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कश्मीर के जिस मदरसे से तालीम लेकर निकल रहे थे बड़े-बड़े आतंकी, उस पर लगा ताला: जानिए ‘सिराज-उल-उलूम’ का पुलवामा हमले से कैसे था कनेक्शन

जम्मू-कश्मीर के शोपियां में जमात-ए-इस्लामी के 'दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम' मदरसे पर आतंकी गतिविधियों के चलते ताला लगा दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर के इमाम साहिब शोपियां स्थित राज्य के सबसे बड़ा मदरसा ‘दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम’ पर आतंकी गतिविधियों के चलते ताला लग गया है। मदरसे को प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी ने खड़ा किया था, जिससे कई आतंकी निकले थे। पुलवामा हमले का आतंकी सज्जाद अहमद भट ने भी इसी मदरसे से तालीम ली थी।

मदरसे पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने गैर कानूनी गतिविधियों के चलते UAPA एक्ट, 1967 के तहत कारवाई की है। प्रशासन का कहना है कि मदरसे से आतंकी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए फंडिंग की जा रही थी। प्रशासन को मदरसे की फंडिंग और खर्च में बड़ा अंतर मिला, जिसके कारण मदरसे को सील कर दिया गया।

वहीं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की चीफ महबूबा मुफ्ती ने मदरसे पर सील लगाने को लेकर विरोध किया है। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर महबूबा मुफ्ती ने लिखा, “दारुल उलूम जामिया सिराज उल उलूम को UAPA के तहत गैरकानूनी संगठन घोषित करना बेहद अन्यायपूर्ण फैसला है। इस संस्थान ने ऐसे कई डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर तैयार किए हैं, जिन्होंने देश की ईमानदारी और समर्पण के साथ सेवा की है।”

15 एकड़ की जमीन पर फैला मदरसा 25 साल पुराना

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम नाम से यह मदरसा लगभग 25 साल पुराना है, जिसे जमात-ए-इस्लामी ने विदेशी फंडिंग जुटाकर खड़ा किया था। यह मदरसा 15 एकड़ की जमीन पर फैला हुआ है और इसके साथ 5 एकड़ का एक बाग भी है। मदरसे को सील करने से पहले इसमें लगभग 500 छात्र-छात्राएँ पढ़ते थे।

मदरसे पर आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप लगे। विभिन्न राष्ट्रीय जाँच एजेंसियों ने इन आरोपों की जाँच की तो सही पाया। मदरसे के कई मौलवियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। अब मदरसे में ताला लगा हुआ है। मदरसे के दरवाजे पर सील के पोस्टर लगे हैं और बाहर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती है।

मदरसे से तालीम लेकर निकला पुलवामा का आतंकी सज्जाद भट्ट

मदरसे को सील करने की वजह इसके आतंकी गतिविधियों से जुड़ा होना है। ये वही मदरसा है जहाँ से 2019 के पुलवामा आतंकी हमले का आरोपित सज्जाद भट ने भी तालीम ली थी, इस हमले में CRPF के 40 जवानों ने बलिदान दिया था।

फिर जब इस हमले की जाँच हुई, तो मदरसे ने खुद कबूला कि इस मदरसे से 11 छात्र आतंकी बने हैं। इनमें PhD आतंकी के नाम से कुख्यात मोहम्मद शफी बट और कुख्यात आदिल अहमद भी शामिल थे। हालाँकि, ये सभी एनकाउंटर में मारे गए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस मदरसे के अधिकतर छात्र पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे।

मदरसे के मौलवी भी निकले आतंकी और OGW

इतना ही नहीं इस मदरसे से आतंकी की मदद करने वाले ओवर ग्राउंड वर्कर यानी OGW भी निकले हैं। साल 2020 में ही जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शोपियां से 3 ओवर ग्राउंड वर्कर गिरफ्तार किए थे। तब पूछताछ में सामने आया था कि ये तीनों जमात-ए-इस्लामी के लिए काम करते थे और शोपियां के इसी मदरसे से पढ़कर निकले थे।

इस मदरसे के न सिर्फ छात्र बल्कि पढ़ाने वाले मौलवी भी आतंकी गतिविधियों में शामिल रह चुके हैं। इसी मदरसे में पढ़ाने वाला शौकत अहमद शेख LeT से जुड़ा था और लश्कर के लिए आतंकियों की भर्ती करता था। शौकत को NIA ने गिरफ्तार किया था। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, शौकत ने 20 छात्रों का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी बनाया था।

मदरसे पर कार्रवाई

आतंकी गतिविधियों में लिप्त मदरसे पर कश्मीर के मंडलायुक्त अंशुल गर्ग ने UAPA अधिनियम की धारा 8(1) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इसे प्रतिबंधित संस्थान घोषित किया है। उन्होंने यह कार्रवाई शोपियां के SSP द्वारा जारी किए गए डोजियर और मदरसे पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के साक्ष्यों के आधार पर की है।

SSP के डोजियर में साफ कहा गया कि मदरसा बाहर से मजहबी तालीम की जगह लगता है। लेकिन इसके कामकाज और पैसों के हिसाब में बड़ी गड़बड़ियाँ हैं। यह कई गैरकानूनी कामों में भी शामिल है। इसका रजिस्ट्रेशन नहीं है। इसने सरकारी जमीन पर कब्जा भी किया है। और कानून से बचने के लिए यह तरह-तरह के तरीके अपनाता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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