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NEET पेपर लीक की पूरी पड़ताल: ₹5 लाख तक में बिके 600 नंबर वाले ‘गेस पेपर’, जानें- डॉक्टर-कोचिंग सेंटर-एन्क्रिप्टेड ऐप्स का रोल और कैसे काम करता था सिंडिकेट

गेस पेपर व्हाट्स एप पर तेजी से वायरल हुआ। परीक्षा से एक दिन पहले हाथ से लिखा गया 'गेस पेपर' छात्रों को दिया गया। इसके 140-150 सवाल हुबहू नीट के प्रश्नपत्र से मैच कर गए। जानकारी के मुताबिक बायोलॉजी के सभी 90 सवाल और रसायन विज्ञान के करीब 45 सवाल इस गेस पेपर में मौजूद थे।

नीट 2026 की परीक्षा पेपर लीक की वजह से रद्द कर दी गई। नया डेट जल्द ही NTA घोषित करेगा। ‘गेस पेपर’ के रूप में लीक हुए करीब 600 अंक से सवालों की जाँच राजस्थान, बिहार, केरल समेत कई जगहों पर की जा रही है। सवाल ये है कि वास्तव में ये गेस पेपर था या नीट 2026 के प्रश्नपत्र में बड़ा हिस्सा, जिससे रिजल्ट के वारे- न्यारे हो जाने थे।

‘गेस पेपर’ के रूप में लीक हुआ प्रश्नपत्र

गेस पेपर के रूप में प्रश्नपत्र लीक किया गया। गेस पेपर व्हाट्स एप पर तेजी से वायरल हुआ। परीक्षा से एक दिन पहले हाथ से लिखा गया ‘गेस पेपर’ छात्रों को दिया गया। इसके 140-150 सवाल हुबहू नीट के प्रश्नपत्र से मैच कर गए। जानकारी के मुताबिक बायोलॉजी के सभी 90 सवाल और रसायन विज्ञान के करीब 45 सवाल इस गेस पेपर में मौजूद थे। नीट की परीक्षा में 180 सवाल पूछे जाते हैं और एक ही पेपर होता है। ये पेपर 720 नंबर का होता है। ऐसे में ‘गेस पेपर’ से करीब 600 नंबर के सवाल एकदम एक जैसे थे। यहाँ तक कि उत्तर के विकल्प का क्रम भी समान था।

ये गेस पेपर दो दिन पहले ही राजस्थान के सीकर के छात्रों तक पहुँच गए।

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप के एडिशनल डायरेक्टर जनरल विशाल बंसल के मुताबिक, NEET के ‘गेस पेपर’ में करीब 410 सवाल हैं। इनमें से 120 सवाल परीक्षा में पूछे गए थे। बताया जा रहा है कि ये ‘गेस पेपर’ स्टूडेंट्स के बीच काफी पहले से सर्कुलेट होने लगा था। 3 मई की परीक्षा से करीब 15 दिन या महीने भर पहले छात्र-छात्राओं को ये गेस पेपर मिलना शुरू हो गया था।

इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि गेस पेपर परीक्षा से दो दिन पहले 5-5 लाख रुपए में बिके, लेकिन परीक्षा से एक रात पहले इसे 50-50 हजार में बेचा गया, ताकि अधिक से अधिक पैसे कमाए जा सकें। इस मामले में पुलिस ने जिन लोगों ने हिरासत में लिया, उनके मोबाइल पर ये मैसेज ‘फॉर्वडेड मेनी टाइम्स’ दिख रहा है अर्थात इस मैसेज को कई बार ‘सेंड’ किया गया।

राजस्थान पुलिस ये भी पता लगा रही है कि क्या इस गेस पेपर के आधार पर कोई चीटिंग या क्रिमिनल एक्टिविटी हुई है।

केरल से जुड़ा कनेक्शन

इंडिया टुडे के मुताबिक, गेस पेपर का लिंक राजस्थान के चूरू से गए एक छात्र से जुड़ा है, जो केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। उसने 1 मई को अपने दोस्त को ये गेस पेपर भेजे थे। केरल के एमबीबीएस छात्र को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उससे पूछताछ की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक उसके दोस्त ने इसे पीजी संचालक को दिया और वहाँ रहने वाले छात्रों, करियर काउंसलर से होते हुए दूसरे जगहों के स्टुडेंट्स तक पहुँचा। इसको लेकर पीजी संचालक भी जाँच एजेंसियों के रडार पर है। हालाँकि परीक्षा के बाद इसी ने सीकर के उद्योग नगर पुलिस थाने में जाकर पेपर लीक की शिकायत की और NTA को भी जानकारी दी।

जाँच में सामने आया है कि उसे पेपर परीक्षा से पहले मिल चुका था और उसने स्टूडेंट्स को आगे बढ़ाया। बताया जा रहा है कि पकड़े जाने के डर से उसने पुलिस को जानकारी दी।

जाँच कर रही पुलिस की टीम ने सीकर के कई कोचिंग सेंटर्स के मालिकों से पूछताछ की है। इसमें लिंक का पता चला और जयपुर के कई कोचिंग सेंटर्स में जाँच के बाद जाँच टीम गुरुग्राम पहुँची।

एसओजी की जाँच में पता चला है कि मनचाहे रेट पर पेपर बाँटा गया। यह नासिक, सीकर- जयपुर, केरल, देहरादून, गुरुग्राम, बिहार, जम्मू कश्मीर तक पहुँचा। अब इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी गई है।

