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रोजगार, रिकॉर्ड टूरिज्म और खुशहाल कश्मीर Vs अँधेरे में डूबा PoK: पढ़ें- 79 साल में LoC के पार कैसे ‘जहन्नुम’ बनी ‘जन्नत’, जहाँ आटे-दाल के लिए सड़कों पर खून बहा रहा पाकिस्तान

एक तरफ भारत का जम्मू-कश्मीर है, जहाँ केंद्र सरकार ने अरबों रुपए का बजट देकर विकास, रोजगार, आधुनिक शिक्षा और बुनियादी ढांचे की नदियाँ बहा दी हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान का अवैध कब्जा है, जहाँ सिर्फ बंदूक की गूँज, महँगाई का रोना, सेना का अत्याचार और जनता की चीखें सुनाई दे रही हैं।

कश्मीर की धरती पर आज दो बिल्कुल अलग और विरोधी तस्वीरें दुनिया के सामने हैं। नियंत्रण रेखा यानी LOC के एक तरफ भारत का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख है, जहाँ विकास, कनेक्टिविटी और शांति का एक नया दौर जारी है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला कश्मीर (Kashmir) यानी PoK है, जहाँ की जनता बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रही है और सड़कों पर खून बह रहा है।

भारत का कश्मीर जहाँ एशिया की सबसे बड़ी सुरंगों और रिकॉर्ड तोड़ पर्यटन के जरिए खुशहाली की नई इबारत लिख रहा है, वहीं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आटे, दाल और बिजली के संकट ने एक बहुत बड़े जन-आक्रोश और विद्रोह का रूप ले लिया है। इस पूरे हालात को समझने के लिए आजादी के बाद से लेकर आज तक की पूरी कहानी को जानना जरूरी है, जो यह साफ करती है कि कैसे भारत ने कश्मीर (Kashmir) में अपने नागरिकों को खुशहाली दी और पाकिस्तान ने सिर्फ तबाही और दमन का रास्ता चुना।

आजादी के बाद का इतिहास और पाकिस्तान के कब्जे की शुरुआत

साल 1947 में देश की आजादी के बाद जब भारत और पाकिस्तान का बँटवारा हुआ था, तब कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तुरंत बाद पाकिस्तानी फौज ने कबाइलियों के भेष में कश्मीर पर विश्वासघाती हमला कर दिया। भारतीय सेना ने बहादुरी से जवाब देते हुए दुश्मनों को खदेड़ना शुरू किया, लेकिन जब तक युद्ध विराम हुआ, तब तक पाकिस्तान ने कश्मीर (Kashmir) के एक बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया था। भारत के इस हिस्से को ही आज हम पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर यानी Pok कहते हैं।

पाकिस्तान ने इस पूरे क्षेत्र को चालाकी से 2 हिस्सों में बाँट दिया। एक हिस्से को वह खुद ‘आजाद जम्मू कश्मीर’ कहता है, जो दरअसल एक दिखावा है। इसके दूसरे और बड़े हिस्से को पाकिस्तान ने ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ के नाम पर अलग कर दिया। आजादी के बाद से ही भारत ने अपने नियंत्रण वाले कश्मीर (Kashmir) को गले लगाया और उसे देश की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार काम किया। दूसरी तरफ पाकिस्तान ने Pok के संसाधनों का जमकर दोहन किया, लेकिन वहाँ के नागरिकों को बुनियादी अधिकार और विकास से हमेशा महरूम रखा।

भारत के कश्मीर का सफर: आतंक के साए से बाहर आकर तरक्की की राह

भारत के जम्मू-कश्मीर ने दशकों तक सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद का दंश झेला है। पाकिस्तान ने हमेशा इस खूबसूरत घाटी में खून बहाने और इसे अस्थिर रखने की नापाक कोशिशें कीं। इसके बावजूद भारत सरकार और भारतीय सेना ने कभी भी कश्मीर (Kashmir) के लोगों का साथ नहीं छोड़ा। विपरीत परिस्थितियों में भी भारत ने घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया और आतंकवादियों का खात्मा करके शांति स्थापित करने में सफलता पाई। स्थानीय युवाओं को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए रोजगार और शिक्षा के अवसर दिए गए।

पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। घाटी में कभी आम बात बन चुकी पत्थरबाजी और महीनों तक रहने वाले बंद अब पूरी तरह बीती बात हो चुके हैं। सेना और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों को एक सुरक्षित माहौल दिया है। आतंकवाद की कमर टूटने के बाFद अब कश्मीर (Kashmir) घाटी के लोग बिना किसी डर के खुलकर सांस ले रहे हैं और व्यापार कर रहे हैं।

