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मस्जिद को लेकर अफवाह, दंगों की साजिश में सपा सांसद बर्क का हाथ, पुलिस पर झूठा आरोप: संभल हिंसा जाँच की 857 पेज की रिपोर्ट योगी सरकार पर पहुँची, पढ़िए इसमें और क्या

संभल हिंसा 2024 की रिपोर्ट न्यायिक जाँच आयोग ने योगी सरकार को सौंप दी है। 857 पेज की विस्तृत रिपोर्ट में पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की गई है साथ ही बताया गया है कि ये हिंसा पूर्वनियोजित थी और इसमें सपा सांसद बर्क और विधायक इकबाल के बेटे का हाथ था, जिसने भीड़ को उकसाया

संभल हिंसा 2024 सुनियोजित साजिश का परिणाम था। इसमें समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर रहमान बर्क और सपा के ही विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल की अहम भूमिका थी। हिंसा की जाँच के लिए गठित न्यायिक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है। संभल हिंसा को लेकर आयोग ने सरकार को 857 पेज की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है।

जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद में 24 नवंबर 2024 को सर्वे के दौरान संभल जल उठा था। इसकी जाँच रिपोर्ट बुधवार (5 जुलाई 2026) को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश की गई। जानकारी के मुताबिक, इसमें कहा गया है कि सर्वे को लेकर मुस्लिमों में गलत सूचना फैलाई गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन गोलियों से मौतें हुई, वह पुलिस ने नहीं चलाई थी बल्कि पुलिस के हथियार लूटने की कोशिश की गई थी। आयोग ने हिंसा और आगजनी की घटना पर तत्परता से काबू पाने के लिए जिला प्रशासन की तारीफ की है।

सर्वे से पहले ही तैयार हो गई थी हिंसा की जमीन

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 24 नवंबर 2024 की हिंसा पूर्व नियोजित थी। रिपोर्ट में हिंसा के लिए प्रमुख रूप से सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, संभल विधायक पुत्र सोहेल इकबाल था।

इसके अलावा इंतजामिया कमेटी जामा मस्जिद संभल के सदर जफर अली, एडवोकेट कासिम जमाल, इंतजामिया कमेटी के सचिव मशहूद अली फारूकी एडवोकेट, इंतजामिया कमेटी के उपसदर लहदन खान और इंतजामिया समिति के अन्य सदस्यों ने मिलकर साजिश रची थी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन लोगों में 19 नवंबर 2024 को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) द्वारा पारित जामा मस्जिद सर्वे आदेश को लेकर नाराजगी थी। ये लोग मस्जिद की गतिविधियों में किसी तरह के हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं थे।

19 नवंबर के सर्वे आदेश के बाद रची गई बड़ी साजिश

घटना के बाद गठित किए गए तीन-सदस्यीय न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि हिंसा सुनियोजित साजिश का परिणाम थी। पूरे मामले की गहराई से छानबीन करने और तमाम साक्ष्यों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा किसी तात्कालिक विवाद की वजह से नहीं हुई थी, बल्कि इसकी पटकथा पहले ही रची जा चुकी थी।

हिंसा के दौरान पुलिस-प्रशासन पर पथराव, फायरिंग, हथियार लूट ली गई। इतना ही नहीं वाहनों और संपत्ति को आग के हवाले कर दिया गया। रिपोर्ट में लोगों को उकसाने एवं भड़काने में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क समेत कई लोग शामिल थे। ये हिंसा 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के पास शुरू हुई थी। इसमें 4 लोगों की मौत हुई थी जबकि कई लोग घायल हुए थे।

वीडियो के जरिए फैलाया गया भ्रम, फिर भड़काई गई हिंसा

न्यायिक जाँच रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ असामाजिक तत्वों ने वीडियो बना कर लोगों को उकसाया और भड़काऊ संदेश दिए। इनलोगों ने मुस्लिम समुदाय को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि सर्वे के बहाने जामा मस्जिद को हड़पने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके बाद 24 नवंबर को सर्वे के दौरान माहौल बिगड़ गया और हिंसक घटनाएँ हुईं। रिपोर्ट में मस्जिद में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों के बाद नारेबाजी, पथराव, आगजनी और गोलीबारी का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है।

पुलिस पर पथराव, गोलीबारी और वाहनों में आगजनी

आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़ ने सुनियोजित तरीके से पुलिस पर पथराव और गोलीबारी की। इसके साथ ही हथियार और दंगा नियंत्रण सामग्री लूटने, वाहनों व संपत्ति को आग के हवाले करने की घटनाएँ भी हुईं। इस दौरान 28 पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी घायल हुए। वहीं घटना में चार लोगों की मौत का भी रिपोर्ट में जिक्र है।

आयोग के अनुसार, 24 नवंबर की हिंसा में हुई मौतों के लिए मुस्लिम पक्ष की ओर से की गई सुनियोजित साजिश जिम्मेदार है। मरने वालों में कोट कुर्वी इलाके के रहने वाला नईम, सराय तरीन निवासी बिलाल, संभल के हयात नगर का नुमान और एक 19 साल के लड़के के तौर पर हुई।

चारों मृतकों के रिश्तेदारों ने जो FIR दर्ज कराई थी, उनमें अनजान लोगों के नाम थे और उन्होंने अपनी शिकायतों या पैनल के सामने अपने बयानों में पुलिस पर हत्या का आरोप नहीं लगाया था।

