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UP के मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण पर सख्त योगी सरकार, बनेंगे विशेष निगरानी सेल: जानें- इनका काम और कैसे कॉलेजों में चलता है मुस्लिम बनाने का खेल

KGMU और SGPGI में धर्मांतरण और लव जिहाद को लेकर यूपी के राज्यपाल ने सेल बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके माध्यम से मेडिकल कॉलेज के कैंपस में हर तरह की गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। छात्रों और कर्मचारियों को धर्मांतरण और लव जिहाद को लेकर जागरूक किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों, जैसे- लखनऊ के केजीएमयू, सीजीपीजीआई में हाल में सामने आए धर्मांतरण के मामलों को देखते हुए योगी सरकार इस पर अंकुश लगाने के लिए एक सेल बनाने जा रही है। इससे पहले राज्य भर में जबरन धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ को रोकने के लिए योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म समपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक लागू किया था, जिसके तहत दोषियों को 20 साल तक की कैद या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

अब राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मेडिकल कॉलेजों में धर्मांतरण और लव जिहाद के मामले की गंभीरता को समझते हुए चिकित्सा संस्थानों में धर्मांतरण रोकथाम के लिए विशेष निगरानी सेल बनाने के निर्देश दिए है। कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर एम बोबड़े की ओर से विश्वविद्यालय को पत्र भेज कर जरूरी कदम उठाने को कहा है।

क्या है धर्मांतरण रोकथाम निगरानी सेल

केजीएमयू के बाद लखनऊ पीजीआई से लव जिहाद का मामला सामने आने से हड़कप मच गया। यहाँ एक लड़की पिछले कई दिनों से लापता है। इसको देखते हुए राज्यपाल ने निगरानी सेल बनाने के निर्देश दिए। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी से जुड़े सभी उत्तर प्रदेश के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में ऐसे सेल का निर्माण किया जा रहा है, जो धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों को रोकेगा।

कैसे काम करेगा सेल

  • सेल छात्रो, डॉक्टरों और कॉलेज के कर्मचारियों को धर्मांतरण को लेकर जागरूक करेगा।
  • किसी भी तरह के संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखेगा।
  • छात्रों और कर्मचारियों को नियमों, अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
  • समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि सभी अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सचेत रहें।
  • किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर उसे कॉलेज दबाएगा नहीं, बल्कि मामले के तह तक जाकर नियमानुसार एक्शन लेगा।
  • विश्वविद्यालय प्रशासन का उद्देश्य है कि शैक्षणिक संस्थानों में स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण बना रहे, इसलिए सेल का निर्माण किया जा रहा है।

धर्मांतरण से जुड़ी एक के बाद एक कई मामले सामने आने के बाद छात्र-छात्राओं समेत संस्थान के तमाम लोगों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। जाँच में ये पता चला कि संस्थानों के हॉस्टल और मेडिकल कॉलेज परिसर में धर्मांतरण गिरोह सक्रिय है, जो जूनियर छात्रों, डॉक्टरों, नर्सिंग के छात्र, डॉक्टरों और कर्मचारियों को निशाना बना रहा है। सेल के माध्यम से इन गिरोहों पर लगाम कसी जाएगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी कॉलेजों को जल्द सेल गठित करने और उसकी सूचना विश्वविद्यालय को देने को कहा है। धर्मांतरण को लेकर किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर नियम के मुताबिक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। इसको लेकर सतर्कता बढ़ाने के लिए कहा गया है।

एसजीपीजीआई में ‘लव जिहाद’ का मामला

एसजीपीजीआई परिसर में रहने वाले एक हिन्दू परिवार की 21 साल की बेटी अचानक 26 मई 2026 को लापता हो गई। परिवार के संपर्क में रहने वाले इरशाद अली पर परिवार ने धर्मांतरण करने और उसे सीरिया भेजने का आरोप लगा रहा है। इरशाद अली ने युवती को प्रेमजाल में फँसा कर परिवार से ‘दोस्ती’ कर ली थी।

वह लड़की को सीरिया ले जाने की बात कह रहा था। इरशाद अली को पीजीआई के डॉक्टर अजमल का समर्थन मिला हुआ था। डॉक्टर अजमल ने पीजीआई परिसर में मस्जिद बनवाया था। एक और मस्जिद उसने पहलगाम में बनवाया था। डॉक्टर अजमल के विदेश जाने पर फिलहाल रोक लगी हुई है। इस घटना ने पीजीआई में युवती को बहला फुसला कर सीरिया जैसे इस्लामिक देश भेजने, धर्मांतरण करने और उसमें संस्थान की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

केजीएमयू में धर्मांतरण मामला

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हिंदू महिला डॉक्टर के लव जिहाद का मामला हाल ही में सामने आया था। महिला डॉक्टर को प्रेम जाल में फँसाकर डॉ. रमीजुद्दीन ने उसका शोषण किया और उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाया। रमीजुद्दीन शादीशुदा था और उसने हिन्दू लड़की का धर्मांतरण करा कर उससे निकाह कर रखा था।

रमीजुद्दीन की बीवी ने ही हिन्दू महिला डॉक्टर को पूरी कहानी बताई थी। मामला सामने आने के बाद परत-दर-परत कट्टरपंथियों की साजिश का पता चला। इस धर्मांतरण का राजनीतिक गठजोड़ भी सामने आया और पता चला कि कैसे सपा-बसपा जैसे राजनीतिक दल सालों से इनलोगों के संरक्षक बने हुए थे। इस दौरान पता चला कि सिर्फ डॉक्टर रमीजुद्दीन ही नहीं उसका अब्बू सलीमुद्दीन भी 4 हिन्दू महिलाओं से निकाह कर रखा था और उन्हें इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया था।