रिकॉर्ड तोड़ पर्यटन और आर्थिक खुशहाली का नया दौर

शांति स्थापित होने का सबसे बड़ा और सीधा फायदा जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र को मिला है। कश्मीर (Kashmir) घाटी की खूबसूरती को देखने के लिए अब हर साल देश और विदेश से रिकॉर्ड तोड़ संख्या में पर्यटक पहुँच रहे हैं। डल झील के शिकारे से लेकर गुलमर्ग के बर्फ से ढके पहाड़ों तक हर जगह पर्यटकों की भारी भीड़ देखी जा सकती है। पर्यटन में आई इस ऐतिहासिक तेजी ने स्थानीय होटल मालिकों, शिकारे वालों, टैक्सी ड्राइवरों और हस्तशिल्प के छोटे व्यापारियों की आमदनी को कई गुना बढ़ा दिया है।

सिर्फ पर्यटन ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की नई नीतियों के कारण जम्मू-कश्मीर में उद्योग, IT, कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है। आज कश्मीर का युवा बंदूक और पत्थर छोड़कर स्टार्टअप संस्कृति की तरफ बढ़ रहा है। सरकार की मदद से युवा अब नौकरी खोजने के बजाय खुद का नया कारोबार शुरू कर रहे हैं। दूरदराज के गाँवों तक बिजली, पक्की सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएँ और मजबूत डिजिटल नेटवर्क पहुँच चुका है, जिससे आम लोगों का जीवन स्तर बहुत बेहतर हुआ है।

इंफ्रास्ट्रक्चर का अजूबा: जोजिल सुरंग और वंदे भारत ट्रेन

भारत सरकार ने कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से हर मौसम में जोड़े रखने के लिए हजारों करोड़ रुपए की कई बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ शुरू की हैं। इसी कड़ी में लद्दाख को कश्मीर (Kashmir) घाटी से जोड़ने वाली सामरिक रूप से बेहद अहम ‘जोजिला सुरंग‘ का काम अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है। समुद्र तल से लगभग 11,578 फीट की भारी ऊँचाई पर बन रही यह 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग एशिया की सबसे लंबी दो दिशा वाली सड़क सुरंग होगी। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण लद्दाख का संपर्क देश से कट जाता था, लेकिन यह सुरंग बनने के बाद साल के 365 दिन सुरक्षित आवाजाही हो सकेगी।

इसके अलावा दुनिया का सबसे ऊँचा ‘चिनाब रेल पुल’ और जम्मू-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक जैसी अद्भुत परियोजनाएँ बनकर तैयार हो रही हैं। देश की सबसे आधुनिक ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेन अब सीधे कश्मीर (Kashmir) तक पहुँचने के लिए तैयार है। इन सड़कों और रेलवे नेटवर्क के बनने से न केवल आम जनता की यात्रा आसान हुई है, बल्कि सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों तक रसद और भारी सैन्य साजो-सामान पहुँचाना भी बेहद आसान और सुरक्षित हो गया है। कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान ने इसी रास्ते को रोकने की साजिश रची थी, लेकिन जोजिला सुरंग बनकर अब दुश्मन के खिलाफ एक अभेद्य ढाल बन चुकी है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले PoK का सच: आटे, दाल और बिजली के लिए तरसती आवाम

भारत के कश्मीर (Kashmir) की इस सुनहरी तस्वीर के ठीक उलट, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आज हालात पूरी तरह बेकाबू और खतरनाक हो चुके हैं। रावलकोट, मुजफ्फराबाद, मीरपुर और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे इलाकों में पिछले कई महीनों से भीषण विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। पाकिस्तान की भयंकर आर्थिक कंगाली की सबसे बड़ी मार Pok की आवाम (जनता) पर पड़ी है। वहाँ आटे और सब्सिडी वाले गेहूँ की भारी कमी हो गई है, जिससे लोग दाने-दाने को मोहताज हैं।

इसके साथ ही पाकिस्तान सरकार ने बिजली के बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है। स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात पर है कि Pok के पानी और संसाधनों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान बिजली बनाता है, लेकिन वहाँ के निवासियों को ही अँधेरे में रखकर महँगी बिजली बेची जाती है। इस भारी भेदभाव और आर्थिक शोषण के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

राजनीतिक दमन और ‘आजाद कश्मीर’ का सबसे बड़ा धोखा

Pok में जनता सिर्फ आर्थिक तंगी से ही परेशान नहीं है, बल्कि वे अपने राजनीतिक अधिकारों को कुचले जाने के खिलाफ भी लड़ रहे हैं। जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) नाम का स्थानीय संगठन इस पूरे जन-आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है। प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी माँग Pok विधानसभा में पाकिस्तान में रह रहे शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करने की है।

स्थानीय निवासियों का साफ आरोप है कि पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियाँ मुजफ्फराबाद में अपनी कठपुतली सरकार बनाने के लिए इन 12 सीटों का इस्तेमाल करती हैं। इन सीटों के जरिए बाहर के लोगों को लाकर चुनाव जिताया जाता है, जिससे असली स्थानीय कश्मीरियों का प्रतिनिधित्व और उनकी आवाज पूरी तरह दबा दी जाती है। जब भी वहाँ के लोग अपने इस हक के लिए आवाज उठाते हैं, तो पाकिस्तानी हुकूमत उन्हें देशद्रोही बताकर जेलों में ठूस देती है।

