BAT-BMS मोबाइल ऐप को लेकर विवाद क्या सामने आया, सोशल मीडिया पर लेफ्ट-लिबरल गैंग ने फिर से EVM वाला अपना पुराना घिसा-पिटा एजेंडा बाहर निकाल लिया। ई-रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से जुड़े एक अलग तकनीकी मामले को ऐसे पेश किया जा रहा है, मानो इससे सीधे चुनाव आयोग, सरकार और EVM पर कोई बड़ा खुलासा हो गया हो।
हर चुनाव के बाद जनता के जनादेश को पचा न पाने वाला यही इकोसिस्टम अब एक मोबाइल ऐप के बहाने फिर से EVM पर शक पैदा करने की बदनाम मुहिम चलाता दिख रहा है। दावा किया जा रहा है कि यदि एक मोबाइल ऐप के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा को नियंत्रित किया जा सकता है तो EVM को हैक न किए जा सकने की बात कैसे कही जा सकती है।
हालाँकि BAT-BMS से जुड़ा मामला कुछ ब्लूटूथ-सक्षम लिथियम बैटरियों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में मौजूद सुरक्षा कमियों से जुड़ा है, जबकि EVM पूरी तरह अलग उद्देश्य और तकनीकी संरचना वाली प्रणाली है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर दोनों की तुलना करते हुए सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने लिखा, “मेरा देश के पढ़े लिखे लोगों से एक सवाल है। जब एक चाइनीज App से E- रिक्शा कंट्रोल किया जा सकता है तो EVM क्यों नहीं, क्या EVM इतनी सुरक्षित है कि दुनिया की कोई भी ताकत उसे हैक नहीं कर सकती..? अंधभक्त दूर रहें।”

जैकी यादव नाम के एक इन्फ्लुएंसर यूजर ने लिखा, “वैसे से एक बात सोचने वाली है कि चलता हुआ E-Rickshaw मोबाइल ऐप से बंद हो सकता है मगर EVM Hack नहीं हो सकती।”

इसी तरह एक अन्य यूजर ने पोस्ट किया, “पूछना ये था कि अगर चलता हुआ E-Rickshaw मोबाइल ऐप BAT-BMS से बंद हो सकता है तो फिर EVM Hack क्यों नहीं हो सकती?”

एक ने लिखा, “दूर बैठकर मोबाइल से एक व्यक्ति चलते वाहन को कंट्रोल कर रहा है लेकिन EVM हैक नहीं हो सकती? ये भी एक तरह का मजाक ही है! सच तो ये है हर इलेक्ट्रिक मशीन हैक हो सकती है?”

एक अन्य ने लिखा, “क्या यह सच में काम करता है? अगर काम करता है तब यह बहुत चिंता की बात है बताओ एक बैटरी रिक्शा एक app के माध्यम से कंट्रोल किया जा सकता है वो भी चीनी app से चिंता की बात है। अब E रिक्शा कंपनी वालों को EVM बनाने वाली टेक्नोलॉजी का उपयोग करना चाहिए ताकि उसे हैक करना संभव ही न हो?”

