Homeविविध विषयअन्यअंतिम बाधा: सेमीफाइनल की अग्निपरीक्षा में आज आमने-सामने होंगे अर्जेंटीना और इंग्लैंड।

अंतिम बाधा: सेमीफाइनल की अग्निपरीक्षा में आज आमने-सामने होंगे अर्जेंटीना और इंग्लैंड।

रविवार देर रात न्यूजर्सी स्टेडियम में विश्व कप के फाइनल मुकाबले में स्पेन के सामने कौन खड़ा होगा, उसका फैसला आज रात होगा। आज रात भारतीय समयानुसार साढ़े बारह बजे अटलांटा स्टेडियम में इस प्रतियोगिता के दूसरे सेमीफाइनल में गत विजेता अर्जेंटीना का सामना थॉमस टुकेल की इंग्लैंड से है

कल डलास की रात एक ब्लॉकबस्टर मुकाबला था – फ्रांस बनाम स्पेन। वह उन रातों में से एक थी, जिनके लिए विश्व कप चार साल तक इंतज़ार करता है। फ्रांस बनाम स्पेन। पहला सेमीफ़ाइनल। नाम भले सेमीफ़ाइनल था, लेकिन दुनिया जानती थी, यह फ़ाइनल से पहले खेला जाने वाला फ़ाइनल है।

यह दो फुटबॉल संस्कृतियों, दो पीढ़ियों और दो सपनों का आमना-सामना था। एक ओर थे विश्व विजेता किलियन एमबाप्पे; रफ़्तार, विस्फोट और निर्णायक क्षणों के खिलाड़ी। दूसरी ओर था उन्नीस बरस का लामीन यमाल, जिसकी बाईं टांग से निकलती गेंदें आज की फुटबॉल दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत पहेलियाँ बन चुकी हैं।

दिलचस्प यह भी था कि दोनों क्लब फुटबॉल में ऐसे रंग पहनते हैं जिनकी दुश्मनी आधुनिक फुटबॉल की सबसे बड़ी कहानियों में गिनी जाती है। और राष्ट्रीय टीमों की जर्सी में भी दोनों की राहें कई बार टकरा चुकी थीं। यूरो 2024 का सेमीफ़ाइनल। फिर नेशन्स लीग 2025 का सेमीफ़ाइनल। दोनों बार स्पेन जीता। दोनों बार फ्रांस अधूरा रह गया।

इसलिए डलास की यह रात हिसाब बराबर करने का मौका थी। यमाल भी इसे समझते थे।

मैच से पूर्व संध्या पर दिए साक्षात्कार में लामीन यमाल कह भी चुके थे- “प्रेशर, और हम पर? जाओ जाकर यह सवाल उनसे करो क्योंकि हम दो दफा उन्हें हरा चुके हैं। प्रेशर तो उन पर होना चाहिए।”

एक तरफ़ दिदिएर देशां की फ्रांस; जिसने पूरे टूर्नामेंट में शायद सबसे संतुलित और सबसे शक्तिशाली फुटबॉल खेली थी। दूसरी तरफ़ लुई डे ला फ़ुएन्ते की स्पेन, जहाँ ग्यारह खिलाड़ी एक ही विचार की ग्यारह परछाइयाँ लगते हैं। साथ हमला, साथ बचाव, साथ जीत। यह एक बेहद जबरदस्त मैच होने जा रहा था। और फिर वह क्षण आ गया।

दोनों ही टीमें मैदान पर उतरती हैं। सत्तर हजार दर्शकों का शोर बता रहा था कि यह कितना बड़ा मैच है और आज जीतने के क्या मायने होने जा रहे हैं। दाँव पर यह तय होना था कि विश्व फुटबॉल की अगली कहानी किसके नाम लिखी जाएगी। 

रेफरी इवान बार्टन से इशारा मिलते ही विश्व कप के पहले सेमीफाइनल मैच की शुरुआत होती है। सफेद जर्सियां पहने फ्रेंच लड़ाके पहले मिनट से ही अटैक करते दिखते हैं। छठवें मिनट में ही आद्रियान राबियो गोल की दिशा में हमला करते हैं। मगर वो टार्गेट को हिट नहीं कर पाते। लेकिन तीन मिनट पश्चात ही आद्रियान राबियो को एक ख़तरनाक फाउल करने के लिए रेफरी द्वारा येलो कार्ड दिखा दिया जाता है। मैच में इतनी जल्दी एक कार्ड मिलने के चलते अब उन्हें एक लंबे समय तक सचेत रहते हुए खेलना होगा।

