Homeदेश-समाजकल शाम से शुरू हो जाएँगी यस बैंक की सारी सेवाएँ, कैश की कमी...

कल शाम से शुरू हो जाएँगी यस बैंक की सारी सेवाएँ, कैश की कमी नहीं: विपक्षी प्रोपेगंडा फेल

"यस बैंक की सभी ऑनलाइन सेवाएँ पूरी तरह से काम कर रही है। बैंक के एटीएम में नकदी की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। एसबीआई अपने शेयर्स बेचने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। लेकिन, मैं विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि अगले तीन वर्षों तक यस बैंक का एक भी शेयर नहीं बेचा जाएगा।"

केंद्र सरकार ने कई बार स्पष्ट किया है कि यस बैंक के खाताधारकों का रुपया नहीं डूबेगा। विपक्षी दलों और वामपंथियों द्वारा लगातार अफवाह फैलाई जा रही थी कि यस बैंक के डूबने में सरकार का हाथ है और इसके जितने भी खाताधारक हैं, उन सभी के रुपए कभी वापस नहीं मिलेंगे। बाद में जब पता चला कि यस बैंक के संस्थापक राणा कपूर ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी की पेंटिंग पूरे 2 करोड़ रुपए में ख़रीदी थी, तब से कॉन्ग्रेस नेताओं ने चुप्पी साध ली। राणा कपूर की तीनों बेटियों के नाम भी इस धोखाधड़ी में सामने आए हैं।

अब ताज़ा ख़बर आई है कि बुधवार (मार्च 18, 2020) की शाम 6 बजे के बाद से यस बैंक के ग्राहक सभी प्रकार की बैंकिंग सेवाओं व सुविधाओं का पूर्ववत लाभ उठा सकेंगे। बैंक के नए प्रबंध निदेशक प्रशांत कुमार ने उक्त जानकारी दी है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के जानकारी दी कि बैंक के पास नकदी की कोई कमी नहीं है। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 मार्च को यस बैंक के सारे कामकाज पर पाबंदी लगा दी थी। बैंक के ग्राहकों को 3 अप्रैल तक खाते से 50,000 रुपए तक निकालने की अनुमति दी गई थी। यस बैंक के अधिकारियों ने कहा:

“यस बैंक की सभी ऑनलाइन सेवाएँ पूरी तरह से काम कर रही है। बैंक के एटीएम में नकदी की किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। एसबीआई अपने शेयर्स बेचने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। लेकिन, मैं विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि अगले तीन वर्षों तक यस बैंक का एक भी शेयर नहीं बेचा जाएगा।”

यस बैंक ने अपने बैंक के निदेशक मंडल के पुनर्गठन की भी मंजूरी दे दी है। रिजर्व बैंक ने ही प्रशांत कुमार को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया था। वो बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी हैं। वो एसबीआई के मुख्य वित्त अधिकारी और उप प्रबंध निदेशक के रूप में काम कर चुके हैं। वहीं पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व गैर-कार्यकारी निदेशक सुनील मेहता को यस बैंक का गैर-कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि यस बैंक विदेशी निवेशकों का विश्वास जीतने में भी कामयाब सिद्ध होगा। बैंक के अधिकारियों ने कहा है कि खाताधारकों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -