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गंगा किनारे खोजी गई 50 से अधिक पुरातात्विक साइट: प्रयागराज में ASI ने किया बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण

भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI), नई दिल्ली ने कॉलेज को पुरातात्विक सर्वेक्षण करने की अनुमति प्रदान की थी। विभाग की टीम ने शृंगपुर और दारागंज से लेकर कौशाम्बी स्थित काली पल्टन तक गंगा के दोनों तरफ गाँवों में पैदल घूम कर 50 पुरातात्विक स्थल खोज निकाले।

ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की टीम ने प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में पुरातात्विक महत्व वाले 50 पुरास्थलों को चिन्हित किया है। भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI), नई दिल्ली ने कॉलेज को पुरातात्विक सर्वेक्षण (archaeological survey) करने की अनुमति प्रदान की थी। विभाग की टीम ने शृंगपुर और दारागंज से लेकर कौशाम्बी स्थित काली पल्टन तक गंगा के दोनों तरफ गाँवों में पैदल घूम कर 50 पुरातात्विक स्थल खोज निकाले। 

यह पुरातात्विक सर्वेक्षण 70 किलोमीटर से ज़्यादा लम्बाई और 3 से 5 किलोमीटर की चौड़ाई में किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कॉलेज के प्राचार्य, विभागाध्यक्ष और प्रोजेक्ट के डायरेक्टर प्रोफेसर आनंद शंकर सिंह और प्रोजेक्ट के डिप्टी डायरेक्टर व असिसटेंट प्रोफेसर जमील अहमद ने अपने टीम के साथ यह सर्वेक्षण करने का निर्देश जारी किया था। 

ऐसा संभवतः पहली बार हुआ है जब पुरातत्व विभाग ने इतने बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में सर्वेक्षण किया है। 

इस सर्वेक्षण की जानकारी देते हुए प्रोफेसर आनंद कुमार सिंह ने बताया, “प्रयागराज के भीतर फूलपुर, सदर, सोराँव तथा कौशाम्बी के चायल अंतर्गत गंगा के दोनों किनारों पर बसे लगभग 80 गाँवों में सर्वेक्षण कार्य किया गया। नतीजतन यहाँ से पुरातात्विक महत्व के कुल 50 स्थानों को चिन्हित करके उनका अभिलेखीकरण किया गया है। वहाँ पाषाण काल से लेकर मुग़ल काल और उसके परवर्ती काल तक के तमाम पुरातात्विक अवशेष बरामद किए गए हैं। इसमें कई प्रकार की मिट्टी की मूर्तियाँ, माइक्रोलिथ, मनके एवं प्रस्तर, लोहे, हड्डी और हाथी दांत से बने उपकरण, मृदभांड और बहुमूल्य पत्थर बरामद किए गए हैं।”

बरामद की गई इन सभी चीज़ों को कॉलेज के पुरातात्विक विभाग में आगामी शोध कार्यों के लिए सुरक्षित रख दिया गया है। परंपरागत और वैज्ञानिक शैली से किए गए इस सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट भारतीय पुरातात्विक विभाग, नई दिल्ली की वार्षिक पत्रिका ‘इंडियन आर्कियोलॉजी- ए रिव्यू’ में प्रकाशित होने के लिए भेजा गया है। इस सर्वेक्षण में इलाहाबाद विश्वविद्यालय स्थित प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमेश चंद्र चटोपाध्याय और डॉ. माणिक चंद्र गुप्ता ने भी अहम भूमिका निभाई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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