जिस तक्षशिला पर दुनिया को गर्व, उसके ऐतिहासिक स्थलों को चिनाई से बिगाड़ रहा पाकिस्तान: UNESCO ने जारी की कड़ी चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को (UNESCO) ने पाकिस्तान को तक्षशिला स्थित विश्व धरोहर स्थलों पर किए गए संरक्षण कार्यों को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। यूनेस्को का कहना है कि मोहरा मोराडू और सिर्कप जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर किए गए बदलावों से उनकी मूल ऐतिहासिक पहचान और प्रामाणिकता प्रभावित हुई है।

संस्था ने स्पष्ट किया है कि यदि इन हस्तक्षेपों को नहीं रोका गया और जरूरी सुधार नहीं किए गए, तो तक्षशिला को ‘विश्व धरोहर संकट सूची’ (World Heritage in Danger) में शामिल किया जा सकता है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह विवाद मार्च 2026 में सामने आया, जब एक पर्यटक ने तक्षशिला के ऐतिहासिक स्थलों पर हो रहे निर्माण कार्यों की तस्वीरें और जानकारी पाकिस्तान के यूनेस्को प्रतिनिधि को भेजी। तस्वीरों में प्राचीन दीवारों की जगह नई चिनाई और आधुनिक निर्माण सामग्री का इस्तेमाल दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व धरोहर स्थलों पर सीमेंट और आधुनिक निर्माण सामग्री का उपयोग यूनेस्को के संरक्षण मानकों के खिलाफ है। इसके बाद यूनेस्को, पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग और संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त टीम ने स्थल का निरीक्षण किया तथा विस्तृत रिपोर्ट, पुरानी और नई तस्वीरें तथा हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट माँगी।

पाकिस्तान का बचाव और भविष्य की चुनौती

पंजाब पुरातत्व विभाग के महानिदेशक मलिक जहीर अब्बास ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पुनर्निर्माण नहीं बल्कि संरक्षण का कार्य है। उनके अनुसार इन उपायों का उद्देश्य कमजोर हो चुके अवशेषों को सुरक्षित रखना और आगे होने वाले नुकसान को रोकना है।

हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बदलाव ऐतिहासिक स्थलों की मौलिकता को नुकसान पहुँचा सकते हैं। यह विवाद पाकिस्तान के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वह 1997 से 24 अन्य स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रहा है। तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्राचीन शिक्षण और सांस्कृतिक विरासतों में से एक माना जाता है, जिसका उल्लेख रामायण, महाभारत और अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है।