अब धीरे-धीरे स्पेन अपने रंग में आने लगती है। गेंद पर अच्छी पकड़। एलेक्स बाएना गोलपोस्ट पर निशाना साधते हैं। मगर वह भी निशाने से दूर रह जाते हैं। जवाबी कार्रवाई करते हुए माइकल ओलीस़ स्पेनिश गोलकीपर की परीक्षा लेते हैं। परन्तु उन्हें भी गोल करने में सफलता नहीं मिलती।

लेकिन, मैच के बीसवें मिनट में कुछ अप्रत्याशित घटित हो जाता है। अपने ही बॉक्स में अनुभवी फ्रेंच लेफ्ट बैक लुका डीने, गेंद क्लियर करने के प्रयास में, स्पेनिश राइट विंगर लामीन यमाल को एक किक जड़ देते हैं। फलस्वरूप, रेफरी द्वारा स्पेन को पेनाल्टी दे दी जाती है।

इक्कीस नंबर की जर्सी पहने, स्पेनिश सेंट्रल फॉरवर्ड, मिकेल ओयारजाबाल आगे बढ़ते हैं। रेफरी से इशारा मिलते ही वह स्पॉट किक लेने बढ़ते हैं। एक जोरदार किक। और गोल। माइक मैगनान का दुर्ग फतह कर लिया गया था। स्पेन मैच में 1-0 से आगे हो गई थी। ‘ला रोजा’ के हजारों समर्थकों के शोर से संपूर्ण स्टेडियम गूंजायमान हो उठा था। खेल आगे बढ़ता है। इस गोल के साथ स्पेन के हौसले और भी बुलंद हो गए थे। स्पेन अब अपने पारंपरिक अंदाज में खेलने लगी थी।

हाइड्रेशन ब्रेक के बाद खेल शुरू होता है। स्पेन छोटे-छोटे पासों के साथ आगे बढ़ रही थी। मैच के तीसवें मिनट में फ्रेंच टीम को एक और झटका लगता है। उनकी रक्षापंक्ति की कमान संभाल रहे सलीबा चोटिल हो गए थे। वह दर्द से कराह रहे थे। कोच दिदिएर देशां उन्हें मैदान से बाहर बुलाते हैं और उनके स्थान पर मैक्सेन्स लेक्र्वां को मैदान में भेजते हैं। सैंतीसवें मिनट में स्पेन के लेफ्ट बैक पेड्रो पोर्रो विरोधी गोलपोस्ट की ओर एक जोरदार किक लगाते हैं। फिर एक मिनट पश्चात फैबियान रुईज़ एक जबरदस्त आक्रमण करते हैं। परन्तु दोनों ही मौकों पर स्पेन को दूसरा गोल नहीं मिल पाता।

पहला हाफ समाप्त होता है। स्पेन एक गोल से बढ़त बनाए हुए थी। रोड्री, फैबियान रुईज़ व दानी ओल्मो का स्पेनिश मिडफील्ड कमाल कर रहा था। उनको खेलते देखना आंखों को सुकून दे रहा था। इस तिकड़ी ने फ्रेंच मिडफील्ड को बिल्कुल निचोड़ कर रख दिया था। इस कारण, पूरे टूर्नामेंट में आतंक मचाने वाली फ्रेंच अटैकिंग लाइन तक गेंद पहुंच ही नहीं पा रही थी।

दूसरे हाफ का खेल शुरू होता है। पहले हाफ की शुरुआत में ही येलो कार्ड पाए आद्रियान राबियो की जगह मानू कोने मैदान में उतरते हैं। यह कोच लुई डे ला फुएन्ते का रणनीतिक कौशल ही था कि स्पेन खेल के हर विभाग में इतना बढ़िया खेल रहा था कि मैच लगभग एकतरफा लगने लगा था। दस मिनट पश्चात आक्रमण को धार प्रदान करने के लिए फ्रेंच कोच दिदिएर देशां बार्कोला के स्थान पर देसिरे दोउ को अंदर लाते हैं। मंशा थी कि अटैक को दुरुस्त किया जाए और जल्दी एक गोल दाग कर मैच में बराबरी की जाए। परन्तु हुआ क्या? एक मिनट बाद ही दानी ओल्मो से मिले पास को स्पेनिश लेफ्ट बैक पेड्रो पोर्रो शानदार तरीके से फ्रेंच गोलपोस्ट के भीतर सरका देते हैं।