रिपोर्ट में आगे लिखा था, “जिन डॉक्टरों ने ऑटोप्सी की… उनकी राय थी कि उनकी मौत गोली लगने से हुई थी। स्थानीय पुलिस अधिकारी ने अपने एडिशनल एफिडेविट के साथ बैलिस्टिक रिपोर्ट भी फाइल की थी। इसके मुताबिक मरने वाले के शरीर पर मिली चोटें .315 बोर के हथियारों से लगी होंगी। लेकिन रिकॉर्ड में किसी भी पुलिस वाले के पास .315 बोर का कोई हथियार था, इसके कोई सबूत नहीं हैं।” वहीं रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सात पुलिस वालों को ‘हिंसक भीड़ की फायरिंग’ की वजह से गोली लगी।

बर्क और सोहेल इकबाल के राजनीतिक वर्चस्व में उग्र हुई हिंसा

आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक जिया-उर-रहमान बर्क, सोहेल इकबाल, जफर अली, कासिम जमाल और मशहूद अली फारूकी आदि ने मुकदमा संख्या 182/2024 के तथ्यों को छिपाकर ऐसा भ्रामक प्रचार किया कि हिंदू मस्जिद को ढहाना चाहते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि बर्क और सोहेल इकबाल राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने और सरकार-पुलिस को बदनाम करने के लिए लोगों को उकसाना चाहते थे।

दोनों के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी थी। जिले में मुस्लिमों के तुर्क और पठान गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी हिंसा का कारण बनी। जाँच में सामने आया कि घटनास्थल से 12-बोर के कारतूस मिले थे। ये बात भी सामने आया है कि हिंसा में स्थानीय और बाहरी उपद्रवी दोनों शामिल थे।

हिंसा की जाँच के लिए तीन सदस्यीय आयोग का हुआ था गठन

हिंसा की जाँच के लिए योगी सरकार ने 28 नवंबर 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक जाँच आयोग गठित किया। आयोग का मकसद 24 नवंबर की हिंसक घटना के कारणों और उससे जुड़े पहलुओं की पड़ताल करना था।

रिपोर्ट में हिंसा की पृष्ठभूमि से लेकर भीड़ के व्यवहार, पुलिस पर हमले, आगजनी, गोलीबारी और मौतों से जुड़े पहलुओं को सामने रखा गया है। आयोग के निष्कर्षों ने 24 नवंबर की घटना को अचानक हुई हिंसा के बजाय पूर्व नियोजित साजिश और सुनियोजित उकसावे की कार्रवाई से जोड़ते हुए पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पुलिस प्रशासन की भूमिका सराहनीय- आयोग

हिंसा के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के घायल होने के बावजूद जिला प्रशासन और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्परता से कार्रवाई की। इस प्रभावी कार्रवाई के लिए जाँच आयोग ने जिला प्रशासन की भूमिका की तारीफ की है। उनका कहना है कि मृतकों के परिजनों ने भी पुलिस फायरिंग से मौत का दावा नहीं किया। एफएसएल और सीन री-क्रिएशन रिपोर्ट में भी यही पता चलता है कि सभी चार लोगों की मौत पुलिस की गोली से नहीं हुई थी।

कौन है जियाउर रहमान बर्क

समाजवादी पार्टी के टिकट पर संभल से लोकसभा चुनाव 2024 में जीत दर्ज करने वाले जियाउर रहमान बर्क की पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है। उसके दादा शफीकुर रहमान बर्क संभल से पूर्व सांसद थे। बर्क का जन्म 13 जुलाई 1988 को संभल में ही हुआ था।

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्होंने जो हलफनामा प्रस्तुत किया, उसके अनुसार, उन्होंने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनके पास कानून में स्नातक और कला में स्नातक की दो डिग्रियां हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वे छात्र राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल रहे और 2005-06 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ (AMUSU) से जुड़े रहे।

शुरुआत में, बर्क 2017 तक असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) से जुड़े रहे। बाद में, वे अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी (एसपी) में शामिल हो गए और उत्तर प्रदेश विधानसभा के 18वें सत्र में विधायक चुने गए। उन्होंने 1 मार्च 2022 से 4 जून 2024 तक कुंदरकी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 लड़ा और संभल निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए।

संभल हिंसा के बाद जो एफआईआर दर्ज हुई थी उसमें कहा गया था 22 नवंबर को जियाउर रहमान बर्क जामा मस्जिद गए। नमाज अदा करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक अनुमति के बिना भीड़ इकट्ठा की और भड़काऊ बयान दिए। राजनीतिक लाभ के लिए उन्होंने भीड़ को सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए उकसाया।

इसके अलावा एफआईआर में विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल का भी जिक्र था, जो हिंसा भड़कने वाले दिन भीड़ में मौजूद था। एफआईआर में कहा गया था कि सुहैल इकबाल ने भीड़ को उकसाते हुए कहा था कि जियाउर रहमान बर्क हमारे साथ है, हम भी तुम्हारे साथ हैं। हम तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे। अपने इरादे पूरे करो। इसके बाद भीड़ हिंसक हो गई।

न्यायिक रिपोर्ट ने भी दोनों को हिंसा की साजिश रचने का दोषी माना है। इससे पहले सीएम योगी ने भी कहा था कि न्यायिक रिपोर्ट आने पर पता चल जाएगा कि संभल हिंसा में कौन कौन दोषी है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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