गुरुग्राम का नाम अहम ट्रांजिट पॉइंट के रूप में सामने आया है। जाँच रिपोर्ट के मुताबिक, नासिक की एक प्रिंटिंग प्रेस से पेपर की फिजिकल कॉपी लीक हुई थी, जिसे गुरुग्राम लाया गया था। ये पेपर गुरुग्राम के एक डॉक्टर को भी दी गई। इसके डुब्लीकेट कॉपी सेट तैयार किए गए।

जाँच के दौरान पुलिस ने दिल्ली के महिपालपुर से किर्गिस्तान से एमबीबीएस कर आए डॉक्टर अखलाक अहमद को गिरफ्तार किया है । उसकी भूमिका को लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। उसके अलावा दो अन्य लोगों को भी पुलिस ने पकड़ा है।

ये बात भी सामने आ रही है कि गेस पेपर का फैलाव सिर्फ व्हाट्स एप के जरिए ही नहीं हुआ, बल्कि एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्स पर भी इसे शेयर किए गए। बताया जा रहा है कि ‘गेस पेपर’ का प्रिंट आउट निकालकर ऑफलाइन भी स्टूडेंट्स को दिया गया।

अब सवाल यह उठता है कि यह नेटवर्क कहाँ तक फैला हुआ है और इसका मास्टरमाइंड कौन है?

पेपर लीक पर बनी कमेटी की सुझाव

2024 में हुए नीट पेपर लीक को लेकर केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी में AIIMS के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, हैदराबाद यूनिर्वसिटी के कुलपति बीजे राव, IIT मद्रास के प्रोफेसर पंकज बंसल, IIT दिल्ली के प्रोफेसर अदित्य मित्तल और शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोविन्द जैसवाल शामिल थे।

कमेटी ने 101 सिफारिशों की लिस्ट सौंपी थी। इसमें एनटीए का पुनर्गठन करने और इसकी तीन उप समितियाँ बनाने को कहा था। NTA की क्षमता बढ़ाने की सिफारिश की थी। दूसरी परीक्षाओं से दूरी बनाए रखने को कहा था।

चुनाव की तरह परीक्षा कराने को गया था। इसके लिए बायोमैट्रिक के इस्तेमाल की बात कही गई थी। पूरे प्रशासनिक तंत्र को इसमें शामिल होने की सिफारिश की गई थी। परीक्षा केन्द्रों को जिला प्रशासन और पुलिस की निगरानी में सील करने को कहा गया था।

सरकारी स्कूलों, नवोदय या केन्द्रीय विद्यालयों को नीट परीक्षा केन्द्र बनाने की सिफारिश की गई थी। स्कूलों में डिजिटल बुनियादी ढाँचा विकसित करने पर जोर दिया गया था। परीक्षा को हाईब्रिड मोड में कराने को कहा था ताकि कम्प्यूटर के साथ पेन-पेपर पर भी परीक्षा हो। जेईई की परीक्षा की तरह दो चरणों में परीक्षा कराने का भी सुझाव दिया गया था।

पेपर लीक ‘गंभीर अपराध’ की श्रेणी में शामिल

प्रश्नपत्र या उत्तर लीक होना गंभीर अपराध है। परीक्षा खत्म होने के बाद OMR शीट बदलना, नंबर बढ़ाने के लिए डेटा बदलना या उत्तर पुस्तिका से छेड़छाड़ करना भी कानून के तहत दंडनीय अपराध है। किसी के बदले पेपर देने वाला या बाहर से उत्तर उपलब्ध करानेवाला भी अपराधी माना जाएगा।

फर्जी वेबसाइट बना कर प्रश्नपत्र या उत्तर डालना, नकली परीक्षा पोर्टल बनाना या कम्प्यूटर सिस्टम हैक करना साइबर अपराध है। सिंडिकेट या गैंग बनाकर परीक्षा में धांधली करवाने को संगठित अपराध माना जाएगा। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी, तकनीक देने वाली कंपनी या परीक्षा केन्द्र पर धाँधली के आरोप लगने पर कार्रवाई की बात कही गई है।

पैसे के लिए किसी भी गोपनीय जानकारी लीक करना अपराध की श्रेणी में आएगा। परीक्षा केन्द्र में घुसना, अधिकारियों को धमकाना गुनाह है। सरकार के तय सुरक्षा मानकों को नहीं बदला जा सकता। इसके खिलाफ काम करने पर कार्रवाई हो सकती है।

कानून में साफ तौर पर छात्र-छात्राओं और नकल कराने वाले गिरोह या व्यक्ति के बीच अंतर किया गया है। साधारण छात्र पर अलग स्थिति हो सकती है, लेकिन पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़े लोग कठोर दंड के दायरे में आएँगे।

दोषियों को कितनी मिलेगी सजा

अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक, OMR छेड़छाड़ या परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे 3- 5 साल तक जेल हो सकती है। साथ ही उस पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अगर कोई गिरोह, गैंग या सिंडिकेट परीक्षा धाँधली में शामिल पाया जाता है तो उसे 5 साल से 10 साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही कम से कम 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लग सकता है।

अगर परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी या एजेंसी दोषी है तो उसे 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। 4 साल तक परीक्षा कराने पर रोक के साथ-साथ परीक्षा का पूरा खर्च भी वसूला जा सकता है।

अगर किसी कंपनी का निदेशक, मैनेजर या अधिकारी पेपर लीक में शामिल है, तो उसे 3 – 10 साल तक की जेल के साथ-साथ 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना देना पड़ सकता है।

वहीं अगर संगठित अपराध साबित हो जाता है, तो आरोपियों की संपत्ति जब्त भी की जा सकती है। यह कानून देश की लगभग सभी बड़ी केंद्रीय परीक्षाओं पर लागू होता है। इनमें UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग, NEET, JEE, CUET, NET समेत दूसरी परीक्षाएँ शामिल हैं।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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