे तौर पर राजनीति से जुड़े नहीं हैं।

कुछ मामलों में नेताओं पर शराब से जुड़े आरोप लगे हैं, जबकि कुछ अपहरण जैसे गंभीर मामलों में जेल भी जा चुके हैं। इसके अलावा, आम आदमी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता मारपीट और जबरन वसूली जैसे मामलों में भी फंसे हैं।

येसुदास गढ़वी का मामला: आखिर हुआ क्या था?

अरविंद केजरीवाल द्वारा जिस मामले का जिक्र किया गया है, वह देवभूमि द्वारका जिले के जाम खंभालिया पुलिस स्टेशन से जुड़ा है। बुधवार (1 अप्रैल 2026) को आम आदमी पार्टी (AAP) के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष येसुदान गढ़वी समेत 30 से ज्यादा कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे और थाने में हंगामा किया।

यह पूरा मामला AAP कार्यकर्ता दीपक के खिलाफ दर्ज चेन छीनने के केस को लेकर था। पुलिस के मुताबिक, दीपक जो मूल रूप से बिहार का रहने वाला है, उसके खिलाफ मंगलवार (31 मार्च 2026) को लूट का मामला दर्ज किया गया था।

AAP नेताओं का कहना था कि यह केस झूठा है, इसलिए येसुदान गढ़वी, द्वारका जिला अध्यक्ष रामजी परमार और अन्य कार्यकर्ता सुबह पुलिस स्टेशन पहुँचे और माँग करने लगे कि दीपक पर दर्ज केस हटाया जाए और किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।

जब पुलिस ने उनकी माँग मानने से इनकार कर दिया, तो कार्यकर्ताओं ने थाने के अंदर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने पुलिस के काम में बाधा डाली, पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की की, बहस की और वहाँ की लाइव रिकॉर्डिंग भी की। इतना ही नहीं, उन्होंने पुलिस रजिस्टर देखने की भी माँग की जिससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।

स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस ने येसुदान गढ़वी समेत 18 लोगों को हिरासत में लिया और कुल 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिनमें 18 नामजद और बाकी अज्ञात शामिल हैं।

इन पर दंगा करने, सरकारी काम में बाधा डालने, गैरकानूनी तरीके से भीड़ इकट्ठा करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। पुलिस उपाधीक्षक विस्मय मनसेटा के अनुसार, आरोपियों ने पुलिस पर दबाव बनाने और लोक सेवकों को धमकाने की भी कोशिश की।

घटना सामने आने के बाद अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना और भाजपा की साजिश बताया। केजरीवाल ने कहा कि गुजरात में AAP कार्यकर्ताओं पर राजनीतिक दबाव बढ़ाया जा रहा है।

वहीं AAP नेता गोपाल इटालिया और चैतर वासावा ने भी विरोध जताते हुए इस कार्रवाई को धमकी और दमन करार दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे सिर्फ अपने साथी से मिलने और कथित झूठे मामले के खिलाफ अपनी बात रखने के लिए थाने गए थे।

वहीं पुलिस ने साफ किया कि यह कोई सामान्य या शांतिपूर्ण विरोध नहीं था, बल्कि उनके काम में सीधा हस्तक्षेप किया गया। पुलिस के अनुसार, कार्यकर्ताओं ने थाने में हंगामा किया और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ा। हालात को संभालने के लिए DSP, LCB और SOG की टीमें भी मौके पर पहुँचीं।

इसके बाद येसुदान गढ़वी समेत अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया। बाद में सभी को जमानत मिल गई, लेकिन मामला अभी भी जारी है और जाँच चल रही है।

आप नेताओं का पहले भी रहा है आपराधिक इतिहास

युवराज सिंह घोटाला : आम आदमी पार्टी के नेता युवराज सिंह जडेजा को प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए ‘डमी घोटाले’ के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी छात्रों के नाम उजागर करने की धमकी देकर दो लोगों से करीब 1 करोड़ रुपए की उगाही की।