स्पेन अपनी बढ़त दुगुनी कर चुका था। स्टेडियम में मौजूद चालीस हजार से अधिक स्पेनिश समर्थकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। दानी ओल्मो और पेड्रो पोर्रो का तालमेल इतना शानदार था कि आप बस उसे आह भरते हुए निहार सकते थे। फ्रांस के पास अब स्पेन के खेल का कोई तोड़ नहीं था। दोनों ही टीमें लगातार विपक्षी गोलपोस्ट पर हमले करती हैं। दोनों ही टीमें गोल स्कोर करने के प्रयास करती दिखती हैं। मगर दोनों ही टीमों को इसमें सफलता नहीं मिलती। नब्बे मिनट का खेल पूर्ण हो चुका था। रेफरी द्वारा सात मिनट का इंजरी टाइम दिया जाता है। फ्रांस अंत तक अटैक करने की कोशिशें करती रहती है। आज उनका दिन नहीं था। उनकी तमाम कोशिशें आज नाकाफी साबित हो चुकी थीं।

रेफरी इवान बार्टन मैच समाप्ति की व्हिस्ल बजा देते हैं। स्पेन मैच जीत गया था। सारे स्टेडियम में ‘एस्पाना-एस्पाना’ के नारे गूंजने लगे थे। कैमरे का फोकस स्पेनिश खिलाड़ियों पर था।
पेड्री दानी ओल्मो को गले लगा रहे थे। टाइट स्पेसेज़ में क्या गजब पासेज़ निकाले थे उन्होंने। लामीन यमाल स्पेनिश समर्थकों के समीप जाकर जश्न मना रहे थे। एमबाप्पे विश्व विजेता खिलाड़ी हैं परन्तु, क्लब व राष्ट्रीय टीम के लिए, लामीन यमाल के खिलाफ पिछली ग्यारह मुलाकातों में नौ में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।

कप्तान रोड्री साथी खिलाड़ियों को गले लगा रहे थे। विश्व कप से पहले कहा जा रहा था कि अब उनकी उम्र और चोटों के चलते उनके पास राष्ट्रीय टीम को देने के लिए कुछ भी नहीं। आज उन्होंने मैदान में कमाल कर दिया था। उन्होंने जिस तरह खेल को डिक्टेट किया वो बेहद शानदार था। पेड्री की जगह प्लेइंग इलेवन में शामिल किए गए फैबियान रुईज़ ने कप्तान रोड्री का बखूबी साथ निभाया था। आजतक उनचास दफा उन्होंने स्पेनिश जर्सी में मैदान का रुख किया है और उन उनचास मौकों पर स्पेन कभी भी हारी नहीं है।

कभी फ्रांस का प्रतिनिधित्व करने वाले आय्म्रिक लापोर्त ने आज रक्षापंक्ति का शानदार तरीके से नेतृत्व किया था। फुलबैक्स पेड्रो पोर्रो व कुक्कुरेया ने न सिर्फ जबरदस्त रक्षण किया था बल्कि अटैक में लामीन आदि का क्या खूब साथ निभाया था। उन्नीस वर्षीय, बेबी फेस्ड असैसिन, पाउ कुबार्सी की जितनी तारीफ की जाए वो उतनी कम ही होगी। कभी चेहरे पर टांके लगवा कर अपनी टीम की खातिर मैदान में उतर गए इस उन्नीस वर्षीय लड़के ने आज, इतने बड़े मंच पर, किलियन एमबाप्पे, उस्मान डेंबेले, बार्कोला, माइकल ओलीस़ व देसीरे दोऊ को गोल मारने से वंचित रख दिया था।

इतनी छोटी उम्र में इतने बड़े मौके पर वह इन सभी बड़े खिलाड़ियों के विरुद्ध आज जिस बेखौफ अंदाज में खेला था वो वाकई देखने योग्य था। लुई डे ला फुएन्ते की स्पेन लगातार तीन सेमीफाइनल मैचों में फ्रांस को पीट चुकी है। फ्रांस का इस विश्व कप में एक खराब दिन रहा और वो विश्व कप से बाहर हो गए। अफसोस, वो बुरा दिन बीती रात था। वो टूर्नामेंट में सभी के फेवरेट्स थे। मगर आज अच्छा खेल खेलते हुए स्पेनिश टीम ने काबिले-तारीफ प्रदर्शन किया था।

