गोवा में ‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर पर दिए गए बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यहाँ हिंदू कार्यकर्ता गौतम खट्टर ने जेवियर को ‘आतंकवादी’ और ‘बर्बर’ शासक बताया। इस बयान पर गोवा में विपक्षी पार्टी, खासकर कॉन्ग्रेस ने आपत्ति जताई। इसके बाद कार्यकर्ता के खिलाफ धार्मिक भावनाएँ आहत करने के मामले में FIR दर्ज की गई।
हिंदू कार्यकर्ता का ‘सेंट’ जेवियर को लेकर बयान
दरअसल, हिंदू संगठन सनातन महासंघ के संस्थापक गौतम खट्टर ने ‘सेंट’ जेवियर को लेकर यह बातें गोवा के वास्को डा गामा शहर में 18 अप्रैल 2026 को परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित एक समारोह में की हैं। इस समारोह में राज्य के परिवहन मंत्री मौविन गोडिन्हो और विधायक संकल्प अमोनकर भी मौजूद हुए।
गौतम खट्टर ने कहा, “आतंकवादी और बर्बर क्रूर शासक सेंट जेवियर को जहाँ दफनाया गया, उसके शरीर को कीड़े लग गए, न आत्मा बची और न शरीर बचा। उसकी हड्डियों को कीड़ों ने खाकर चूरा-चूरा कर दिया। उसके बाद भी उसका कोई त्योहार होता है, जिसमें लाखों सनातनी वहाँ हाथ जोड़ते हैं। जिसने पूरा जीवन लाखों सनातनियों को धर्मांतरण कराने में लगाया, वही सनातनी आज उसके त्योहार पर हाथ जोड़ने जाते हैं।”
वीडियो पर कॉन्ग्रेस की आपत्ति, FIR की कार्रवाई
इस बयान का वीडियो भी इंटरनेट पर वायरल हुआ। तमाम लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बयान बताया और इसे ‘हेट स्पीच’ की श्रेणी में जगह दी। कॉन्ग्रेस ने भी गौतम खट्टर के ‘सेंट’ जेवियर के बयान पर आपत्ति जताई।
We strongly condemn the derogatory remarks made against St. Francis Xavier at a recent function in Vasco.
— Goa Congress (@INCGoa) April 19, 2026
Such statements are deeply hurtful to the sentiments of the Christian community and threaten the communal harmony that Goa has always stood for. We urge the authorities to… pic.twitter.com/3YsUcXtEmp
गोवा कॉन्ग्रेस ने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर गौतम खट्टर के बयान का वीडियो शेयर किया और लिखा, “हम सेंट फ्रांसिस जेवियर के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हैं। ऐसे बयान ईसाई समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाते हैं और गोवा की उस सामाजिक एकता को नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिसके लिए राज्य हमेशा जाना जाता रहा है। हम प्रशासन से अपील करते हैं कि इस मामले में जल्द और जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई की जाए।”
इसके बाद कॉन्ग्रेस के विधायक पीटर डिसूजा ने वास्को पुलिस थाने गौतम खट्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। साउथ गोवा पुलिस अधीक्षक संतोष देसाई के मुताबिक, खट्टर को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज किया गया है।
अब यहाँ जानना जरूर है कि जिस फ्रांसिस जेवियर को ‘बर्बर शासक’ बताने पर कॉन्ग्रेस इसे धार्मिक भावनाओं की आहत होना बता रही है, उस फ्रांसिस जेवियर के कारनामे क्या हैं? कैसे वो भारत आया और उसने हिंदुओं का धर्मांतरण कराने का मिशन शुरू किया और जिसने इन्कार किया तो उसको बद से बदतर सजा दी गई। और जिस गोवा को आज ईसाई के नाम से जाना जाता है, यह पहचान जेवियर ने ही थोपी थी।