जाँच के दौरान सबूतों में सहयोग न करने के कारण उन्हें जेल भेज दिया गया था। हालाँकि बाद में अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली। जमानत मिलने के बाद उन्हें कुछ सख्त शर्तों का पालन करना होगा, जैसे अपना पासपोर्ट जमा करना, जाँच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करना, किसी गवाह को धमकाना नहीं और कोर्ट की अनुमति के बिना गुजरात से बाहर नहीं जाना।

स्कूल में नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ के आरोपी AAP नेता : राजकोट के कोठारिया रोड स्थित सरस्वती एजुकेशनल कॉम्प्लेक्स स्कूल में 2024 में प्रिंसिपल राकेश  सोरथिया के साथ उनके ही स्कूल में पढ़ने वाली 11 से 14 साल की चार नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़ का मामला सामने आया।

अभिभावकों द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपित ने छात्राओं को अपने कार्यालय में बुलाया और उनसे शारीरिक संपर्क और अश्लील माँगें रखीं, भक्तिनगर पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पहले ही छेड़छाड़ के आरोपों में शामिल इस नेता के खिलाफ IPC और POCSO के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आम आदमी पार्टी के पार्षद पर जबरन वसूली का मामला दर्ज : सूरत के मोटा वराछा इलाके में एक स्टेशनरी दुकानदार को धमकाकर उससे 1 लाख रुपए की फिरौती माँगने के मामले में आम आदमी पार्टी के पार्षद राजेश मोर्डिया और उनके साथी पंकज पटेल को उतरन पुलिस ने गिरफ्तार किया।

आरोप है कि दोनों ने दुकानदार को काम बंद कराने की धमकी दी और उसे डराने-धमकाने के लिए हथियार (पैडल) भी दिखाया। इसके अलावा, इन पर एक किसान से 50000 रुपए की जबरन वसूली करने का भी आरोप लगा है।

इस मामले के सामने आने के बाद विरोध बढ़ा, जिसके चलते आम आदमी पार्टी ने कार्रवाई करते हुए राजेश मोर्डिया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया।

महिला कर्मचारी का अपहरण और जान से मारने की धमकी : हाल ही में गाँधीनगर के सेक्टर-25 GIDC में स्थित HBC लाइफ साइंसेज कंपनी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया। कंपनी के मालिक और आम आदमी पार्टी के राज्य उपाध्यक्ष हसमुख पटेल को एक महिला लेखाकार के अपहरण और मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

बताया गया कि कंपनी में 80 से 85 लाख रुपए के संदिग्ध लेनदेन और गुमनाम खातों का पता लगाने के बाद इस महिला कर्मचारी को निशाना बनाया गया। आरोप है कि हसमुख पटेल के इशारे पर उसे जबरन अगवा किया गया और चलती गाड़ी में उसके साथ मारपीट की गई, साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी गई।

जब पीड़िता ने मदद माँगने की कोशिश की, तो उस पर पुलिस में शिकायत न करने का दबाव भी बनाया गया। हालाँकि, बाद में सेक्टर-21 पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया और हसमुख पटेल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।

अहमदाबाद में आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष पर धोखाधड़ी और धमकी का आरोप : घाटलोडिया पुलिस ने आम आदमी पार्टी के शहर उपाध्यक्ष और साबरमती विधानसभा प्रभारी अमित पंचाल और उनके पिता को गिरफ्तार किया है। उन पर एक राजमिस्त्री का 43 लाख रुपए का बकाया मजदूरी भुगतान न करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है।

मेमनगर निवासी धनपाल यादव की शिकायत के अनुसार, अमित पंचाल ने उनके घर के प्लास्टर के काम के बदले करीब 5 लाख रुपए का सीमेंट का सामान भी ले लिया था। जब राजमिस्त्री अपने पैसे लेने गया, तो उसे नहर में फेंकने की धमकी दी गई।

इस मामले में पुलिस ने पहले ही धमकी और अन्य आरोपों को लेकर अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया था और अब कानूनी कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।

चैतर वासवा पर महिला पंचायत अध्यक्ष के साथ अभद्र व्यवहार का आरोप : डेडियापाड़ा पुलिस ने आम आदमी पार्टी के शहर उपाध्यक्ष और साबरमती विधानसभा प्रभारी अमित पंचाल और उनके पिता को गिरफ्तार किया है। उन पर एक राजमिस्त्री का 43 लाख रुपए का बकाया मजदूरी भुगतान न करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है।

