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अब आदिवासी बच्चों को मिलेगा शिक्षा का नया आयाम, 4 जिलों में जल्द खुलेंगे एकलव्य स्कूल: योगी सरकार ने भेजा प्रस्ताव

यूपी सरकार के अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग के उप निदेशक आरपी सिंह ने मीडिया से बताया है कि सोनभद्र में एक एकलव्य स्कूल खुलने वाला है, जबकि ललितपुर में निर्माणाधीन है और वहाँ काम तेजी से जारी है। इसके अलावा बहराइच और लखीमपुर खीरी में एकलव्य विद्यालय पहले से चल रहे हैं।

केन्द्रीय बजट में शिक्षा और विद्यार्थियों का खास खयाल रखा गया है। एक तरफ जहाँ पीपीपी (सार्वजनिक-निजी-भागीदारी) मोड पर 100 सैनिक स्कूल खोलने की बात कही गई है, वहीं देश भर में 750 एकलव्य स्कूल खोले जाने का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जन जाति बाहुल्य इलाकों में शिक्षा की दिशा में यह बेहतरीन कदम बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भी चार एकलव्य स्कूल अगले वित्तीय वर्ष में और खोले जाएँगे। केन्द्र सरकार के पास इस आशय का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। ये विद्यालय सोनभद्र के दुद्घी के अलावा लखनऊ, बिजनौर और श्रावस्ती में खोले जाएँगे।

यूपी सरकार के अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग के उप निदेशक आरपी सिंह ने मीडिया से बताया है कि सोनभद्र में एक एकलव्य स्कूल खुलने वाला है, जबकि ललितपुर में निर्माणाधीन है और वहाँ काम तेजी से जारी है। इसके अलावा बहराइच और लखीमपुर खीरी में एकलव्य विद्यालय पहले से चल रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक सोनभद्र जैसे पहाड़ी इलाकों में एकलव्य स्कूल के निर्माण में करीब 48 से 50 करोड़ रुपए और मैदानी इलाकों में निर्माण पर करीब 38 करोड़ रुपए के आसपास खर्च आता है। सहशिक्षा वाले ये विद्यालय आश्रम पद्धति की तर्ज पर संचालित होते हैं। हालाँकि, इनके निर्माण और संचालन के मानक आश्रम पद्वति विद्यालयों से ज्यादा बेहतर होते हैं। इनमें 90 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होती हैं।

बता दें कि एकलव्य विद्यालय नि:शुल्क आवासीय विद्यालय होते हैं, जिनमें नब्बे प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के बच्चों के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं। यह सह शिक्षा वाले विद्यालय होते हैं। यह आश्रम पद्धति की तर्ज पर संचालित होने वाले विद्यालय होते हैं, मगर इनके निर्माण व संचालन के मानक आश्रम पद्वति विद्यालयों से ज्यादा बेहतर होते हैं।

दरअसल, एकलव्य स्कूलों की स्थापना आदिवासी बहुल ब्लॉकों में की जाती है (जहाँ 50% से ज्यादा की जनसंख्या आदिवासी समुदाय की होती है)। सरकार चाहती है कि आदिवासी इलाकों से आने वाले बच्चे अपने ही परिवेश में एक अच्छी शिक्षा पा सकें। गौरतलब है कि आदिवासी समुदाय के लिए बनाए गए बहुत से विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे ही चल रहे हैं।

यहाँ संसाधनों की भी कमी है। लेकिन सरकार की इस नई योजना से आदिवासी अंचल में अच्छी शिक्षा मुहैया कराने के प्रयासों को गति मिलेगी। इसके साथ ही, बच्चों को स्थानीय कला सीखने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, देश की संस्कृति, खेलों और कौशल को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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