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Opindia Exclusive: सपा ने बनाया KGMU को लव जिहाद-इस्लामी धर्मांतरण का ‘मरकज’, लाल किला ब्लास्ट में गिरफ्तार डॉक्टर परवेज से लेकर जाकिर नाइक तक से कनेक्शन

लव जिहादी रमीजुद्दीन की गिरफ्तारी उस साजिश की कड़ी मात्र है जिसकी जड़ों को सपा सरकार ने सींचा था। आगरा से लेकर लखनऊ के मेडिकल कॉलेज तक नेटवर्क बनाकर हिंदुओं को धर्मांतरित किया जा रहा था।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में यूँ तो शोध और बीमारियों का इलाज होता है लेकिन पिछले कुछ समय में इसमें फैल रहा इस्लामी कट्टरपंथ का कैंसर अब सामने आने लगा है। हिंदू महिला डॉक्टर को लव जिहाद में फँसाकर उसका डॉ. रमीजुद्दीन द्वारा उत्पीड़न किए जाने का मामले सामने आने के बाद परत-दर-परत कट्टरपंथियों की साजिश सामने आती गई। इस कहानी में महिलाओं के उत्पीड़न का दर्द है, रमीज जैसे कट्टरपंथियों की साजिश है और सपा-बसपा जैसे राजनीतिक दलों का संरक्षण भी है।

इस कहानी की जड़ें पीलीभीत से शुरू होती हैं। रमीजुद्दीन और उसके अब्बा सलीमुद्दीन मूल रूप से पीलीभीत के रहने वाले थे। बाद में सलीमुद्दीन, खटीमा जाकर बस गया और उसने अपना सरनेम ‘मलिक’ रख लिया। वहाँ जाकर उसने एक होम्योपैथिक मेडिकल स्टोर खोला और इसके जरिए ही महिलाओं से नजदीकियाँ बढ़ानी शुरू कीं। सलीमुद्दीन ने 4 हिंदू महिलाओं से निकाह किया और उन्हें मुस्लिम बनने पर मजबूर किया।

सूत्रों के मुताबिक, सलीमुद्दीन असल में पीलीभीत के एक काजी के संपर्क में था और देवबंद में आता-जाता रहा था। परिवार के भीतर मजबही कट्टरता बढ़ती चली गई और वही हिंदू घृणा उनके बेटे रमीजुद्दीन तक पहुँची। रमीजुद्दीन पढ़ाई में तेज था। उसका चयन 2012 में आगरा मेडिकल कॉलेज में हो गया। यहीं से कहानी एक नया मोड़ लेती है।

आगरा मेडिकल कॉलेज में ‘इस्लामिक मेडिकोज मीट’: धर्मांतरण का अड्डा

KGMU में डॉक्टर रहे भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि यह बात 2012 की है जब रमीज ने आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में MBBS में दाखिला लिया। तब तक प्रदेश में सपा की सरकार आ चुकी थी और कट्टरपंथी सोच रखने वाले लोगों का हौसला बढ़ गया था। आगरा मेडिकल कॉलेज में ‘इस्लामिक मेडिकोज मीट’ नाम से बैठके होने लगीं और इन बैठकों में मौलाना और सीनियर छात्र जूनियर्स को यह सिखाने लगे कि हिंदू लड़कियों से कैसे नजदीकी बढ़ाई जाए। इस्लामिक मेडिकोज नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप भी था जिसमें ये कट्टरपंथी जुड़े हुए थे।

डॉक्टर भूपेंद्र ने कहा, “उस कॉलेज में कई मुस्लिम डॉक्टरों ने हिंदू लड़कियों को प्रेम-जाल में फँसाया और बाद में उनका धर्म परिवर्तन कराया। रमीज के भी चार–पाँच करीबी मुस्लिम दोस्त थे, जो इसी सोच के साथ काम कर रहे थे। KGMU में उसका एक दोस्त पिछले एक साल से इसी तरह की गतिविधियों में लगा हुआ है।”

परिवार से भी उसे समर्थन मिलता था, अब्बा सलीमुद्दीन उसे धर्मांतरण के लिए लगातार प्रेरित करते थे। इतना ही नहीं रमीजुद्दीन लड़कियों को सेक्स पॉवर दिखाने के लिए सलीमुद्दीन के अनुमति से अमेरिकन गाँजा मँगवाता था। इसके बाद लड़कियों को अपनी सेक्स पॉवर को अल्लाह की नेमत बताता था।