गिलगित-बाल्टिस्तान का जनसांख्यिकीय बदलाव और शिया उत्पीड़न

पाकिस्तान ने सिर्फ कश्मीरियों की आवाज ही नहीं दबाई, बल्कि गिलगित-बाल्टिस्तान के पूरे सामाजिक ताने-बाने को ही नष्ट कर दिया है। साल 1947 में जब पाकिस्तान ने इस इलाके पर कब्जा किया था, तब यहाँ शिया और इस्माइली मुसलमानों की आबादी लगभग 80 से 85 फीसदी हुआ करती थी। इन लोगों की अपनी एक अलग भाषा, संस्कृति और पहचान थी। ब्रिटिश काल से ही यहाँ ‘स्टेट सब्जेक्ट रूल’ लागू था, जिसके तहत कोई भी बाहरी व्यक्ति यहाँ जमीन नहीं खरीद सकता था और न ही बस सकता था।

लेकिन साल 1974 में पाकिस्तान की जुल्फिकार अली भुट्टो सरकार ने इस नियम को पूरी तरह खत्म कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों से बड़ी संख्या में सुन्नी मुसलमानों को लाकर यहाँ जबरन बसाया गया। इस साजिश के तहत स्थानीय शिया आबादी को अल्पसंख्यक बनाने की कोशिश की गई। सभी अच्छी सरकारी नौकरियाँ और जमीनें बाहरी लोगों को दे दी गईं, जिससे स्थानीय लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ गहरी नफरत और नाराजगी पैदा हो गई है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी फौज की बर्बरता और खूनी दमन

Pok में अपनी जायज माँगों को लेकर किया जा रहा जनता का शांतिपूर्ण आंदोलन तब हिंसक विद्रोह में बदल गया, जब पाकिस्तानी प्रशासन ने दमनकारी नीतियाँ अपनानी शुरू कर दीं। पाकिस्तान सरकार ने नागरिक अधिकारों की बात करने वाले संगठन जेएएसी (JAAC) को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत एक आतंकी संगठन घोषित कर दिया। पुलिस ने इस संगठन के दफ्तरों को सील कर दिया और 100 से ज्यादा नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।

तनाव तब और बढ़ गया जब पुलिस की गोलीबारी में एक स्थानीय व्यापारी और कार्यकर्ता शाहजेब हबीब की मौत हो गई। इस मौत के बाद जब रावलकोट के अस्पताल के बाहर हजारों लोग जमा हुए, तो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और पैरामिलिट्री फोर्स ने निहत्थे आम नागरिकों पर सीधे गोलियाँ और आंसू गैस के गोले दागे। इस सैन्य बर्बरता में अब तक 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 200 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। स्थिति को छिपाने के लिए पूरे Pok में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ बंद कर दी गई हैं और पर्यटकों को इलाका छोड़ने का हुक्म दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान बेनकाब

Pok में जारी इस कत्लेआम और मानवाधिकारों के हनन पर भारत सहित पूरी दुनिया ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में बर्बरता कर रहा है और अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए झूठी कहानियाँ गढ़ रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से माँग की है कि पाकिस्तान को इन गंभीर अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए।

वैश्विक मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस कार्रवाई को मानवाधिकारों का खतरनाक पतन बताया है। इसके अलावा, ब्रिटेन के 50 से ज्यादा सांसदों ने अपनी सरकार को पत्र लिखकर Pok में इंटरनेट बंदी और प्रदर्शनकारियों की मनमानी गिरफ्तारियों पर गहरी चिंता जताई है। दुनिया भर में रहने वाले कश्मीरी और मानवाधिकार कार्यकर्ता अब खुलकर पाकिस्तान के इस दोहरे रवैये की आलोचना कर रहे हैं, जो खुद को कश्मीरियों का हमदर्द बताता है लेकिन अपने कब्जे वाले कश्मीर (Kashmir) के लोगों पर गोलियाँ बरसाता है।

विकास बनाम विनाश का साफ अंतर

आज नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ का अंतर पूरी दुनिया के सामने बिल्कुल साफ हो चुका है। एक तरफ भारत का जम्मू-कश्मीर है, जहाँ केंद्र सरकार ने अरबों रुपए का बजट देकर विकास, रोजगार, आधुनिक शिक्षा और बुनियादी ढांचे की नदियाँ बहा दी हैं। यहाँ का नागरिक आज सुरक्षित महसूस करता है और देश के विकास में अपना योगदान दे रहा है।

दूसरी तरफ पाकिस्तान का अवैध कब्जा है, जहाँ सिर्फ बंदूक की गूँज, महँगाई का रोना, सेना का अत्याचार और जनता की चीखें सुनाई दे रही हैं। कश्मीर (Kashmir) की ये दो तस्वीरें गवाह हैं कि भारत जहाँ अपने लोगों को खुशहाली और तरक्की की राह पर ले जा रहा है, वहीं पाकिस्तान ने कश्मीर के सुंदर हिस्से को सिर्फ एक बदहाल और प्रताड़ित कॉलोनी बनाकर छोड़ दिया है।

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