पजैशन, पोजीशन व खेल को कैसे नियंत्रित करना होता है इसकी मास्टरक्लास आज स्पेन ने हम खेलप्रेमियों को दी। नौ जून, 2025 की रात, नेशन्स लीग के फाइनल मुकाबले में स्पेन पुर्तगाल से पेनाल्टी शूटआउट में हार गया था। इस दर्दनाक हार के बाद टूट चुके पेड्री ने अपने साथी खिलाड़ियों नीको विलियम्स व लामीन यमाल के साथ अपनी तिकड़ी की एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर साझा की थी। इस तस्वीर को उन्होंने एक अजीबोगरीब नंबर कैप्शन दिया था। वह नंबर था “19 07 2026″।

तब यह कैप्शन किसी को भी समझ नहीं आया था। आज स्पेन अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर फीफा विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुकी है। फाइनल खेले जाने की तारीख है -19.07.2026। किसी ने कहा है ना कि बहुत कुछ ग़लत होगा, सब कुछ सही होने से पहले। नौ जून, 2025 की रात नेशन्स लीग का फाइनल हार कर टूट चुके पेड्री 19.07.2026 को फीफा विश्व कप का फाइनल मुकाबला खेलने मैदान पर उतरेंगे।

अब फाइनल में स्पेन के सामने कौन होगा?

रविवार देर रात न्यूजर्सी स्टेडियम में विश्व कप के फाइनल मुकाबले में स्पेन के सामने कौन खड़ा होगा उसका फैसला आज रात होगा। आज रात भारतीय समयानुसार साढ़े बारह बजे अटलांटा स्टेडियम में इस प्रतियोगिता के दूसरे सेमीफाइनल में गत विजेता अर्जेंटीना का सामना थॉमस टुकेल की इंग्लैंड से है।

कोच थॉमस टुकेल के पास प्रत्येक पोजीशन पर एक ऐसा खिलाड़ी मौजूद है जो उनकी सिखलाई रणनीति को मैदान में हूबहू उतार दे। कप्तान हैरी केन व ज्यूड बेलिंघम तो शानदार गोल स्कोरिंग फॉर्म में हैं ही, एंथोनी गोर्डन व बुकायो साका आदि ने भी उनका बखूबी साथ निभाया है।

पहले तो राउंड ऑफ 16 में मेक्सिको के ख़िलाफ़ दो गोल मारने के पांच दिन बाद ही, ज्यूड बेलिंघम ने फिर दो बेहद अहम गोल दाग क्वार्टर फाइनल मैच में भी खेल का रुख इंग्लैंड की ओर मोड़ दिया था। तेईस वर्षीय ज्यूड बेलिंघम, कप्तान हैरी केन की भांति, अबतक इस विश्व कप में कुल छह गोल दाग चुके हैं।

इंग्लिश टीम अपने इतिहास में चौथी दफा विश्व कप का सेमीफाइनल खेलने उतरेगी। उसके पास जितना अच्छा अटैक है, उतना ही बढ़िया मिडफील्ड व डिफेंस भी है। मिडफील्ड में वर्क हॉर्स डेक्लन राइस के संग अपने जानदार खेल के चलते हाल-फिलहाल तमाम इंग्लिश क्लबों के मध्य चर्चा का विषय रहे एलियट एंडरसन हैं। वहीं डिफेंस में अनुभवी जॉन स्टोन्स के संग मार्क गुएही, जेड स्पेन्स, रीली, कोन्सा आदि मजबूत खिलाड़ी हैं।

पहले तो मेक्सिको और फिर नॉर्वे के खिलाफ मैच में इंग्लैंड ने बता दिया है कि उन्हें कभी भी कोई भी टीम कमतर आंकने की गुस्ताखी न करे। वह अंत तक लड़ते हैं। वहीं, दूसरी ओर अर्जेंटीना की टीम होगी। जो सेमीफाइनल में जगह तो बना चुकी है, परन्तु इसमें लियोनेल मेसी की जादूगरी का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

