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तुमसे ना हो पाएगा दिपके… तुम्हारे ‘लक्षण’ बिलकुल ठीक नहीं लग रहे ‘तिलचट्टों’

शुरुआत खराब होने के बाद, दूसरी बार तुम्हें लगा होगा कि अब शायद कुछ हो जाए लेकिन इस बार तो लोगों ने पूरी तरह ही साफ कर दिया कि भाई तुम जाओ वापस अमेरिका। वहीं, अपनी धंधा-पानी कुछ हो तो देखो।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तिलचट्टों ने शनिवार (20 जून 2026) को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर धरना दिया। इस प्रदर्शन को लेकर CJP की तरफ से खूब माहौल बनाया गया था, पर सब बेअसर रहा। धरना स्थल पर जितने तिलचट्टे जुटे उससे ज्यादा तो पत्रकार और सुरक्षाकर्मी मौजूद थे। यानी CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके, प्रदर्शन के नाम पर जो पटाखा फोड़ना चाहते थे, वो दूसरी बार भी फुस्स ही रहा।

अब भई, मरता क्या ना करता, तो अभिजीत दिपके भाई धमकी देने पर उतर आए हैं, लोगों को भड़काने पर उतर आएँ हैं। जिस दिल्ली पुलिस को शायद इस प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या से अब फर्क भी ना पड़ रहा हो उसके नाम पर दिपके माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बाकायदा वीडियो जारी कर रहे हैं कि दिल्ली पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने वाली है।

दिपके यहीं नहीं रुके, खुद को बड़का क्रांतिकारी समझ रहे दिपके लोगों से बोले की जेल भरो। अब भई तुम कोई गाँधी-जयप्रकाश-लोहिया थोड़े हो जो लोग तुम्हारी बात पर जेल भर देंगे। जो युवा तुम्हारे कहने पर घर से जंतर-मंतर तक नहीं आ रहे, तुम्हें लगता है कि वो तुम्हारे कहने पर जेल भर देंगे।

दिपके ने कहा, “मैं अभी जंतर-मंतर पर हूँ। पुलिस मुझे गिरफ्तार करने आ रही है। जितने भी इस देश के युवा इस वीडियो को देख रहे हैं। वो अपने-अपने जिलों में जेल भरो आंदोलन शुरू कर दीजिए। चाहे कुछ भी हो जाए, हमारा आंदोलन रुकना नहीं चाहिए। वो भी प्रदर्शन करेगा, वो शांतिपूर्ण तरीके से करेगा। मेरी आपसे गुजारिश हैं कि आप अब इस आंदोलन को आगे बढ़ाइए और शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाइए।”

दो बार में प्रदर्शन में यह साफ नजर आ गया है कि अभिजीत दिपके का यह सारा आंदोलन बस सोशल मीडिया के उस 22 मिलियन नंबर तक ही सीमित है, जो केवल एक तुक्का लगता है। पहली बार के प्रदर्शन में कुछ लोग मजमा समझकर आ गए थे कि भई देखें क्या हो रहा है। लेकिन उनके हाथ भी कुछ नहीं आया, हाँ बस कुछ लोगों को सोशल मीडिया का कॉन्टेंट मिल गया।

शुरुआत खराब होने के बाद, दूसरी बार तुम्हें लगा होगा कि अब शायद कुछ हो जाए लेकिन इस बार तो लोगों ने पूरी तरह ही साफ कर दिया कि भाई तुम जाओ वापस अमेरिका। वहीं, अपनी धंधा-पानी कुछ हो तो देखो। यहाँ नेता गिरी के चक्कर में पड़ोगे तो कुछ समय बाद यही गाते मिलोगे कि ‘न खुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम न इधर के हुए न उधर के हुए‘।

जितना तुम लोगों को भड़का रहे तो ये ध्यान रखना कि तुम्हारे आंदोलन की अर्थी को कंधा देने के लिए बेशक 4 लोग लगें लेकिन तुम्हें टाँगकर ले जाने के लिए दिल्ली पुलिस का एक जवान ही काफी होगा। और हाँ, अब जिन लोगों के दम पर तुम कूद रहे हो ना, वो तब केवल रीलबाजी ही करते रहेंगे और तुम अपना जीवन उनके चक्कर में बर्बाद कर लोगे।

अब दिपके भाई को शायद कोई यह भी बता दे कि सोशल मीडिया पर वायरल होना और जमीन पर राजनीतिक आंदोलन खड़ा करना दो बिल्कुल अलग चीजें हैं। मोबाइल स्क्रीन पर लाइक, शेयर और कमेंट जुटाना आसान है लेकिन तपती धूप में घंटों खड़े होकर किसी आंदोलन का हिस्सा बनना उतना आसान नहीं होता।

यही वजह है कि जिन लाखों-करोड़ों लोगों का समर्थन सोशल मीडिया पर दिखाई देता है, उनमें से मुट्ठीभर लोग भी जंतर-मंतर तक नहीं पहुँच पाए। यह अगर ऐसा ही चलता रहा है कि वो दिन दूर नहीं जब 2-4 लोग ढूँढे से ही तुम्हारे इस कथित आंदोलन के लिए नहीं मिलेंगे।

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शिव
शिव
7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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