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‘200 लोगों ने शमशान में पैरों से अस्थियाँ भी रौंद डालीं’: सरला भट्ट के भाई ने सुनाई दर्दनाक दास्ताँ, J&K में नर्स की बर्बर हत्या के बाद भी नहीं रुके इस्लामी कट्टरपंथी

सरला भट्ट कश्मीर के सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में एक नर्स के रूप में कार्यरत थीं। आतंकी उन्हें उठाकर ले गए 5 दिन बाद सड़क पर उनका शव पड़ा मिला था।

जम्मू-कश्मीर में बर्बरता का शिकार हुई कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट के अपहरण और बर्बर हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में है। 36 साल बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 700 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है जिसमें प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक को मुख्य आरोपित बनाया गया है।

737 पन्नों की चार्जशीट के मुताबिक, यासीन मलिक और उसके 4 साथियों ने मिलकर सरला भट्ट को अगवा करने और उनकी हत्या की साजिश रची थी। इस मामले के तीन अन्य आरोपित अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद युसूफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू की मौत हो चुकी है जबकि चौथा आरोपित और मुख्य शूटर खुर्शीद अहमद चालको फरार है। इस बीच सरला भट्ट के चचेरे भाई पीके भट्ट ने उनकी हत्या से जुड़ी भयावह घटनाओं को याद किया है।

बर्बर हत्या के बाद पैरों से रौंदी गईं अस्थियाँ

News18 J&K के साथ बातचीत के दौरान पीके भट्ट ने चार्जशीट दाखिल होने को लेकर कहा है कि इंसाफ तो तभी मिलना चाहिए था लेकिन अब वे इससे थोड़े संतुष्ट जरूर हैं। उन्होंने कहा, “अब सरला भट्ट की आत्मा को थोड़ा सा इंसाफ मिल जाएगा। उसकी आत्मा अभी भी भटकती होगी। अगर उस बेचारी को उसकी आत्मा को इंसाफ मिलेगा तब भी इंसाफ है।”

उन्होंने उस भयावह घटना को याद करते हुए बताया कि सरला को ड्यूटी से वापस आते समय किडनैप कर लिया गया था और उसके बाद रेप कर उनकी हत्या कर दी गई। पीके भट्ट ने अंतिम संस्कार के दौरान की गई बर्बरता को भी याद किया है। उन्होंने कहा, “दाह संस्कार करने के बाद जब हम अस्थियाँ उठाने गए, अस्थियाँ उठाते वक्त श्मशान घाट पर कम-से-कम 200 बंदे थे।”

पीके ने आगे कहा, “उन लोगों ने अस्थियाँ अपने पैरों से रौंद दी। वहाँ से हाथ जोड़कर हमने एक मुट्ठी राख उठाई। उसमें कोई अस्थि नहीं थी, खाली राख थी वो उठाई हमने फेरन में डाल दी और वहाँ से चले गए।” उन्होंने कहा, “वहाँ मौजूद लोग गालियाँ देते रहे, तुम सा*, हरा** यहाँ से निकले नहीं अभी तक। दूसरी दिन मकान का ब्लास्ट हो गया तो सब छोड़छाड़ कर वापस जम्मू आ गए।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस के राज में यासीन मलिक को मिलने वाले वीआईपी ट्रीटमेंट पर भी अपना दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, “दर्द की बात है कि यासीन मलिक, मनमोहन सिंह के साथ बैठता था। इससे बड़ी दर्द की बात क्या होगी कि एक देश का प्रधानमंत्री, एक उग्रवादी को अपने साथ बिठा रहा है।”

कौन थीं सरला भट्ट?

27 साल की सरला भट्ट जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में रहने वाली एक कश्मीरी पंडित थीं। शायद यही उनका गुनाह था। जब 1990 में घाटी में कश्मीरी पंडितों का जिहादियों ने नरसंहार किया, तब सरला भी उसका शिकार हुईं।

वे कश्मीर के सौरा स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में एक नर्स के रूप में कार्यरत थीं। आतंकी उन्हें उठाकर ले गए 5 दिन बाद सड़क पर उनका शव पड़ा मिला था।

सरला भट्ट के शरीर के टुकड़े कर बाजार में फेंके गए

14 अप्रैल 1990 का दिन था। जब सरला भट्ट SKIMS के हब्बा खातून हॉस्टल से आतंकियों ने उन्हें बंदूक की नोक पर अगवा कर ले गए। सरला भट्ट का 5 दिन तक कुछ पता नहीं लगा। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साथ गैंगरेप किया गया। उन्हें बुरी तरह टॉर्चर किया गया। 19 अप्रैल 1990 को उनका क्षत-विक्षत शव सड़क पर पड़ा मिला था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरला भट्ट के शव के पास एक नोट भी मिला था, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर बताया गया था। द हिंदू के मुताबिक, इस मामले में निगीन पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसकी संख्या 56/1990 है। हालाँकि, इसमें हिंदू नर्स के साथ रेप का कोई जिक्र तक नहीं है। इस बर्बर मामले में JKLF के पूर्व नेता पीर नूरुल हक शाह उर्फ एयर मार्शल का भी नाम सामने आया था।

700 से अधिक कश्मीरी पंडितों की हुई हत्या

सरला भट्ट केवल एकलौता नाम नहीं है, जिनकी बर्बरता से हत्या की गई। 1980-90 तक ऐसे 700 कश्मीरी पंडितों की घाटी में हत्या कर दी गई। ये हत्या कश्मीरी पंडितों के बीच दहशत फैलाने के लिए की गई थी।

आतंकी सरेआम हिंदू महिलाओं को घर से उठा ले जाते थे, कई माँ-बाप के सामने उनके बच्चों की हत्या हुई, हिंदुओं का मकान चुनकर निशाना बनाया जाता था। इन सब से परेशान होकर उस समय लगभग 3.5 लाख कश्मीरी पंडितों ने घाटी से पलायन किया था।

रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 तक घाटी में केवल 728 गैर-प्रवासी पंडित ही बचे हैं जबकि 2021 में 808 परिवारों की थी। ‘द कश्मीर फाइल्स’ भी कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और उनके पलायन को दर्शाने वाली फिल्म थी, जिसमें घाटी की असलियत दिखाई गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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