हाल के वर्षों की अर्जेंटीना की टीम अपने ब्रदरहुड के लिए जानी जाती है। यहां कोई स्टार कल्चर देखने के लिए नहीं मिलता। वन फॉर ऑल, ऑल फॉर वन। अपनी तमाम कमियों के साथ, यह टीम अंतिम सांस तक लड़ती है।

यही इस दुनिया की रीत है। सदैव अर्जुन के समक्ष एक कर्ण दब जाता है। आज रात होने जा रहे मुकाबले में अर्जेंटीना की नजरें एक बार फिर रोसारियो से निकले अपने जादूगर लियोनेल मेसी पर टिकी हुई होंगी। लेकिन आज रात उन्हें रोसारियो से निकले एक और खिलाड़ी की कमी बेहद खलेगी। कतर विश्व कप के सेमीफाइनल के उलट उनकी बाईं फ्लैंक पर आज रात ऐंजल डी मारिया नहीं होंगे। ऐंजल डी मारिया अर्जेंटीना के लिए हमेशा बड़े मैचों के खिलाड़ी रहे हैं। मगर इस टूर्नामेंट में अबतक अर्जेंटीनी फॉरवर्ड लाइन अमूमन खामोश ही नजर आई है। न ही कोई ऐसा खिलाड़ी रहा है जिसने ड्रिबल्स से विपक्षी खेमे में खलबली मचाई हो।

इतिहास का एक अपना स्वभाव होता है। वह घटनाओं को कभी पूरी तरह पीछे नहीं छोड़ता; उन्हें स्मृतियों की तहों में सुरक्षित रखता है और अवसर मिलते ही नए संदर्भों में फिर सामने ले आता है। विश्व कप का सेमीफ़ाइनल अक्सर ऐसा ही अवसर होता है, जहाँ वर्तमान की रणनीतियाँ अतीत की विरासत से संवाद करती हैं। आज अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में इंग्लैंड और अर्जेंटीना आमने-सामने होंगे। इतिहास की धूल से लिपटी ये दोनों टीमें जब 21 साल के अंतराल और वर्ल्ड कप के पन्नों में छठी बार आमने-सामने होंगी, तो हवा में 1966 की गौरवगाथा और 1986 के उस विवादित ‘हैंड ऑफ गॉड’ की गूँज स्पष्ट सुनाई देगी.. माराडोना का Hand of God और Goal of the Century.. 1998 का पेनल्टी शूटआउट, 2002 का बदला और अब पहली बार विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में यह टकराव। संयोग देखिए कि 6 विश्व कप भिड़ंतों के इतिहास में यह अध्याय पहले कभी लिखा ही नहीं गया। इंग्लैंड के लिए जूड बेलिंघम जैसे मिडफ़ील्डर शतरंज की बिसात पर वह वज़ीर हैं जो खेल की दिशा बदल सकता है। हैरी केन का हर स्पर्श किसी अनुभवी तलवारबाज़ के अंतिम वार जैसा है। दूसरी ओर, 39 वर्षीय लियोनेल मेसी उस दुर्लभ धूमकेतु की तरह हैं जिसकी चमक समय के नियमों को चुनौती देती है.. जो फुटबॉल के नश्वर पन्नों पर अपना अंतिम अध्याय लिखने आए हैं। मेसी, जिन्होंने विश्व फुटबॉल की हर लकीर को अपने पैरों से छुआ है, आश्चर्यजनक रूप से, 205 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के बावजूद यह उनका इंग्लैंड के विरुद्ध पहला मुकाबला होगा। आज की शाम का महत्व केवल इसलिए नहीं कि विजेता फ़ाइनल में स्पेन से भिड़ेगा। महत्व इसलिए भी है कि डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना अपने युग की निरंतरता बचाना चाहता है, जबकि 1966 के बाद पहली विश्व कप ट्रॉफ़ी की तलाश में इंग्लैंड अपनी सबसे संतुलित पीढ़ी के साथ मैदान में उतरेगा। फुटबॉल के इतिहास में कुछ मुकाबले आँकड़ों से शुरू होते हैं, लेकिन यादें बनकर समाप्त होते हैं। इंग्लैंड और अर्जेंटीना की प्रतिद्वंद्विता हमेशा उसी श्रेणी में रही है। महान टीमें ट्रॉफ़ियाँ जीतती हैं, लेकिन महान प्रतिद्वंद्विताएँ पीढ़ियाँ गढ़ती हैं। आज की रात भी शायद वैसी ही हो..