KGMU का जाकिर नाइक कनेक्शन

अब आगरा से वापस लौटते हैं KGMU पर। डॉक्टर भूपेंद्र बताते हैं कि 2004 के आसपास KGMU में कुछ मेडिकल छात्र भगौड़े इस्लामी कट्टरपंथी डॉ. जाकिर नाइक के संपर्क में आ गए। धीरे-धीरे कैंपस के कुछ हिस्सों में बकरदाढ़ी रखना और हिजाब पहनना आम होने लगा। इसी दौर में जाकिर नाइक की विचारधारा से जुड़े कट्टरपंथी हिंदू लड़कियों को फँसाने लगे थे। बताया जाता है कि इसमें BDS के छात्र ज्यादा सक्रिय थे।

डॉक्टर भूपेंद्र ने कहा, “सपा-बसपा के समय इन लोगों का हौसला बढ़ा। तीन-चार साल में यही छात्र सीनियर बने और खुद तकरीर करने लगे। यह गैंग 2011-12 तक सक्रिय रहा।” उसी समय आगरा में भी ‘इस्लामिक मेडिकोज मीट’ के नाम पर मुस्लिम मेडिकल छात्रों को इकट्ठा कर उनका ब्रेनवॉश किया जाने लगा। आगरा मेडिकल कॉलेज में मुस्लिम डॉक्टरों और हिंदू लड़कियों के निकाह का पैटर्न काफी ज्यादा दिखने लगा।

यह साफ नहीं है कि KGMU और आगरा के ये समूह आपस में जुड़े थे या अलग-अलग काम कर रहे थे। इतना जरूर है कि मेडिकल कॉलेजों में मौलानाओं का आना-जाना धीरे-धीरे सामान्य होता गया। बस्ती मेडिकल कॉलेज में पिछले एक साल से मौलाना आने लगे। बुलंदशहर मेडिकल कॉलेज में तो एक फर्स्ट-ईयर के HOD पर मेडिकल साइंस पढ़ाते समय हदीस के उदाहरण देने का आरोप लगा, जिसे बाद में साथी फैकल्टी ने समझाकर रोका।

बुलंदशहर में मुस्लिम छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण नमाज की व्यवस्था के लिए प्रिंसिपल पर दबाव भी बनाया गया। हालाँकि, विरोध के बाद यह संभव नहीं हो पाया। कुल मिलाकर, मौलानाओं की मौजूदगी अब कई मेडिकल कॉलेजों में आम हो गई है।

सूत्र बताते हैं कि एक पूर्व मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल जो अब पूर्वांचल के एक कॉलेज की प्राचार्य हैं अपने एक मुस्लिम छात्र के साथ लिव-इन में रह रही हैं। उन्होंने अपने पति से तलाक लेने का फैसला किया है और मामला कोर्ट में है।

वर्षों से KGMU में चल रहा धर्मांतरण और लव जिहाद का खेल

डॉ भूपेंद्र बताते हैं कि आज से करीब 10-15 साल पहले भी KGMU धर्मांतरण का बड़ा अड्डा बना हुआ था। उस समय सपा-बसपा की सरकारें थीं और आसपास की मस्जिदों से मौलाना अक्सर कैंपस में आते-जाते थे। बाद में योगी सरकार आने के बाद काफी समय तक हालात शांत रहे। पिछले कुछ सालों से यह गतिविधियाँ फिर से शुरू हो गई हैं।

वे बताते हैं कि कुछ मुस्लिम नर्सें योजनाबद्ध तरीके से हिंदू नर्सों और मुस्लिम स्टाफ के बीच दोस्ती करवाती हैं। धीरे-धीरे बात शारीरिक संबंधों तक पहुँचाई जाती है और फिर धर्म परिवर्तन की दिशा में दबाव बनाया जाता है। KGMU के गाँधी वार्ड में नर्सिंग स्टाफ की एक महिला का धर्मांतरण कराकर निकाह कराया गया। एक अन्य मामले में धर्मांतरण हो चुका है और निकाह की तैयारी बताई जा रही है।

इसी तरह माइक्रोबायोलॉजी विभाग में भी एक संविदाकर्मी महिला को एक अधेड़ मुस्लिम कर्मचारी द्वारा अपने प्रभाव में लेने की कोशिश का आरोप सामने आया है। बताया जाता है कि रमीज के गैंग से जुड़े लोग भी ऐसी ही गतिविधियों में शामिल हैं।