‘सेंट’ जेवियर का धर्मांतरण मिशन
फ्रांसिस जेवियर 06 मई 1542 को भारत के गोवा पहुँचा। वह अकेला नहीं आया था, बल्कि पुर्तगाल के राजा जॉन III के समर्थन और आदेश के साथ आया था। उस समय गोवा पूरी तरह पुर्तगाल के कब्जे में था और वहीं से पूरे एशिया में ईसाई मिशन चलाने की योजना बनाई गई थी।
गोवा पहुँचते ही जेवियर ने सबसे पहले बच्चों और गरीब तबके को निशाना बनाकर ईसाई का प्रचार शुरू किया। 1542 से 1545 के बीच उसने तटीय इलाकों, खासकर फिशरमैन समुदाय में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण अभियान चलाया। कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि पुर्तगाली शासन के दबाव और लालच में आकर स्थानीय हिंदू लोगों को अपना धर्म छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
1545 के बाद जेवियर ने गोवा को अपना बेस बनाकर मिशन को और फैलाया। उसने बार-बार पुर्तगाल के शासकों को पत्र लिखकर यहाँ ” कड़े धार्मिक कानून’ लागू करने की माँग की, ताकि जो लोग धर्मांतरण नहीं कर रहें उन पर दबाव बनाया जा सके। यही वह दौर था जब गोवा में संगठित तरीके से धर्मांतरण की प्रक्रिया तेज हुई और चर्च का प्रभाव लगातार बढ़ता चला गया।
‘सेंट’ जेवियर की हिंदू-घृणा और हिंदुओं पर अत्याचार
‘सेंट’ जेवियर पर मौजूदा लेख बताते हैं कि उन्हें हिंदू से इतनी घृणा थी कि वह उन्हें विधर्मी, काफिर तक कहकर संबोधित करते थे। वहीं ब्राह्मणों से उन्हें इतनी दिक्कत थी कि उन्हें वो ‘धोखेबाज और झूठा’ बताकर पेश करते थे ताकि समाज का विश्वास उनपर से उठ जाए। इसके अलावा वो ईसाई धर्म में लोगों को लाने के लिए ईसाई धर्म की खूबियों के अलावा ये बताते थे कि कैसे हिंदू और उनके देवी-देवता बुरे होते हैं।
फ्रांसिस के बारे में कहा जाता है कि उनके होते हुए गोवा में इतनी तेजी से धर्मांतरण की रफ्तार बढ़ी थी कि वो कई बार पूरे के पूरे गाँव को ईसाई बनवा देते थे। फिर हिंदू बच्चों को मंदिर में ले जाते थे और उनसे देवी-देवताओं को गाली देने को कहते थे, मूर्तियाँ तोड़ने, उनपर थूकने और उन्हें रौंदने के लिए कहते थे। साथ ही उन कलाकारों को भी धमकी दी जाती थी जो मूर्तियाँ बनाने का काम करते थे।
‘सेंट’ फ्रांसिस जेवियर ने गोवा पर जब पूरा कब्जा किया तो गैर इसाइयों के लिए स्थिति और बद्तर हो गई क्योंकि तब सत्ता ईसाई पादरियों के हाथ आ गई और हिंदू विरोधी कानून बनने शरू हुए। धर्मांतरण के लिए नृशंस यातनाएँ दी जाने लगी। हिंदू माता पिता के सामने बच्चों के अंग काटे जाने लगे। वहीं जो धर्मांतरण के लिए नहीं मानता था उसे सूली पर लटकाकर जलाना शुरू कर दिया गया।
इस तरह जेवियर के काल में धर्मांतरण को अंजाम दिया गया और आगे चल कर जब इतिहासकारों ने इस सच्चाई को लिखना चाहा तो उन्हें भी असहनीय यातनाएँ दी गईं। गोवा में एक ‘हाथकाटरो’ खंभ भी है। बताया जाता है कि ये हिंदुओं पर पुर्तगाली शासकों के बर्बरता का जीवंत साक्ष्य है। ईसाइयों द्वारा हिंदुओं को इससे बाँधकर उनके अंगों को तोड़ा जाता था।
अब ‘सेंट’ जेवियर का काल बीते कई सदी हो चुकी हैं। आज ईसाई समुदाय जो हमें उनके बारे में बताता है हम उसी को जानते हैं लेकिन अगर लोगों की सुनी सुनाई बातों से हटकर खुद समझना चाहते हैं कि ‘सेंट’ जेवियर हिंदुओं के लिए सोच क्या रखते थे तो एक पत्र में लिखी बात पढ़िए जो उन्होंने 1545 में कोचीन से लिखी थी।


