आज जिन रस्तोगी परिवार को योगी सरकार जमीन दी जा रही है, उस परिवार के मुखिया रामशरण रस्तोगी को 1978 में भड़के सांप्रदायिक दंगों में बेरहमी से काटकर कुएँ में फेंक दिया था।
साल 2025 'न्याय' नहीं बल्कि न्यायिक सतर्कता वाला रहा। वाराणसी के ज्ञानवापी कॉम्प्लेक्स, मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि विवाद, मदुरै का कार्तिगई दीपम विवाद जस का तस रहा।
संभल हिंसा की जाँच के लिए बनाई गई न्यायिक समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट में संभल के हिंदू परिवारों का बड़े स्तर पर पलायन का जिक्र है।
संभल दंगे की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह दंगा अचानक नहीं भड़का बल्कि इसे साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। इसमें सपा सांसद बर्क के भड़काऊ बयान का भी जिक्र है।
संभल हिंसा में SIT की चार्जशीट में खुलासा हुआ कि दुबई में बैठा साजिशकर्ता शारिक साठा है और उसने ही हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन की हत्या की साजिश रची थी।