हाल ही में, KGMU का एक इंटर्न डॉक्टर मोहम्मद आदिल पर नर्सिंग छात्रा से के बलात्कार का आरोप लगा। इससे पहले उसके कई संबंध हिंदू लड़कियों के साथ थे। बाद में उसने उन्हें छोड़ दिया और एक बेहद कम उम्र की मुस्लिम नर्सिंग छात्रा के करीब चला गया। उसने अपनी एक मुस्लिम महिला मित्र से कहा कि हिंदू लड़कियों के साथ उसके पुराने रिश्तों को गलत नहीं समझना चाहिए क्योंकि उसके मुताबिक यह ‘अच्छा काम’ था।

सिर्फ छात्र नहीं, VC से प्रोफेसर तक: KGMU में कट्टरपंथ के कई चेहरे

यह मामला सिर्फ छात्रों या जूनियर डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। आरोप है कि KGMU में नीचे से ऊपर तक यानी VC से लेकर प्रोफेसर स्तर तक इस कट्टर सोच का असर दिखता रहा है। किस तरह पीड़ितों पर भी ये कट्टरपंथी दबाव बनाते हैं, डॉ. रमीज का मामला उसका एक उदाहरण है।

जब डॉ. रमीज का मामला तब सामने आया तब पीड़िता के पिता उसी दिन विभागाध्यक्ष सुरेश बाबू के पास पहुँचे जिस दिन उनकी बेटी ने आत्महत्या की कोशिश की थी। लेकिन आरोप है कि विभाग की दो कट्टर फैकल्टी डॉ. सुमायरा कयूम और डॉ. वाहिद अली ने फैकल्टी मीटिंग में विभागाध्यक्ष सुरेश बाबू पर दबाव बना दिया। इसके बाद सुरेश बाबू ने फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों से कह दिया कि लड़की मानसिक रूप से अस्थिर है और लड़का अच्छा है।

इतना ही नहीं रेजिडेंट डॉक्टरों पर यह लिखने का दबाव डाला गया कि लड़की ठीक नहीं है। हालाँकि, रेजिडेंट डॉक्टरों ने ऐसा लिखने से इनकार कर दिया। पीड़िता के पिता ने बेहद दयनीय हालत में बस इतना कहा कि वह नहीं चाहते कि वह लड़का उनकी बेटी के सामने आए। उन्होंने चीफ प्रॉक्टर से भी मुलाकात की लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

आरोप है कि सुमायरा कयूम और वाहिद अली सीधे तौर पर छात्र को बचाने की कोशिश कर रहे थे जबकि पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन मामले को टालता रहा। बाद में जब हिंदू संगठनों का दबाव बढ़ा तब जाकर कुलपति ने अपने भरोसेमंद लोगों की एक समिति बना दी।

इसी तरह प्रशासन पर भी गंभीर सवाल हैं। आरोप है कि KGMU के वीसी सोनिया नित्यानंद ने नियमों को दरकिनार कर एक मुस्लिम संविदाकर्मी को अपना सलाहकार बना लिया और उसे गलत तरीके से स्थायी पद व पेंशन तक दिलवा दी। कहा जाता है कि यही सलाहकार वीसी कार्यालय में बैठकर मुस्लिम कर्मचारियों को संरक्षण देता है।

बताते हैं कि क्रिटिकल केयर विभाग में भी सपा सरकार के समय बड़ी संख्या में मुस्लिम फैकल्टी की नियुक्ति कर ली गई। कहा जाता है कि विभाग में रोज कोई न कोई नियम तोड़ा जाता है। जब हिंदू विभागाध्यक्ष (HOD) शिकायत के पत्र कुलपति कार्यालय भेजते हैं, तो आरोप है कि वही सलाहकार उन पत्रों को कूड़े में फेंक देता है।

बीजेपी के प्रवक्ता और वकील प्रशांत उमराव ने भी KGMU के VC ऑफिस के मुस्लिम समर्थक होने का दावा किया है। प्रशांत ने लिखा, “KGMU का वाइस चांसलर ऑफिस मुस्लिमों के समर्थन में लगा हुआ है। जिहाद के मामले हो या कट्टरपंथ के सबमें वाइस चांसलर ने ढीला ढाला रवैया अपनाया हुआ है।”

उन्होंने लिखा, “इसी तरह से यह भी सूचना आ रही है कि विश्वविद्यालय के क्रिटिकल केयर विभाग में कुछ कट्टरपंथी डॉक्टर बिना विश्वविद्यालय को सूचना दिए विदेश यात्रा कर आए तो कुछ मध्य एशिया के देशों में इंटरव्यू भी दे आए लेकिन जब हिंदू विभागाध्यक्ष ने कार्रवाई के लिए चिट्ठी लिखी तो उसे कूड़े के ढेर में डाल दिया गया और वाइस चांसलर ऑफिस ने इन लोगों पर विशेष दयादृष्टि बनाई।”