जब महिला ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने भाजपा नेता पर मोबाइल फोन और पानी का गिलास फेंककर हमला कर दिया ।

मेमनगर निवासी धनपाल यादव की शिकायत के अनुसार, अमित पंचाल ने उनके घर के प्लास्टर के काम के बदले करीब 5 लाख रुपए का सीमेंट का सामान भी ले लिया था। जब राजमिस्त्री अपने पैसे लेने गया, तो उसे नहर में फेंकने की धमकी दी गई।

इसके अलावा, वासवा पर वन विभाग के एक कर्मचारी को अपने घर बुलाकर धमकाने और उसकी पिटाई करने का भी आरोप है। इस मामले में पुलिस ने पहले ही धमकी और अन्य आरोपों को लेकर अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया था और अब कानूनी कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया है।

इसके अलावा, जूनागढ़ पुलिस ने महिला PSI एस एन सोनारा पर अश्लील टिप्पणी करने के आरोप में पाँच AAP समर्थकों को गिरफ्तार किया। महिसागर जिले में AAP अध्यक्ष बाबू दामोर को सरकारी जमीन पर मकान बनाने के आरोप में पकड़ा गया। वहीं सूरत के पार्षद जीतू कछड़िया पर पार्किंग ठेकेदार से 10 लाख रुपए की रिश्वत माँगने का आरोप लगा।

अस्पताल कर्मचारी ने जान से मारने की धमकी दी : सूरत के स्मेर अस्पताल में आयुष्मान कार्ड विभाग के एक कर्मचारी को गाली देने और थप्पड़ मारने के आरोप में आम आदमी पार्टी के पार्षद विपुल सुहागिया को वराछा पुलिस ने गिरफ्तार किया।

शिकायत के अनुसार, जब खिड़की पर भीड़ थी, तब वह केबिन में घुस आए और फोन क्यों नहीं उठा रहे हो? कहते हुए झगड़ा शुरू कर दिया। गुस्से में उन्होंने कर्मचारी को थप्पड़ मारा और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने और मारपीट जैसी धाराओं में केस दर्ज किया।

इन घटनाओं को देखने पर अरविंद केजरीवाल के उस दावे पर सवाल खड़े होते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि गुजरात में AAP नेताओं पर कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से हो रही है। 145 Fir वाले उनके दावे की जाँच करने पर यह सामने आता है कि कई मामले व्यक्तिगत और गंभीर अपराधों से जुड़े हैं, न कि किसी जन आंदोलन या राजनीतिक विरोध से।

द्वारका में येसुदान गढ़वी और अन्य कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी भी इसी बात की ओर इशारा करती है कि पुलिस थाने जैसे संवेदनशील स्थानों पर दबाव बनाने और कानूनी प्रक्रिया में दखल देने की कोशिश की गई। थाने में हंगामा करना और अपराध में पकड़े गए लोगों को छुड़ाने के लिए दबाव बनाना लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि अराजकता फैलाने जैसा है।

केजरीवाल जिस तानाशाही की बात करते हैं, उसमें सामने आए मामलों में जबरन वसूली, अपहरण, मारपीट और रिश्वत जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। युवराज सिंह जडेजा का मामला हो या सूरत के पार्षदों पर लगे आरोप ये सभी सीधे आम लोगों से जुड़े अपराध हैं।

अस्पताल कर्मचारियों या सरकारी कर्मचारियों के साथ मारपीट और धमकी की घटनाएँ भी सामने आई हैं। सूरत के आम आदमी पार्टी पार्षद जीतू कछड़िया पर पार्किंग ठेकेदार से 10 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप भी लगा ।

पुलिस के अनुसार, इन मामलों में शिकायतकर्ताओं के बयान और सबूत मौजूद हैं। अगर ये मामले पूरी तरह झूठे होते, तो अदालतें इन्हें खारिज कर देतीं। लेकिन कई मामलों में जमानत सख्त शर्तों के साथ मिली या शुरुआती स्तर पर आरोप गंभीर पाए गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि इन मामलों में पहली नजर में आरोप बनते हैं।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट गुजराती में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।



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