गत विजेता, अल्बीसेलेस्त, के कोच लियोनेल स्कालोनी जरूर काफी चिंताओं से घिरे हुए हैं। उनकी परेशानी का कारण है कि वह अपने अनुभवी खिलाड़ियों के साथ आगे बढ़ें या फिर अपनी टीम की कमजोरियों को ध्यान में रखते हुए बेंच पर मौजूद खुद को साबित करने के लिए भूखे युवा खिलाड़ियों जैसे वैलेंटीन बार्को, नीको पाज़ व सीमिओनी को मैदान पर उतारें।

ख़बरें हैं कि प्रैक्टिस सत्र में उन्होंने सीमिओनी व एज़ेक्विल पालासियोस का काफी पसीना बहाया। हो सकता है कि यह दोनों ही खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन का हिस्सा हों। कुछ हद तक जरूरी भी है कि कोच स्कालोनी अपनी प्लेइंग इलेवन में परिवर्तन करें क्योंकि न सिर्फ फॉर्वर्ड लाइन बेअसर रही है बल्कि मिडफील्ड में, पिछले विश्व कप के सितारे, एंजो फर्नानदेज़, मैक एलिस्टर व रोड्रिगो डि पॉल भी पूरे टूर्नामेंट में फॉर्म में नहीं रहे हैं। तमाम खिलाड़ियों पर थकान का असर साफ-साफ दिखाई देता है। वहीं युवा वैलेंटीन बार्को, नीको पाज़ व सीमिओनी अपनी बारी के इंतजार में बेंच पर बैठे ही रहे हैं।

अर्जेंटीना को अगर आज रात यह सेमीफाइनल जीतना है तो कुछ अलग करना ही होगा। निश्चित तौर पर ज्यूड बेलिंघम व हैरी केन की शानदार फॉर्म इंग्लैंड को इस मैच में एक अलग एज प्रदान करती दिखती है। अपनी रणनीतियों के लिए मशहूर, इंग्लिश कोच, थॉमस टुकेल जरूर कोशिश करेंगे कि दो से तीन खिलाड़ियों को मेसी को मैन-मार्क करने के लिए रखा जाए व गेंद को मेसी तक पहुंचने ही न दिया जाए। ऐसे में कोई खिलाड़ी होना चाहिए जो मिडफील्ड व डिफेंसिव लाइन में बनने वाली खाली जगहों का फायदा उठाकर इंग्लैंड को चोट पहुंचा सके। हूलियन अल्वारेज़ व लाउतारो मार्टिनेज को आज अपना सबकुछ झोंक देना होगा।

इंग्लैंड व अर्जेंटीना के मध्य एक बेहद पुरानी प्रतिद्वंद्विता है। कभी माराडोना का ‘हैंड ऑफ गॉड’ रहा हो या बेइंतहा गरमागरम माहौल में डेविड बेखम को मिला रेड कार्ड- इन दोनों ही टीमों के बीच खेले गए मैच कभी भी कोई शांतिपूर्ण मुकाबले नहीं रहे। एकबार तो 1966 विश्व कप के दौरान दोनों ही टीमों की भिड़ंत में इतने फाउल हुए कि दो बेहद घातक फाउल करने पर जब अर्जेंटीनी कप्तान को रेफरी द्वारा मैदान छोड़ने का निर्देश दिया गया तो उन्होंने बाहर जाने से इंकार कर दिया था। फिर, दो पुलिसकर्मी उन्हें मैदान से बाहर ले गए थे। फलस्वरूप, फीफा को फुटबॉल में येलो व रेड कार्ड की परंपरा शुरू करनी पड़ी थी।

परन्तु, अपने इतने बड़े करियर में आज रात पहली दफा मेसी इंग्लैंड के विरुद्ध मैदान में उतरेंगे। हाल के वर्षों में यह इंग्लैंड व अर्जेंटीना की पहली टक्कर होगी। देखना होगा कि टूर्नामेंट के दूसरे सेमीफाइनल में कौन सी टीम जीत दर्ज कर ट्रॉफी जीतने के लिए स्पेन से फाइनल में भिड़ने की हकदार बनती है।

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गौरव बडोला
गौरव बडोला
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