दिल्ली ब्लास्ट के आरोपित से लव जिहादी रमीज का कनेक्शन

डॉ रमीज के दिल्ली में लाल किले के बाहर हुए बम धमाके के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए डॉ. परवेज अंसारी से भी कनेक्शन सामने आया है। दोनों ने एसएन मेडिकल कॉलेज में मेडिकल कॉलेज में छात्राओं को फँसाकर धर्मांतरण का नेटवर्क बनाया था। ये दोनों जिहादी हॉस्टल में साथ रहते थे और दोनों ने साथ मिलकर हिंदू लड़कियों फँसाने का प्लान बनाया था। इन्होंने मिलकर ग्रुप बनाया था जिसमें कई मौलानाओं को भी जोड़ा गया था। जो भी नया मुस्लिम छात्र आता उसे ये लोग अपने ग्रुप में जोड़ लेते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले के बताया गया है कि धर्मांतरण के मकसद से मेडिकल छात्र और जूनियर डॉक्टर पहले अपनी साथी छात्राओं से दोस्ती करते थे। वे उनकी हर गतिविधि पर नजर रखते हुए लेक्चर थिएटर से लेकर लाइब्रेरी तक लगातार साथ रहते। धीरे-धीरे नजदीकियाँ बढ़ाने के बाद उनके आपत्तिजनक वीडियो बना लिए जाते और फिर इन्हीं के जरिए धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जाता। बताया जाता है कि इस तरीके से कई छात्राएँ उनके जाल में फँस गईं।

जब KGMU में बनी थी मजार

KGMU में सामने आया लव जिहाद का मामला कोई अपवाद नहीं है। यह संस्थान पहले भी कट्टरपंथ से जुड़े विवादों का केंद्र रहा है। बीते वर्ष अप्रैल में भी ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया था, जब परिसर में बनी एक अवैध मजार को हटाने की कार्रवाई हिंसा में बदल गई थी।

दरअसल, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के नेत्र विभाग के पीछे एक मजार बना दी गई थी, जिसके आसपास धीरे-धीरे अवैध बस्ती और पान-बीड़ी समेत कई अनधिकृत दुकानें खड़ी हो गईं। प्रशासन की ओर से इस अतिक्रमण को हटाने के लिए कई बार नोटिस जारी किए गए लेकिन अतिक्रमणकारियों ने परिसर खाली करने से इनकार कर दिया।

स्थिति तब और बिगड़ गई जब 26 अप्रैल 2025 को KGMU प्रशासन ने पुलिस बल के साथ मिलकर अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की। जैसे ही मजार को तोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ी, वहां मौजूद भीड़ ने अचानक पथराव शुरू कर दिया। हालात इतने बेकाबू हो गए कि हमलावरों ने एक डॉक्टर को भी पकड़ लिया, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

KGMU में इस तरह की घटनाएँ यह बताती हैं कि परिसर के भीतर अवैध अतिक्रमण और कट्टरपंथ से जुड़ी गतिविधियाँ समय-समय पर कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनती रही हैं, जिन्हें लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार दबाव में रही हैं।

साफ शब्दों में कहें तो KGMU की यह कहानी किसी एक आरोपित या एक घटना की नहीं है। यह सालों से चल रहे उस गंदे और संगठित खेल की परतें खोलती है, जिसमें लव जिहाद, धर्मांतरण, संस्थागत संरक्षण, राजनीतिक चुप्पी और राजनीतिक शह तक भी एक साथ दिखाई देती है। जिस मेडिकल यूनिवर्सिटी का काम लोगों की जान बचाना है अगर वही कट्टरपंथियों का अड्डा बनती जाए तो यह बल्कि समाज और देश के लिए गंभीर खतरा है। बार-बार सामने आए मामलों ने साफ कर दिया है कि यह समस्या ऊपरी नहीं बल्कि जड़ों तक फैली हुई है।

योगी प्रशासन इस पूरे मसले को लेकर गंभीर है और पुलिस जाँच में जुटी हुई है। आगे और भी नाम, चेहरे और कड़ियाँ सामने आएँगी। कट्टरपंथ के इस कैंसर की अगर समय रहते सर्जरी नहीं की गई तो यह पूरे सिस्टम को खोखला कर देगा। इसकी सर्जरी जितनी जल्दी और जितनी सख्त होगी, उतना ही उत्तर प्रदेश और देश की सेहत के लिए बेहतर होगा।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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