आगरा मेडिकल कॉलेज में धर्मांतरण के मामले

डॉक्टर रमीजुद्दीन ने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई आगरा मेडिकल कॉलेज से की थी। 2012 में वहाँ इस्लामिक मेडिकोज मीट नाम से संगठन बनाया था। इसकी बैठकों में मौलाना छात्रों को बताते थे कि कैसे हिन्दू लड़कियों से नजदीकी बढ़ाकर इस्लाम कबूल करवाया जाए और निकाह करने के लिए मजबूर किया जाए।

इस्लामिक मेडिकोज नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप भी था जिसमें ये कट्टरपंथी जुड़े हुए थे। डॉक्टर रमीजुद्दीन की तरह की 4-5 डॉक्टर बस इस काम में ही लगे हुए थे। रमीजुद्दीन लड़कियों को सेक्स पॉवर दिखाने के लिए अमेरिका से गाँजा भी मँगवाता था और उसका सेवन करता था।

रमीजुद्दीन जब केजीएमयू आया तो उसक वक्त 4-5 मुस्लिम डॉक्टर कट्टरपंथी भगोड़ा जाकिर नाइक के संपर्क में थे। 2004 के आसपास केजीएमयू में इनका प्रभाव इतना था कि हिजाब पहनना और बकरदाढ़ी रखना आम हो गया। ये लोग हिन्दू लड़कियों को फँसाने लगे थे।

केजीएमयू और आगरा मेडिकल कॉलेज दोनों में ही इस्लामिक मेडिकोज मीट होती थी। यही वजह है कि हिन्दू लड़कियों को प्रेम जाल में फँसाने और धर्मातरण कराने का तरीका भी दोनों जगहों पर एक जैसा था।

वर्षों से चल रहा धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ का खेल

यह साफ नहीं है कि KGMU और आगरा के ये समूह आपस में जुड़े थे या अलग-अलग काम कर रहे थे। इतना जरूर है कि मेडिकल कॉलेजों में मौलानाओं का आना-जाना धीरे-धीरे सामान्य होता गया। बस्ती मेडिकल कॉलेज में पिछले एक साल से मौलाना आने लगे। बुलंदशहर मेडिकल कॉलेज में तो एक फर्स्ट-ईयर के HOD पर मेडिकल साइंस पढ़ाते समय हदीस के उदाहरण देने का आरोप लगा, जिसे बाद में साथी फैकल्टी ने समझाकर रोका।

बुलंदशहर में मुस्लिम छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण नमाज की व्यवस्था के लिए प्रिंसिपल पर दबाव भी बनाया गया। हालाँकि, विरोध के बाद यह संभव नहीं हो पाया। कुल मिलाकर, मौलानाओं की मौजूदगी अब कई मेडिकल कॉलेजों में आम हो गई है।

डॉ भूपेंद्र बताते हैं कि आज से करीब 10-15 साल पहले भी KGMU धर्मांतरण का बड़ा अड्डा बना हुआ था। उस समय सपा-बसपा की सरकारें थीं और आसपास की मस्जिदों से मौलाना अक्सर कैंपस में आते-जाते थे। बाद में योगी सरकार आने के बाद काफी समय तक हालात शांत रहे। पिछले कुछ सालों से यह गतिविधियाँ फिर से शुरू हो गई हैं।

रमीज का दिल्ली विस्फोट के अपराधी से संबंध

दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम विस्फोट के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए डॉ. परवेज अंसारी के साथ रमीज़ के संबंधों का भी खुलासा हुआ है। उन्होंने एसएन मेडिकल कॉलेज की छात्राओं का धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से एक नेटवर्क बनाया था। दोनों एक ही छात्रावास में साथ रहते थे और हिंदू लड़कियों को लुभाने की योजना बनाते थे। उन्होंने कई मौलवियों को मिलाकर एक समूह बनाया था। कॉलेज में दाखिला लेने वाली हर नई मुस्लिम छात्रा को उनके समूह में शामिल कर लिया जाता था।

मेडिकल के छात्र और जूनियर डॉक्टर सबसे पहले अपनी महिला सहपाठियों से धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से दोस्ती करते थे। वे उनकी हर हरकत पर बारीकी से नज़र रखते थे, व्याख्यान कक्ष से लेकर पुस्तकालय तक उनके साथ रहते थे। एक बार घनिष्ठता स्थापित हो जाने पर, वे लड़कियों के आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड करते थे और फिर उनका इस्तेमाल उन्हें इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए दबाव डालने के लिए करते थे। ऐसी खबरें हैं कि कई महिलाएँ और छात्राएँ इस साजिश का शिकार हुईं।

राज्यभर में जबरन धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ को रोकने के लिए योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म समपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक लागू किया था, जिसके तहत दोषियों को 20 साल तक की कैद या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है ।

ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म समपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक लागू किया है। लालच, धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने पर 3 से 10 साल की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। विदेशी फंडिंग या बड़े पैमाने पर अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 से 14 वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का नियम है।

शादी का झाँसा देकर, ब्लैकमेल कर या जबरन धर्म परिवर्तन कराने जैसे मामलों में 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। नए संशोधनों के अनुसार, अब किसी भी व्यक्ति को पीड़ित होने पर या अवैध धर्मांतरण की सूचना देने पर FIR दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है। ऐसे मामलों में जमानत पर भी सख्ती बरती गई है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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