इन सभी पोस्ट में समान रूप से BAT-BMS ऐप और EVM के बीच तुलना करते हुए सीधे-सीधे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। हालाँकि सरकार और आयोग पर सवाल उठाने वाले इन तथाकथित बुद्धिजीवियों ने अपने दावों में यह नहीं बताया है कि BAT-BMS और EVM का उद्देश्य, तकनीक और कार्यप्रणाली पूरी तरह अलग है।
इनसे बताया भी नहीं जाएगा क्योंकि इससे इनके दावे निर्रथक साबित हो जाएँगे लेकिन हम आपको बताते हैं कि कैसे इसकी तुलना EVM से करना गलत है और ऐप कैसे काम करता है।
क्या है BAT-BMS ऐप और सरकार ने क्यों लिया एक्शन?
BAT-BMS (Battery Management System) एक स्मार्टफोन एप्लिकेशन है, जिसे ब्लूटूथ-सक्षम लिथियम बैटरी पैक की निगरानी और प्रबंधन के लिए विकसित किया गया है। इसे चीन की कंपनी शेन्जेन ग्रेनर्जी टेक्नोलॉजी (Shenzhen Grenergy Technology) ने बनाया है।
इस ऐप का मुख्य उद्देश्य बैटरी की तकनीकी जानकारी को मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराना है, ताकि उपयोगकर्ता अलग से किसी मॉनिटरिंग डिवाइस के बिना बैटरी की स्थिति की जाँच कर सके। इस ऐप के जरिए बैटरी का वोल्टेज, तापमान, चार्जिंग स्टेटस, करंट फ्लो, बैटरी की क्षमता और उसकी सेहत (Battery Health) जैसी जानकारियाँ देखी जा सकती हैं।
कुछ कम्पैटिबल बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में यह ऐप बैटरी के कुछ फंक्शन को नियंत्रित भी कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, यदि बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम इसकी अनुमति देता है तो ऐप के जरिए बैटरी के डिस्चार्ज फंक्शन को ऑन या ऑफ किया जा सकता है।
यदि किसी ई-रिक्शा में ब्लूटूथ-सक्षम BMS लगा हो और उसमें पर्याप्त पासवर्ड सुरक्षा या ऑथेंटिकेशन न हो, तो करीब 10 से 15 मीटर की दूरी के भीतर मौजूद व्यक्ति BAT-BMS जैसे ऐप के जरिए उससे कनेक्ट हो सकता है। कनेक्ट होने के बाद वह बैटरी की जानकारी देख सकता है और कुछ कम्पैटिबल सिस्टम में डिस्चार्ज फंक्शन को बंद भी कर सकता है।
हाल के दिनों में BAT-BMS ऐप तब चर्चा में आया, जब सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल हुए जिनमें कुछ लोग ब्लूटूथ के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से कनेक्ट होकर उसका डिस्चार्ज फंक्शन बंद कर देते थे। इससे चलते हुए ई-रिक्शा की बिजली आपूर्ति रुक जाती थी और वाहन वहीं रुक जाता था।
इसी का इस्तेमाल कर कुछ लोग ई-रिक्शा के पास जाकर मोबाइल ऐप के जरिए उसकी बैटरी का डिस्चार्ज सिस्टम बंद कर दे रहे थे। बाद में BAT-BMS ऐप में कुछ मामलों में पासवर्ड सुरक्षा जोड़ी गई। हालाँकि जाँच में यह भी सामने आया कि इसी तरह के फीचर वाले दूसरे बैटरी मैनेजमेंट ऐप के जरिए भी असुरक्षित सिस्टम तक पहुँच बनाई जा सकती है।
यानी समस्या किसी एक ऐप से ज्यादा कुछ असुरक्षित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी है। यही वजह रही कि सरकार ने BAT-BMS ऐप को हटाने के निर्देश दिए और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था की जाँच शुरू की। मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने एक 18 वर्षीय युवक को हिरासत में लिया है।
वह मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा बंद कर देता था और फिर उसे दोबारा चालू करने के नाम पर चालकों से 200 से 300 रुपए वसूलता था। इन सब के बाद केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया और IT मंत्रालय ने गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर से इस ऐप को हटाने का निर्देश दिया।
BAT-BMS और EVM अलग कैसे हैं?
सोशल मीडिया पर BAT-BMS ऐप के मामले को EVM से जोड़कर दावे किए जा रहे हैं, लेकिन तकनीकी रूप से दोनों प्रणालियाँ पूरी तरह अलग हैं। BAT-BMS एक बैटरी मैनेजमेंट एप्लिकेशन है, जबकि EVM का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को संचालित करना है। दोनों का डिजाइन, कार्यप्रणाली और उपयोग एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है।
EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कराने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली है। इसका उपयोग मतदाता का वोट दर्ज करने और मतदान प्रक्रिया को संचालित करने के लिए किया जाता है। एक EVM मुख्य रूप से तीन हिस्सों से मिलकर बनी होती है।
बैलेट यूनिट (BU), जिस पर मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने बटन दबाता है। कंट्रोल यूनिट (CU), जिसे मतदान अधिकारी संचालित करता है और जिसमें सभी वोट सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड होते हैं तथा VVPAT (वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल), जो कुछ सेकंड के लिए मतदाता को यह दिखाती है कि उसका वोट किस उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज हुआ।
मतदान पूरा होने के बाद मशीनों को सील कर दिया जाता है और मतगणना के समय कंट्रोल यूनिट से परिणाम निकाले जाते हैं। वहीं BAT-BMS (Battery Management System) एक स्मार्टफोन एप्लिकेशन है, जिसे ब्लूटूथ-सक्षम लिथियम बैटरी पैक की निगरानी और प्रबंधन के लिए विकसित किया गया है।
यह ऐप मोबाइल फोन को बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से जोड़कर बैटरी का वोल्टेज, तापमान, चार्जिंग स्टेटस, करंट फ्लो और बैटरी की स्थिति जैसी जानकारी दिखाता है। कुछ कम्पैटिबल बैटरी सिस्टम में यह बैटरी के कुछ फंक्शन, जैसे डिस्चार्ज को ऑन या ऑफ करने की सुविधा भी देता है।
हालिया विवाद इसलिए सामने आया क्योंकि कुछ ई-रिक्शा में इस्तेमाल हो रहे ब्लूटूथ-सक्षम बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम में पर्याप्त पासवर्ड सुरक्षा या ऑथेंटिकेशन नहीं था। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कुछ लोग BAT-BMS जैसे ऐप के जरिए बैटरी से कनेक्ट हो गए और डिस्चार्ज फंक्शन बंद कर दिया, जिससे ई-रिक्शा रुक गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या किसी एक ऐप की नहीं, बल्कि कुछ असुरक्षित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी है। यहीं से BAT-BMS और EVM के बीच सबसे बड़ा अंतर सामने आता है। BAT-BMS को शुरुआत से ही ब्लूटूथ के जरिए बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से कनेक्ट होने के लिए बनाया गया है।
इसके काम करने का आधार ही मोबाइल फोन और बैटरी के बीच ब्लूटूथ कनेक्शन है। इसके विपरीत, भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार EVM एक स्टैंडअलोन (Standalone) इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है। इसमें ब्लूटूथ, वाई-फाई, इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क या किसी अन्य वायरलेस संचार तकनीक का उपयोग नहीं किया जाता है।
यानी BAT-BMS जिस तरीके से किसी बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ता है, वैसी कनेक्टिविटी EVM में होती ही नहीं है। इसके अलावा दोनों प्रणालियों का उद्देश्य भी पूरी तरह अलग है। BAT-BMS का काम बैटरी की निगरानी और उसके संचालन से जुड़ा है, जबकि EVM केवल मतदान कराने और वोट रिकॉर्ड करने के लिए बनाई गई है।
एक सिस्टम ऊर्जा प्रबंधन (Battery Management) के लिए विकसित किया गया है जबकि दूसरा चुनाव प्रक्रिया के संचालन के लिए। इसी वजह से BAT-BMS ऐप से जुड़े मामले को आधार बनाकर EVM के बारे में समान निष्कर्ष निकालना तकनीकी रूप से पूरी तरह गलत है।
दोनों प्रणालियाँ अलग-अलग उद्देश्य, अलग तकनीकी ढाँचे और अलग कार्यप्रणाली पर आधारित हैं। यानी BAT-BMS जिस तरह के सिस्टम के लिए बनाया गया है, EVM उस श्रेणी की तकनीक का हिस्सा ही नहीं है। यही वजह है कि BAT-BMS ऐप को आधार बनाकर EVM के बारे में समान निष्कर्ष निकालना पूरी तरह गलत ही नहीं निराधार भी है।


